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विश्वशांति के लिए 41 दिन तक खड़े रहकर तप कर रहे महंत
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कुलपहाड़ (महोबा)। नगर के प्रसिद्घ रामलला मंदिर में विश्वशांति के लिए महंत ने 41 दिन तक खड़े रहकर पूूजा अर्चना करने का प्रण लिया है। महंत ने इस मुहिम को परवान चढ़ाने के लिए अन्न का भी त्याग कर दिया है। महंत की इस पहल का लोगों को भरपूर समर्थन मिल रहा है।
मौजूदा समय में सीमा पर बेहद खराब माहौल और युद्ध की संभावना को देखते हुए रामलला मंदिर के महंत श्री दयालगिरि महाराज ने अन्न त्यागकर 41 दिन तक खड़े रहकर विश्वशांति स्थापित करने के लिए व्रत धारण किया है। वह व्रत दौरान खड़े होकर ही पूजा अर्चना कर रहे हैं। 41 दिन तक बिना अन्न ग्रहण किए पेड़ के सहारे खड़े होकर तप करने का महाराज का निर्णय को लोग कठिन तप मान रहे हैं और दिनरात मंदिर पहुंचकर महाराज की इस मुहिम का समर्थन कर रहे हैं।
घर परिवार गांव प्रदेशों में आपस में तनाव के बाद अब देश की सीमाओं पर बढ़ते तनाव और शांति लाने के लिए महंत ने व्रत लिया है कि वह 41 दिन बाद ही तप को समाप्त करेंगे। एक तरफ जहां महंत पेड़ के सहारे खड़े होकर तप कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ बढ़ी संख्या में लोग दिनरात मंदिर में डटे हैं और भजन कीर्तन व ओम: नम: शिवाय: का मंत्र जप रहे है। बारी-बारी से 24 घंटे तक महंत का साथ देने वाले श्याम सुंदर, संजीव, बाबू, मूलचंद्र, रामसिंह, राकेश, बाबूलाल, अखिलेश, रामसहोदर सहित तमाम लोग मंदिर प्रांगण में डटे रहते है।
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41 दिन तक खड़े रहकर तप कर रहे महंत
-महंत ने इस मुहिम को परवान चढ़ाने के लिए अन्न भी त्यागा
मौजूदा समय में सीमा पर बेहद खराब माहौल और युद्ध की संभावना को देखते हुए रामलला मंदिर के महंत श्री दयालगिरि महाराज ने अन्न त्यागकर 41 दिन तक खड़े रहकर विश्वशांति स्थापित करने के लिए व्रत धारण किया है। वह व्रत दौरान खड़े होकर ही पूजा अर्चना कर रहे हैं। 41 दिन तक बिना अन्न ग्रहण किए पेड़ के सहारे खड़े होकर तप करने का महाराज का निर्णय को लोग कठिन तप मान रहे हैं और दिनरात मंदिर पहुंचकर महाराज की इस मुहिम का समर्थन कर रहे हैं।
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घर परिवार गांव प्रदेशों में आपस में तनाव के बाद अब देश की सीमाओं पर बढ़ते तनाव और शांति लाने के लिए महंत ने व्रत लिया है कि वह 41 दिन बाद ही तप को समाप्त करेंगे। एक तरफ जहां महंत पेड़ के सहारे खड़े होकर तप कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ बढ़ी संख्या में लोग दिनरात मंदिर में डटे हैं और भजन कीर्तन व ओम: नम: शिवाय: का मंत्र जप रहे है। बारी-बारी से 24 घंटे तक महंत का साथ देने वाले श्याम सुंदर, संजीव, बाबू, मूलचंद्र, रामसिंह, राकेश, बाबूलाल, अखिलेश, रामसहोदर सहित तमाम लोग मंदिर प्रांगण में डटे रहते है।
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41 दिन तक खड़े रहकर तप कर रहे महंत
-महंत ने इस मुहिम को परवान चढ़ाने के लिए अन्न भी त्यागा