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पंचायत भवनों पर लटक रहा ताला, घर बैठे मानदेय ले रहें सहायक

Wed, 12 Oct 2022 11:51 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 12 Oct 2022 11:51 PM IST
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work not completed from panchyat bhawan
11 बजकर 51 मिनट पर अमड़ी पंचायत भवन पर लटक रहा ताला।संवाद - फोटो : MAHARAJGANJ
पंचायत भवनों पर लटक रहा ताला, घर बैठे मानदेय ले रहें सहायक
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प्राथमिक सुविधाओं के लिए ब्लॉक का चक्कर काट रहें ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
निचलौल। ब्लॉक क्षेत्र में पंचायत भवनों की स्थिति ठीक नहीं है। क्योंकि जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते अधिकतर पंचायत भवन बंद रहते हैं। सहायक पंचायत इसमें बैठते नहीं हैं। जिसके चलते ग्रामीणों का प्राथमिक स्तर की अधिकांश समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उन्हें कोसों दूरी तय कर ब्लॉक के चक्कर लगाना मजबूरी बन गया है।
ब्लॉक के मुसहर बस्ती बहुआर खुर्द निवासी बाबूलाल और लीलावती देवी का कहना है कि पंचायत भवन पर हमेशा ताला लटका रहता है। पंचायत भवन पर न तो विकास कार्यों को लेकर कभी बैठक की जाती है, न ही ग्रामीणों को प्राथमिक स्तर की सुविधाएं मिल पाती है। ऐसे में ग्रामीणों को 11 किलोमीटर की दूरी तय कर ब्लॉक कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है।
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अमड़ी निवासी मोतीचंद और सुशीला देवी ने कहा कि पंचायत भवन पर पंचायत सहायक के रूप में तैनात कर्मी भी वहां नहीं बैठते हैं। वह घर बैठे छह हजार रुपये मानदेय ले रहे हैं। पंचायत भवन में कर्मचारियों के न आने से हमेशा ताला लटका रहता है। ऐसे में ग्रामीणों को परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र सहित अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। जिसके चलते ग्रामीणों को आठ किलोमीटर दूरी तय कर ब्लॉक का चक्कर काटना पड़ता है। जबकि जिम्मेदार घर बैठ मानदेय ले रहे है।
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भारत नेपाल बॉर्डर से सटे स्थित झुलनीपुर निवासी दिनेश यादव और किशोर पाल ने कहा कि पंचायत भवन पर प्राथमिक सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में उन लोगों को 12 किलोमीटर की दूरी तय कर ब्लॉक कार्यालय का चक्कर काटना मजबूरी है। वहीं पंचायत भवन पर मौजूद सहायक पंचायत हृदेश कुमार ने कहा कि बॉर्डर से सटे होने के कारण नेटवर्क नही चलता है। ऐसे में ग्रामीणों को सुविधाएं मुहैया नहीं हो पाती है।
करमहिया निवासी जितेंद्र श्रीवास्तव और अमरजीत ने कहा कि गांव में पंचायत भवन जर्जर हो चुका था। जिसकी छत गिर चुकी है। यहां पंचायत भवन का संचालन नहीं हो रहा है। गांव के लोग इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। जबकि सहायक पंचायत की तैनाती कर मानदेय दिया जा रहा है।

ग्राम सचिवालय का संचालन प्राथमिकता से कराया जा रहा है। गांव के सचिव को भी सचिवालय पर बैठना है। जल्द ही स्वयं और टीम गठित कर निरीक्षण किया जाएगा। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
चंद्रशेखर कुशवाहा, बीडीओ
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