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Maharajganj News: यह कैसी आस्था... नौ दिन पूजा, विसर्जन में बेकद्री

Tue, 15 Oct 2024 02:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Tue, 15 Oct 2024 02:38 AM IST
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What kind of faith is this... worship for nine days, indifference in immersion
हरिहरपुर नहर फाटक के पास विसर्जित प्रतिमा से अवशेष को निकालते बच्चे।
महराजगंज। नौ दिनों तक लोग मां दुर्गा की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन विसर्जन के दौरान प्रतिमाओं की बेकद्री देख मन विचलित हो जाता है। प्रतिमा विसर्जन होते ही आभूषण और पोशाक लेने के लिए छीनाझपटी शुरू हो जाती है। सोमवार को त्रिमुहानी घाट, हरिहरपुर नहर फाटक, बैकुंठी घाट पर लोगों में बची हुई सामग्री घर ले जाने की होड़ लगी रही। फरेंदा रोड से आगे बढ़ने पर त्रिमुहानी पुल मिला। यहां से नीचे का नजारा ऐसा दिखा की हर कोई यही कहता कि यह कैसी आस्था है। मूर्ति विसर्जन के बाद झांकने तक नहीं आया। प्रतिमा में लगे कपड़े रुपये, सोने के जेवर आदि को ढूंढने में लोग लगे रहे। मूर्तियों में लगे बांस तक को नहीं छोड़ा गया। उसे भी पानी से बाहर निकालकर लोग ले जाते दिखे। त्रिमुहान घाट के किनारे पूजन सामग्री के अवशेष पैरों तले रौंदे जा रहे थे।
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घाट के किनारे मिले कल्लू ने बताया कि बांस झोपड़ी के काम लिया जाएगा। पानी में ढूंढ़ने पर 100 रुपये का नोट मिला है। इसी तरह से आसपास अन्य युवक दिखे। ये सभी विसर्जित हुईं प्रतिमा की सामग्री को इधर-उधर ढूंढ़ रहे थे। घाट से यह नजारा देखकर वापस आने के बाद पुल पर शिक्षक जितेंद्र मिले। बातचीत में उन्होंने बताया कि आज कल दिखावा अधिक हो रहा है। नौ दिन तक विधि विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद इस तरह से विसर्जन किया जाना ठीक नहीं है। सभी सामग्री को कायदे से विसर्जित कर देनी चाहिए, इससे कम से कम यह तो रहेगा की अवशेष पैरों तले नहीं आएंगे। घुघली क्षेत्र के बैकुंठी घाट पर नदी में प्रतिमा विसर्जित होते ही उसमें लगी सामग्री लेने के लिए छिनाझपटी होने लगी। नदी में उतरे तमाम युवा सोने के आभूषण ढूंढ़ने लगे। करीब घंटे भर यह सब होता रहा। नदी में प्रतिमा के अवशेष बेतरतीब ढंग से बहते हुए दिखा। घाट मिले ज्ञानेंद्र वर्मा ने बताया कि ऐसा हर साल होता है।
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विसर्जन के दौरान लोग विधि-विधान भूल जाते हैं। इसी तरह से हरिहरपुर नहर फाटक पर नीचे बच्चे प्रतिमा के अवशेष को नोचते हुए दिखे।
बच्चे काफी देर तक कड़ी मशक्कत करते रहे। बाहर निकलते हुए एक बच्चे ने बताया कि दो-दो रुपये के पांच सिक्के मिले हैं। वह खुश होकर आगे चला गया। नहर के किनारे अवशेष पड़े हुए थे। चुनरी से लेकर अन्य पूजन सामाग्री के अवशेष दिखे। जिले में ज्यादातर विसर्जन स्थल पर यही हाल देखने को मिला।
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