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संस्कृत में ही संस्कृति और संस्कार निहित
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चरखारी (महोबा)। राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद एवं उप्र. संस्कृत संस्थान लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के 100 टीचरों को जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान चरखारी में पांच दिन तक दिए गए प्रशिक्षण का समापन हो गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य देववाणी संस्कृत को अध्यापकों एवं छात्रों के माध्यम से प्रत्येक घर में पहुंचाकर देववाणी को उसका गौरव पुन: प्राप्त कराना है।
समापन अवसर पर मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह सेंगर ने अध्यापकों को संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरित किया विशिष्ठ अतिथि डॉ. उमाशंकर त्रिपाठी ने संपूर्ण जनपद को संस्कृतमय बनाने के लिए अध्यापकों को प्रेरित किया। डायट के प्राचार्य संतोष कुमार सक्सैना,ईश्वर चंद्र द्विवेदी, योगीराज, श्रीनारायाण मिश्र सहित तमाम वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। अमित कुमार पटैरिया ने उप्र. संस्थान से आए प्रशिक्षक प्रदीप सिंह और प्रशिक्षिका सुनीता मिश्रा, बबली गुप्ता, स्थिति गोस्वामी के प्रति आभार प्रकट किया। इस मौके पर कुलदीप सोनी, श्रीचंद्र यादव, राजिक अली, महेश कुमार, विवेक कुमार गुप्ता, बलवीर सिंह सहित तमाम टीचर उपस्थित रहे।
संस्कृत में ही संस्कृति और संस्कार निहित
समापन अवसर पर मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह सेंगर ने अध्यापकों को संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरित किया विशिष्ठ अतिथि डॉ. उमाशंकर त्रिपाठी ने संपूर्ण जनपद को संस्कृतमय बनाने के लिए अध्यापकों को प्रेरित किया। डायट के प्राचार्य संतोष कुमार सक्सैना,ईश्वर चंद्र द्विवेदी, योगीराज, श्रीनारायाण मिश्र सहित तमाम वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। अमित कुमार पटैरिया ने उप्र. संस्थान से आए प्रशिक्षक प्रदीप सिंह और प्रशिक्षिका सुनीता मिश्रा, बबली गुप्ता, स्थिति गोस्वामी के प्रति आभार प्रकट किया। इस मौके पर कुलदीप सोनी, श्रीचंद्र यादव, राजिक अली, महेश कुमार, विवेक कुमार गुप्ता, बलवीर सिंह सहित तमाम टीचर उपस्थित रहे।
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संस्कृत में ही संस्कृति और संस्कार निहित