{"_id":"5c8558f1bdec2213ea537e94","slug":"121552242929-mahoba-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्व शांति के लिए सत्संग बेहद आवश्यक-पं. आशाराम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्व शांति के लिए सत्संग बेहद आवश्यक-पं. आशाराम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महोबा। सत्संग समिति के तत्वावधान में रविवार को कठकुलवापुरा स्थित संत कबीर आश्रम में कबीरी सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें पं. आशाराम तिवारी ने कहा कि विश्व शांति के लिए, समाज में नैतिक विचार के लिए और सुख शांति के लिए सत्संग बेहद आवश्यक है। सभी को कुछ न कुछ समय सत्संग में लगाना चाहिए।
वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय के प्रवक्ता डा. एलसी अनुरागी ने कहा कि निर्मल मन से गुरु का स्मरण करने से परमात्मा की प्राप्ति होती है। जीवन में दुख व तनाव का निवारण केवल भजन कीर्तन व सत्संग करने से होता है। वरिष्ठ कवि हरिश्चंद्र वर्मा व बुंदेली कवि हरदयाल हरि अनुरागी ने कहा कि सत्संग के पुण्य फल से धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति होती है। अज्ञानी ज्ञानी बन जाते है और कौवे हंस बन जाते है। सत्संग में कामता प्रसाद चौरसिया ने भजन पानी में मीन प्यासी सुनाया तो संगीताचार्य त्रिलोक ने राम नाम रस भीनी चदरिया भजन सुनाकर भक्तों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में गयाप्रसाद राठौर, विश्वजीत सिंह, बैजनाथ, राधेश्याम, गौरीशंकर, जगदीश रिछारिया सहित तमाम भक्त मौजूद रहे।
विश्व शांति के लिए सत्संग बेहद आवश्यक
विज्ञापन
वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय के प्रवक्ता डा. एलसी अनुरागी ने कहा कि निर्मल मन से गुरु का स्मरण करने से परमात्मा की प्राप्ति होती है। जीवन में दुख व तनाव का निवारण केवल भजन कीर्तन व सत्संग करने से होता है। वरिष्ठ कवि हरिश्चंद्र वर्मा व बुंदेली कवि हरदयाल हरि अनुरागी ने कहा कि सत्संग के पुण्य फल से धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति होती है। अज्ञानी ज्ञानी बन जाते है और कौवे हंस बन जाते है। सत्संग में कामता प्रसाद चौरसिया ने भजन पानी में मीन प्यासी सुनाया तो संगीताचार्य त्रिलोक ने राम नाम रस भीनी चदरिया भजन सुनाकर भक्तों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में गयाप्रसाद राठौर, विश्वजीत सिंह, बैजनाथ, राधेश्याम, गौरीशंकर, जगदीश रिछारिया सहित तमाम भक्त मौजूद रहे।
विज्ञापन
विश्व शांति के लिए सत्संग बेहद आवश्यक