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Maharajganj News: लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर के पहले चरण का काम पूरा
Tue, 12 Mar 2024 12:04 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 12 Mar 2024 12:04 PM IST
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निचलौल। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के मधवलिया वन रेंज में करीब 22 हजार स्क्वायर मीटर में लेपर्ड (तेंदुआ) रेस्क्यू सेंटर के पहले चरण का काम पूरा हो गया है। अब यहां पर जल्द ही पशु अस्पताल, पांच तेंदुओं के संरक्षण और संवर्धन की सुविधा शुरू हो जाएगी। साथ ही लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर में दूसरे चरण का काम भी शुरू करा दिया जाएगा।
मधवलिया वन क्षेत्राधिकारी अजीत कुमार ने कहा कि सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के जंगल पड़ोसी देश नेपाल के अंतरराष्ट्रीय चितवन नेशनल पार्क और बिहार के वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व के जंगलों से सटा है। यह प्रभाग वन संपदा व वन्यजीव दोनों ही रूप से काफी विकसित है। शासन की तरफ से प्रदेश में बढ़ते मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए पिछले वर्ष सोहगीबरवा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के मधवलिया वन रेंज में रेस्क्यू सेंटर खोलने का निर्णय लिया गया था। चार चरणों में निर्माण कार्य पूरा करना है। पहले चरण में शासन की तरफ से जारी 4.99 करोड़ रुपये की रकम खर्च कर पांच तेंदुए या टाइगर के संरक्षण के साथ ही अन्य स्थान का निर्माण कार्य पूरा करा लिया गया है। ऐसे में रेस्क्यू सेंटर बनकर तैयार हो गया है। फिलहाल दूसरे चरण में डॉक्टरों के रहने के आवास सहित अन्य भवनों का निर्माण कार्य कराया जाएगा। लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर का निर्माण कार्य देखदेख में कराया जा रहा है।
घायल तेदुओं को इलाज के लिए भेजना पड़ता था दूर
वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, सोहगीबरवा सेंचुरी क्षेत्र में तेंदुआ समेत अन्य वन्य जीवों की काफी उपलब्धता है। क्योंकि यह समृद्ध जंगल के रूप में जाना जाता है। फिलहाल जरूरत व्यवस्थाओं के अभाव में आए दिन यहां मानव व वन्य जीव में संघर्ष होना आम बात है। ऐसे में कई बार जंगलों से बाहर निकलने वाले तेंदुए भी घायल हो जाते हैं। उनकी समुचित देखभाल स्थानीय स्तर पर नहीं हो पाती थी। ऐसे में कभी-कभार घायल हुए तेंदुए को इलाज के लिए दूर भेजना पड़ता है।
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मधवलिया वन क्षेत्राधिकारी अजीत कुमार ने कहा कि सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के जंगल पड़ोसी देश नेपाल के अंतरराष्ट्रीय चितवन नेशनल पार्क और बिहार के वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व के जंगलों से सटा है। यह प्रभाग वन संपदा व वन्यजीव दोनों ही रूप से काफी विकसित है। शासन की तरफ से प्रदेश में बढ़ते मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए पिछले वर्ष सोहगीबरवा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के मधवलिया वन रेंज में रेस्क्यू सेंटर खोलने का निर्णय लिया गया था। चार चरणों में निर्माण कार्य पूरा करना है। पहले चरण में शासन की तरफ से जारी 4.99 करोड़ रुपये की रकम खर्च कर पांच तेंदुए या टाइगर के संरक्षण के साथ ही अन्य स्थान का निर्माण कार्य पूरा करा लिया गया है। ऐसे में रेस्क्यू सेंटर बनकर तैयार हो गया है। फिलहाल दूसरे चरण में डॉक्टरों के रहने के आवास सहित अन्य भवनों का निर्माण कार्य कराया जाएगा। लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर का निर्माण कार्य देखदेख में कराया जा रहा है।
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घायल तेदुओं को इलाज के लिए भेजना पड़ता था दूर
वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, सोहगीबरवा सेंचुरी क्षेत्र में तेंदुआ समेत अन्य वन्य जीवों की काफी उपलब्धता है। क्योंकि यह समृद्ध जंगल के रूप में जाना जाता है। फिलहाल जरूरत व्यवस्थाओं के अभाव में आए दिन यहां मानव व वन्य जीव में संघर्ष होना आम बात है। ऐसे में कई बार जंगलों से बाहर निकलने वाले तेंदुए भी घायल हो जाते हैं। उनकी समुचित देखभाल स्थानीय स्तर पर नहीं हो पाती थी। ऐसे में कभी-कभार घायल हुए तेंदुए को इलाज के लिए दूर भेजना पड़ता है।
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