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Maharajganj News: खेल-खेल में बेहतर किया वैज्ञानिक दृष्टिकोण
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खेल खेल में ग्रहों के बारे में सीखते बच्चे।
महराजगंज। 2011 में बतौर सहायक शिक्षक के रूप में बारी गांव पूर्व माध्यमिक स्कूल में आए राजेश कुमार उपाध्याय ने यहां के बच्चों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लैस कर दिया। नतीजा यह हुआ कि 2025 में इस स्कूल से पास आउट शिवम मद्धेशिया ने अब केंद्रीय स्कूल में पढ़ते हैं। उन्होंने फायर सेफ्टी लाइब्रेरी का मॉडल तैयार कर पूरे जिले का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। घुघली ब्लॉक के बारी गांव पूमावि में बतौर सहायक शिक्षक 16 वर्ष पहले तैनात हुए कप्तानगंज, कुशीनगर के मूल निवासी राजेश कुमार उपाध्याय को 2025 के शिक्षक राज्य पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह पुरस्कार स्कूल में किए गए उनके नवाचार के परिप्रेक्ष्य में दिया जाएगा। उन्होंने स्कूल के बच्चों में क्या बदलाव किया है इसकी गवाही उक्त स्कूल से पढ़कर निकले बच्चे दे रहे हैं।
केंद्रीय स्कूल महराजगंज में पढ़ने वाले शिवम मद्धेशिया 2025 तक बारी गांव पूमावि के छात्र थे। उन्होंने बताया कि राजेश सर स्कूल में पढ़ने वाले हर बच्चे की दोस्ती विज्ञान से कराने के लिए उत्सुक रहते थे। उनके मार्गदर्शन में मैंने विज्ञान को बेहतर तरीके से समझा और मॉडल निर्माण के प्रति प्रेरित हुआ। आज मैंने जो फायर सेफ्टी लाइब्रेरी का मॉडल पिछले दिनों अपने स्कूल की प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया उसे विकसित करने की प्रेरणा मुझे राजेश सर से ही मिली।
विज्ञान के प्रति ऐसे विद्यार्थियों की फेहरिस्त लंबी है जिनकी विज्ञान अभिरुचि राजेश उपाध्याय की देन है। राजेश उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने कभी शिक्षक बनकर बच्चों को नहीं पढ़ाया सदैव दोस्त की तरह ही बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का कार्य किया। बच्चों को यह भाया और वह मेरी सीख को तवज्जो देकर आगे बढ़ गए। मेरे लिए सबसे बड़ा पारितोषिक यही है कि मेरे पढ़ाए बच्चे आज विभिन्न स्कूल कालेजों में अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित कर रहे हैं। चाहे वह विज्ञान हो अथवा खेलकूद बच्चे हर क्षेत्र में नाम रोशन कर रहे हैं।
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केंद्रीय स्कूल महराजगंज में पढ़ने वाले शिवम मद्धेशिया 2025 तक बारी गांव पूमावि के छात्र थे। उन्होंने बताया कि राजेश सर स्कूल में पढ़ने वाले हर बच्चे की दोस्ती विज्ञान से कराने के लिए उत्सुक रहते थे। उनके मार्गदर्शन में मैंने विज्ञान को बेहतर तरीके से समझा और मॉडल निर्माण के प्रति प्रेरित हुआ। आज मैंने जो फायर सेफ्टी लाइब्रेरी का मॉडल पिछले दिनों अपने स्कूल की प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया उसे विकसित करने की प्रेरणा मुझे राजेश सर से ही मिली।
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विज्ञान के प्रति ऐसे विद्यार्थियों की फेहरिस्त लंबी है जिनकी विज्ञान अभिरुचि राजेश उपाध्याय की देन है। राजेश उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने कभी शिक्षक बनकर बच्चों को नहीं पढ़ाया सदैव दोस्त की तरह ही बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का कार्य किया। बच्चों को यह भाया और वह मेरी सीख को तवज्जो देकर आगे बढ़ गए। मेरे लिए सबसे बड़ा पारितोषिक यही है कि मेरे पढ़ाए बच्चे आज विभिन्न स्कूल कालेजों में अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित कर रहे हैं। चाहे वह विज्ञान हो अथवा खेलकूद बच्चे हर क्षेत्र में नाम रोशन कर रहे हैं।
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