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Maharajganj News: भारतीय लेडीज कपड़ों की मांग नेपाल में बढ़ी तो तस्कर उठाने लगे लाभ

Thu, 22 Aug 2024 03:35 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 22 Aug 2024 03:35 AM IST
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When demand for Indian ladies clothes increased in Nepal, smugglers started making profits.
सीमावर्ती क्षेत्र में बाइक से हो रहा कपड़ा तस्करी।स्त्रोत सोशल मीडिया
-तस्कर कपड़ों की खेप सरहद पार कर कमा रहे मोटी रकम
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-पगडंडियों के रास्ते साइकिल की मदद से नेपाल पहुंचाया जा रहा कपड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी

महराजगंज। इन दिनों भारतीय क्षेत्र से कपड़ों की खेप धड़ल्ले से नेपाल में पहुंच रही है। इसमें महिलाओं के कपड़े अधिकतर नेपाल जा रहे हैं। तस्कर दिल्ली, कानपुर, सूरत से कपड़ों की खेप मंगाकर सीमावर्ती क्षेत्रों में डंप कर देते हैं। फिर मौका मिलते ही तस्कर कपड़े की खेप को नेपाल पहुंचा देते हैं।
20 अगस्त को भारत-नेपाल सरहद के पिलर संख्या 526/18 के पास से सुरक्षा एजेंसियों की टीम बोरों में भरी 125 पीस लेडीज सूट तो 85 पीस शर्ट बरामद की थी। पूछताछ में पता चला कि कपड़े की खेप को भारतीय क्षेत्र से नेपाल में पहुंचाया जा रहा था। सूत्रों से मिली जानकारी नेपाल राष्ट्र कपड़ों के लिए काफी हद तक भारत पर ही आश्रित है। नेपाल में कपड़ों पर कस्टम ड्यूटी अधिक है। इस वजह से भारत की तुलना में नेपाल में कपड़े महंगे मिलते हैं। सरहद पर कड़ाई के बाद नेपाल में कपड़ों के तस्करी तेजी से हो रही है।
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माना जा रहा है, की जिले के नौतनवां, कोल्हुई, सोनौली, बरगदवा, परसा मलिक, ठूठीबारी और निचलौल थाना क्षेत्र के सीमावर्ती गांव से कपड़े की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है। सूत्रों की माने तो तस्कर कपड़े की तस्करी के लिए पगडंडियों के रास्ते ऑटो और साइकिल का सहारा ले रहे हैं। तस्कर भारतीय बाजारों से कम कीमतों पर कपड़ों को खरीदकर नेपाल पहुंचा कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। सूत्र बता रहे हैं, कि एसएसबी व कस्टम की गिरफ्त में सिर्फ कैरियर ही आ रहे हैं, जो हजार, पांच सौ रुपये के लिए काम करते हैं। जबकि इससे जुड़े बड़े धंधेबाज बेखौफ होकर मुनाफा कमाने में जुटे हुए हैं।
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अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में कड़ी निगरानी की जा रही है। समय समय कार्रवाई की जाती है।
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साइकिल और ऑटो के जरिए नेपाल में पहुंच रहा है कपड़ा
भारत नेपाल की खुली सरहद हमेशा से काला कारोबार करने वालों के लिए मुफीद रही है। सूत्रों के अनुसार, जिले की 84 किमी खुली सीमा का लाभ उठा कर तस्कर आसानी से अवैध सामानों की खेप पार कर लेते हैं। भारतीय कपड़ा पगडंडी रास्तों से नेपाल में साइकिल और ऑटो के जरिए पहुंचाया जा रहा है।

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मुख्य नाकों पर कड़ाई के बाद पगडंडियों से बढ़ी तस्करी
भारत नेपाल के मुख्य नाका सोनौली, ठूठीबारी पर कड़ाई के बाद तस्करों ने पगडंडियों का रास्ता पकड़ लिया है। सूत्रों की माने तो नौतनवा स्थित ट्रांसपोर्ट में सूरत, गुजरात, दिल्ली, कोलकाता से पकड़े मंगवा कर डंप किए जाते हैं। फिर छोटे वाहनों से कपड़ों की बंडल को सीमाओं के निकट गांव में रख दिया जाता है। यहां से कैरियर मौका मिलते ही साइकिल और ऑटो से कपड़ों को नेपाल के सीमावर्ती गांव में पहुंचा देते हैं।


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कपड़ा तस्करी के लिए बच्चें और महिलाओं का सहारा
सूत्रों के मुताबिक सीमावर्ती क्षेत्र में लगभग एक दर्जन से अधिक ऐसे रास्ते हैं। जहां से कपड़ों की तस्करी धड़ल्ले से होती है। इन जगहों से कई बार सुरक्षा एजेंसियों की टीम सामानों को भी जब्त करती है। सामान्य तौर से सरहद पर तस्करी के लिए महिलाओं और बच्चों का मदद लिया जाता है। इन कॅरियरों की मदद से अवैध सामानों की खेप को गंतव्य तक पहुंचा दिया जाता हैं।
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