{"_id":"5b956433867a557fe059836d","slug":"181536517171-mahoba-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारतीय संस्कृति पर्यावरण के रक्षा की प्रतीक-डा. अनुरागी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारतीय संस्कृति पर्यावरण के रक्षा की प्रतीक-डा. अनुरागी
Updated Sun, 09 Sep 2018 11:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
महोबा। संत कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में रविवार को कबीरी सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें भक्तों ने कबीरी भजन गाए।
कबीर आश्रम में कार्यक्रम में वीरभूमि महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. एलसी अनुरागी ने कहा कि भारतीय संस्कृति के पर्व-त्योहार पर्यावरण संरक्षण व पौधरोपण की सीख देते है। गणेश चतुर्थी पर्व पर्यावरण की रक्षा का प्रतीक है, क्योंकि गणेश की पूजा इक्कीस पत्तों से होती है। इन इक्कीस पत्तों में शमीपत्र, बेलपत्र, बेर का पत्ता, धतूरे का पत्ता, तुलसीदल, कनेर, तेजपात आदि को संरक्षित करना हमारा कर्तव्य है।
उन्होंने सभी से पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगाकर उनकी रक्षा करने की अपील की। सत्संग कार्यक्रम में ज्योति ने सारी दुनिया के पालनहार, हरो मेरे मन के विकार भजन सुनाया तो इंद्रजीत सिंह ने करम गति टारे न टरे भजन प्रस्तुत किया। बुंदेली कवि हरदयाल हरि अनुरागी ने बुंदेली भाषा में भजन जिंदगी जीने है स्वर सजावने, सबद कबीरा के गावने सुनाया।
कीर्तनकार सुशील द्विवेदी ने गोकुल का हर लालन लागे मुझको यशोदानंदन की तरह, है माटी वृंदावन की चंदन की तरह भजन सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। इस मौके पर रामअवतार सैन, हरिश्चंद्र वर्मा, पूनम सिंह, अच्छेलाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
-सत्संग कार्यक्रम में भक्तों ने गाए कबीरी भजन
विज्ञापन
महोबा। संत कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में रविवार को कबीरी सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें भक्तों ने कबीरी भजन गाए।
कबीर आश्रम में कार्यक्रम में वीरभूमि महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. एलसी अनुरागी ने कहा कि भारतीय संस्कृति के पर्व-त्योहार पर्यावरण संरक्षण व पौधरोपण की सीख देते है। गणेश चतुर्थी पर्व पर्यावरण की रक्षा का प्रतीक है, क्योंकि गणेश की पूजा इक्कीस पत्तों से होती है। इन इक्कीस पत्तों में शमीपत्र, बेलपत्र, बेर का पत्ता, धतूरे का पत्ता, तुलसीदल, कनेर, तेजपात आदि को संरक्षित करना हमारा कर्तव्य है।
उन्होंने सभी से पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगाकर उनकी रक्षा करने की अपील की। सत्संग कार्यक्रम में ज्योति ने सारी दुनिया के पालनहार, हरो मेरे मन के विकार भजन सुनाया तो इंद्रजीत सिंह ने करम गति टारे न टरे भजन प्रस्तुत किया। बुंदेली कवि हरदयाल हरि अनुरागी ने बुंदेली भाषा में भजन जिंदगी जीने है स्वर सजावने, सबद कबीरा के गावने सुनाया।
विज्ञापन
कीर्तनकार सुशील द्विवेदी ने गोकुल का हर लालन लागे मुझको यशोदानंदन की तरह, है माटी वृंदावन की चंदन की तरह भजन सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। इस मौके पर रामअवतार सैन, हरिश्चंद्र वर्मा, पूनम सिंह, अच्छेलाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
-सत्संग कार्यक्रम में भक्तों ने गाए कबीरी भजन