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उर्मिल बांध सूखने से मची हाय तौबा
Mahoba
Updated Wed, 13 Feb 2013 05:31 AM IST
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महोबा। यूपी-एमपी की सरहद पर बने उर्मिल बांध ने अभी से जवाब दे दिया है। हालत यह है कि फरवरी माह में ही बांध का पानी काफी कम हो जाने से इंटेकवेल तक नाली बनाकर पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसके चलते आने वाले गर्मी के दिनाें में पानी संकट के आसार बढ़ गए हैं।
गौरतलब है कि उर्मिल बांध का पानी इस बार डेड लेवल पर आने के बाद भी एमपी के किसानाें ने पानी लूट लिया। इसके बाद एमपी के छतरपुर जनपद के सिंचाई विभाग के अफसराें ने पेयजल आपूर्ति के लिए संरक्षित पानी को नहर खोलकर सिंचाई के लिए दे दिया। इसके चलते पानी को लेकर अभी से हाय तौबा मचने लगी है। 24 घंटे में महज एक बार हो रही पानी की आपूर्ति के बाद भी आधा घंटे ही मुश्किल से पानी की सप्लाई की जा रही है।
महोबा शहर में चंदेल कालीन मदन सागर सरोवर के अलावा सदनऊ मदनऊ प्राचीन कुआें से पानी की आपूर्ति की जाती है। गर्मी के दिनाें में हर साल मदन सागर के सूख जाने से बढ़ रही पानी की किल्लत के मद्देनजर जिला प्रशासन ने 35 करोड़ की लागत से वर्ष 2005 में महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना की शुरुआत कराई थी। इस परियोजना के तहत उर्मिल बांध से महोबा तक 32 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाकर शहर के अलावा श्रीनगर में भी पानी की आपूर्ति कराई गई।
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वर्ष 2012 में महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना की शुरुआत हो जाने से दो साल तक लोगों को भरपूर पानी मिला। लेकिन इस साल एमपी के अफसराें द्वारा बांध के डेड लेवल पर आने के बाद भी नहराें में पानी खोल दिए जाने से बांध खाली हो गया। यही वजह है कि जाड़ाें के दिनाें में ही बांध के पानी को इंटेकवेल तक नाली बनाकर लाया जा रहा है। जल संस्थान के अधिकारी पेयजल समस्या की किल्लत से इंकार करते हैं। उनका कहना है कि मदन सागर सरोवर से ही गर्मियाें में भरपूर पानी की आपूर्ति की जाएगी।
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गौरतलब है कि उर्मिल बांध का पानी इस बार डेड लेवल पर आने के बाद भी एमपी के किसानाें ने पानी लूट लिया। इसके बाद एमपी के छतरपुर जनपद के सिंचाई विभाग के अफसराें ने पेयजल आपूर्ति के लिए संरक्षित पानी को नहर खोलकर सिंचाई के लिए दे दिया। इसके चलते पानी को लेकर अभी से हाय तौबा मचने लगी है। 24 घंटे में महज एक बार हो रही पानी की आपूर्ति के बाद भी आधा घंटे ही मुश्किल से पानी की सप्लाई की जा रही है।
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महोबा शहर में चंदेल कालीन मदन सागर सरोवर के अलावा सदनऊ मदनऊ प्राचीन कुआें से पानी की आपूर्ति की जाती है। गर्मी के दिनाें में हर साल मदन सागर के सूख जाने से बढ़ रही पानी की किल्लत के मद्देनजर जिला प्रशासन ने 35 करोड़ की लागत से वर्ष 2005 में महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना की शुरुआत कराई थी। इस परियोजना के तहत उर्मिल बांध से महोबा तक 32 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाकर शहर के अलावा श्रीनगर में भी पानी की आपूर्ति कराई गई।
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वर्ष 2012 में महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना की शुरुआत हो जाने से दो साल तक लोगों को भरपूर पानी मिला। लेकिन इस साल एमपी के अफसराें द्वारा बांध के डेड लेवल पर आने के बाद भी नहराें में पानी खोल दिए जाने से बांध खाली हो गया। यही वजह है कि जाड़ाें के दिनाें में ही बांध के पानी को इंटेकवेल तक नाली बनाकर लाया जा रहा है। जल संस्थान के अधिकारी पेयजल समस्या की किल्लत से इंकार करते हैं। उनका कहना है कि मदन सागर सरोवर से ही गर्मियाें में भरपूर पानी की आपूर्ति की जाएगी।