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Maharajganj News: युवा वैज्ञानिक को मिली थी धमकी, भाई ने लगाया हत्या का आरोप
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महाराजगंज के रहने वाले थे राहुल, नोवोटेल होटल में मिला था शव
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं, विसरा, हार्ट सुरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ/महराजगंज। विभूतिखंड स्थित होटल नोवोटेल में ठहरे युवा वैज्ञानिक और ड्रोन इनोवेटर राहुल सिंह की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। राहुल के भाई रोहित ने बस्ती निवासी चंद्रभूषण मिश्र पर हत्या का आरोप लगाया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। हार्ट और विसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
रोहित का आरोप है कि राहुल को लंबे समय से जान से मारने और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकियां मिल रही थीं। राहुल ने 12 जून को एडीजी गोरखपुर से इसकी शिकायत की थी। एडीजी ने मामले की जांच कर रिपोर्ट देने के लिए एसपी बस्ती को निर्देश भी दिए थे। रोहित ने विभूतिखंड थाने में तहरीर देकर हत्या की एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह ने बताया कि जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रोहित के अनुसार, 30 अगस्त 2025 को राहुल का परिचय वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से बस्ती के तिनपेड़िया निवासी चंद्रभूषण मिश्र से हुआ था। आरोप है कि चंद्रभूषण ने राहुल के ड्रोन प्रोजेक्ट में 85 लाख रुपये निवेश करने का आश्वासन दिया। इस दौरान राहुल को करीब 1.80 लाख रुपये का मोबाइल फोन दिया गया और उनके खाते में 61.99 लाख रुपये भी ट्रांसफर किए गए। 27 दिसंबर 2025 को प्रोजेक्ट के प्रस्तुतीकरण के लिए राहुल चंद्रभूषण के नोएडा स्थित एसएसजी फर्निशिंग साल्यूशंस कंपनी पहुंचे। आरोप है कि चंद्रभूषण ने दबाव बनाकर प्रोजेक्ट की जानकारी व्हाट्सएप पर मांगी। राहुल के इन्कार करने पर अभद्रता की गई। दबाव में उन्हें जानकारी साझा करनी पड़ी।
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शेष रकम देने से मना करने का आरोप
रोहित का आरोप है कि शेष भुगतान मांगने पर चंद्रभूषण ने रुपये देने से मना कर दिया और पहले दी गई रकम वापस मांगी। 24 फरवरी 2026 को चंद्रभूषण कुछ लोगों के साथ उनके घर पहुंचे और परिवार को धमकाया। इसके बाद राहुल को लगातार धमकियां मिलती रहीं।
राहुल के खिलाफ दर्ज कराई थी एफआईआर
चंद्रभूषण मिश्र ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि राहुल ने प्रोजेक्ट के लिए मदद मांगी थी। इसके तहत 62 लाख रुपये दिए गए थे। रकम वापस न मिलने पर उन्होंने 13 जून को बस्ती के नगर थाने में राहुल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा कि राहुल की मौत से उनका कोई संबंध नहीं है।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं, विसरा, हार्ट सुरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ/महराजगंज। विभूतिखंड स्थित होटल नोवोटेल में ठहरे युवा वैज्ञानिक और ड्रोन इनोवेटर राहुल सिंह की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। राहुल के भाई रोहित ने बस्ती निवासी चंद्रभूषण मिश्र पर हत्या का आरोप लगाया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। हार्ट और विसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
रोहित का आरोप है कि राहुल को लंबे समय से जान से मारने और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकियां मिल रही थीं। राहुल ने 12 जून को एडीजी गोरखपुर से इसकी शिकायत की थी। एडीजी ने मामले की जांच कर रिपोर्ट देने के लिए एसपी बस्ती को निर्देश भी दिए थे। रोहित ने विभूतिखंड थाने में तहरीर देकर हत्या की एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह ने बताया कि जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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रोहित के अनुसार, 30 अगस्त 2025 को राहुल का परिचय वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से बस्ती के तिनपेड़िया निवासी चंद्रभूषण मिश्र से हुआ था। आरोप है कि चंद्रभूषण ने राहुल के ड्रोन प्रोजेक्ट में 85 लाख रुपये निवेश करने का आश्वासन दिया। इस दौरान राहुल को करीब 1.80 लाख रुपये का मोबाइल फोन दिया गया और उनके खाते में 61.99 लाख रुपये भी ट्रांसफर किए गए। 27 दिसंबर 2025 को प्रोजेक्ट के प्रस्तुतीकरण के लिए राहुल चंद्रभूषण के नोएडा स्थित एसएसजी फर्निशिंग साल्यूशंस कंपनी पहुंचे। आरोप है कि चंद्रभूषण ने दबाव बनाकर प्रोजेक्ट की जानकारी व्हाट्सएप पर मांगी। राहुल के इन्कार करने पर अभद्रता की गई। दबाव में उन्हें जानकारी साझा करनी पड़ी।
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शेष रकम देने से मना करने का आरोप
रोहित का आरोप है कि शेष भुगतान मांगने पर चंद्रभूषण ने रुपये देने से मना कर दिया और पहले दी गई रकम वापस मांगी। 24 फरवरी 2026 को चंद्रभूषण कुछ लोगों के साथ उनके घर पहुंचे और परिवार को धमकाया। इसके बाद राहुल को लगातार धमकियां मिलती रहीं।
राहुल के खिलाफ दर्ज कराई थी एफआईआर
चंद्रभूषण मिश्र ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि राहुल ने प्रोजेक्ट के लिए मदद मांगी थी। इसके तहत 62 लाख रुपये दिए गए थे। रकम वापस न मिलने पर उन्होंने 13 जून को बस्ती के नगर थाने में राहुल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा कि राहुल की मौत से उनका कोई संबंध नहीं है।