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शासन की गलत खनिज नीति ने पत्थर उद्योग की तोड़ी कमर

Sat, 09 Feb 2019 10:30 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 09 Feb 2019 10:30 PM IST
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शासन की गलत खनिज नीति ने पत्थर उद्योग की तोड़ी कमर

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कबरई (महोबा)। भाजपा सरकार की नई खनिज नीति से पत्थर मंडी कबरई धड़ाम हो गई हैं। यहां पर एक सैकड़ा से ज्यादा क्रेशरों में ताले लटक गए हैं। इससे पत्थर कारोबारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। तमाम पत्थर कारोबारी घर बैठ गए हैं।
ढाई साल पहले खनन मामलों पर सीबीआई की जांच के आदेश देने के साथ ही सभी खनन पट्टों पर रोक लगा देने के कारण प्रदेश में गिट्टी बालू की कीमतें आसमान छूने लगी थी। सूबे की भाजपा सरकार द्वारा आम लोगों तक सस्ते दाम पर बालू, गिट्टी देने के लिए मई 2017 में नई खनिज नीति लागू की गई। जो व्यापारियों के लिए गले की फांस बन गई है। साथ ही गलत खनिज नीति के क्रियांवित होते ही एक साल के अंदर पांच हजार करोड़ की कबरई पत्थर मंडी के 100 से अधिक क्रेशर प्लांट बंद हो गए। एक साल में बढ़ते पत्थर उद्योग में घाटे के कारण बड़े पैमाने पर क्रेशर प्लांट बंद हो गए, जिससे मंडी में आर्थिक संकट पैदा हो गया।
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कबरई क्रेशर मंडी में 1966 में मैकेनिकल इंजीनयर प्रेम नाथ शर्मा ने मोचीपूरा के गाटा संख्या 323 में पहला स्टोन क्रेशर लगाया था। इसके बाद धीमे-धीमे गिट्टी की मांग बढ़ने पर 1980 से 1990 के दशक के बीच लगभग तीन दर्जन क्रेशर प्लांट लग गए। सड़कों का तेजी से विकास होने पर गिट्टी की मांग बढ़ी। वर्ष 2000 तक प्लांट की संख्या बढ़कर 100 से अधिक हो गई। 2018 में मंडी में सर्वाधिक मांग बढ़ने से यह संख्या 300 पार कर गई। कबरई मंडी में करीब 25 हजार श्रमिकों को रोजगार मिल गया।
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मंडी में 350 से अधिक खनन पट्टे 2011 के बीच थे। जो सपा सरकार की गलत खनन नीति के कारण बढ़े तो नहीं। उल्टा 2017 आते-आते भाजपा की नई सरकार में यह संख्या 200 आ गई और जनवरी 2019 में पहाड़ों की संख्या घटकर 72 तक सिमट कर रह गई। सूबे की भाजपा सरकार ने गिट्टी, बालू की दरें आम लोगों की पहुंच तक लाने के लिए नई खनिज नीति मई 2017 में लागू की। जिसमें प्रति हेक्टेयर रॉयल्टी की मात्रा 65 हजार से घटाकर 10 हजार कर दी। जनवरी 2018 में यहां से 6 हजार ट्रक गिट्टी की निकासी प्रतिदिन होने लगी। अब ये संख्या घटकर 900 से एक हजार ट्रक प्रतिदिन पर सिमट गई है, जिससे पत्थर कारोबार बंदी की कगार पर पहुंच गया है।
भाजपा सरकार में तेजी से एक्सप्रेस-वे, फ्रंट रेल कॉरिडोर, फोरलेन सड़कों के निर्माण को लेकर गिट्टी की मांग तेजी से बढ़ गई। इधर पत्थर मंडी में रॉयल्टी की भारी कमी के चलते गिट्टी की गाड़ियों की आवाजाही ठप हो गई। इससे एक्सप्रेस वे जैसे तमाम विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के आसार बढ़ गए हैं।

क्रेशर मालिक ब्रजमोहन सिंह का कहना है कि नई खनन नीति पूरी तरह विफल होने के कारण लोग ई-नीलामी के पट्टे नहीं ले पा रहे। साथ ही महंगे पट्टे होने रॉयल्टी में सेंसरशिप लग जाने से माल को निकासी के लिए लोग परेशान हो गए और कारोबार ठप होता जा रहा है। युवा क्रेशर उद्यमी सौरभ शर्मा का कहना है कि वे दक्षिण में फिल्में बनाते तो सुकून में थे मंडी की चकाचोंध देख पुराना पैतृक क्रेशर कारोबार संभालने महोबा आ गए। अब शासन की नई खनिज नीति सभी के ऊपर भारी पड़ रही है। राम किशोर सिंह ने कहा कि शासन को नीति में बदलाव करना पड़ेगा तभी ये उद्योग चल पाएगा।

एक सैकड़ा क्रेशरों पर लटके ताले, पत्थर कारोबार ठप
-पांच हजार करोड़ के पत्थर उद्योग पर शाशन की सेंसरशिप बनी बाधक
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