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सैलानियों के स्वागत को तैयार हो रहा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व
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फोटो:-
सैलानियों के स्वागत को तैयार हो रहा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व
नेचर गाइडों को विशेष रूप से प्रशिक्षित कराने की तैयारी चल रही
संवाद न्यूज एजेंसी
सोहगीबरवा। सोहवीबरवा वन्य जीव प्रभाग के सीमावर्ती वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन सत्र 16 अक्तूबर से शुरू हो रहा है। यहां सैलानियों को वन्य जीवों को देखने के साथ ही जैव विविधता से परिचित कराने के लिए भी नेचर गाइडों को विशेष रूप से प्रशिक्षित कराने की तैयारी चल रही है। इस बार वीटीआर नए कलेवर में नजर आएगा। पर्यटक आवास से लेकर हाथी कैंप तक महावतों के आवास आदि को भी सजाया संवारा जा रहा है। वीटीआर में नया पर्यटन सत्र शुरू होने में एक माह से भी कम समय बचा है।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व प्रमंडल दो के डीएफओ गौरव ओझा ने बताया कि वीटीआर के पर्यटक आवासों में आधुनिक सुविधाएं हैं। प्रयास यह किया जा रहा है कि जो सुविधाएं हैं उन्हें और बेहतर बनाने के साथ अच्छे ढंग से पेश किया जाए जिससे सैलानियों को वह रिझा सकें। जो एक बार आए वह बार-बार आने की लालसा रखे। पर्यटन परिसर में लगे साइन बोर्ड, गेट, मचान, ट्री हट, कैंटीन, हाथी कैंप, हाथी कैंटीन, महावतों के आवासों को ही नही सैलानियों को भ्रमण कराने वाले वाहनों एवं रास्तों को सजा संवार कर आकर्षक बनाया जा रहा है। 16 अक्तूबर से पर्यटकों के जंगल सफारी के लिए वीटीआर के कपाट खोल दिये जाएंगे। करीब 900 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का इलाका वैसे तो टाइगर प्रोजेक्ट के रूप में जाना जाता है। हालांकि, सैलानी गेस्ट हाउस की बुकिंग पहले करा सकते हैं। यहां वन विभाग ने सैलानियों के लिए विशेष प्रबंध कर रखे हैं। सुबह शाम बोटिंग के लिए नाव भी उपलब्ध है। वन विभाग ने सैलानियों के लिए यहां डारमेट्री, टाइगर कैंप सेंटर भी बना रखा है।
वीटीआर में मौजूद वन्य जीव
बाघ, चीतल, तेंदुआ, भालू, सांभर, हांग डियर, लकडबग्घा, साहिल, सियार, लोमड़ी, नीलगाय, गैंडा लंगूर, घड़ियाल, डॉल्फिन, मगरमच्छ, पालतू हाथी, बारहसिंगा, जंगली सुअर आदि मौजूद हैं।
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फोटो
सोहगीबरवां के पक्षियों पर अध्ययन करेंगे बर्डमैन आजाद
बर्डमैन आफ अयोध्या के नाम से मशहूर आजाद सप्ताह भर तक सोहगीबरवां के विभिन्न रेंजों में देखेंगे पक्षियों की स्थिति
संतोष शर्मा
महराजगंज। बर्डमैन आफ अयोध्या के नाम से मशहूर आजाद सिंह सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग के विभिन्न वन क्षेत्रों में पहुंचकर पक्षियों पर अध्ययन करेंगे। वे पक्षियों की प्रजातियों के साथ-साथ उनके संरक्षण की उपलब्ध व्यवस्था पर नजर रखेंगे। संभावना है कि उनके अध्ययन के बाद वन विभाग द्वारा बर्ड आफ सोहगीबरवां के नाम से एक डाक्यूमेंट्री भी बनेगी।
सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग वन संपदा व वन्यजीवों से परिपूर्ण हैं। यहां पर उपलब्ध संसाधनों की ख्याति दूर तक फैलाने व इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से वन विभाग ने यहां के विशेषताओं को एकत्र करने के लिए अयोध्या के बर्डमैन के रूप में पहचाने जाने वाले आजाद सिंह से संपर्क साधा है। आजाद सिंह जिले में आ चुके हैं तथा एक सप्ताह वह यहां रहकर सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग के सभी आठ वन क्षेत्र में भ्रमण करेंगे तथा वहां पर आने वाले पक्षियों पर अध्ययन करेंगे। अध्ययन के उपरांत वह अपनी रिपोर्ट तैयार करते हुए इस बात का उल्लेख करेंगे कि वहां किस प्रजाति के पक्षी हैं तथा उनके संरक्षण व संवर्धन के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। विभाग की मंशा है कि उनके अध्ययन के बाद बर्ड आफ सोहगीबरवां के नाम से एक डाक्यूमेंट्री बनाई जाए। सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी पुष्प कुमार कांधला ने बताया कि प्राकृतिक व वन्यजीवों की मौजूदगी वाले इस प्रभाग को पर्यटन की दृष्टि से पहचान दिलाने की दिशा में यह पहल की जा रही है। अयोध्या निवासी आजाद सिंह ने कहा कि पक्षियों के विकास में सभी की सहभागिता जरूरी है। प्रभाग के विभिन्न वन क्षेत्र का अध्ययन करने के लिए वे आए हुए हैं तथा सप्ताह भर ठहर कर अध्ययन कर पक्षियों के बारे में जानकारी एकत्र करेंगे।
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सैलानियों के स्वागत को तैयार हो रहा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व
नेचर गाइडों को विशेष रूप से प्रशिक्षित कराने की तैयारी चल रही
संवाद न्यूज एजेंसी
सोहगीबरवा। सोहवीबरवा वन्य जीव प्रभाग के सीमावर्ती वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन सत्र 16 अक्तूबर से शुरू हो रहा है। यहां सैलानियों को वन्य जीवों को देखने के साथ ही जैव विविधता से परिचित कराने के लिए भी नेचर गाइडों को विशेष रूप से प्रशिक्षित कराने की तैयारी चल रही है। इस बार वीटीआर नए कलेवर में नजर आएगा। पर्यटक आवास से लेकर हाथी कैंप तक महावतों के आवास आदि को भी सजाया संवारा जा रहा है। वीटीआर में नया पर्यटन सत्र शुरू होने में एक माह से भी कम समय बचा है।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व प्रमंडल दो के डीएफओ गौरव ओझा ने बताया कि वीटीआर के पर्यटक आवासों में आधुनिक सुविधाएं हैं। प्रयास यह किया जा रहा है कि जो सुविधाएं हैं उन्हें और बेहतर बनाने के साथ अच्छे ढंग से पेश किया जाए जिससे सैलानियों को वह रिझा सकें। जो एक बार आए वह बार-बार आने की लालसा रखे। पर्यटन परिसर में लगे साइन बोर्ड, गेट, मचान, ट्री हट, कैंटीन, हाथी कैंप, हाथी कैंटीन, महावतों के आवासों को ही नही सैलानियों को भ्रमण कराने वाले वाहनों एवं रास्तों को सजा संवार कर आकर्षक बनाया जा रहा है। 16 अक्तूबर से पर्यटकों के जंगल सफारी के लिए वीटीआर के कपाट खोल दिये जाएंगे। करीब 900 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का इलाका वैसे तो टाइगर प्रोजेक्ट के रूप में जाना जाता है। हालांकि, सैलानी गेस्ट हाउस की बुकिंग पहले करा सकते हैं। यहां वन विभाग ने सैलानियों के लिए विशेष प्रबंध कर रखे हैं। सुबह शाम बोटिंग के लिए नाव भी उपलब्ध है। वन विभाग ने सैलानियों के लिए यहां डारमेट्री, टाइगर कैंप सेंटर भी बना रखा है।
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वीटीआर में मौजूद वन्य जीव
बाघ, चीतल, तेंदुआ, भालू, सांभर, हांग डियर, लकडबग्घा, साहिल, सियार, लोमड़ी, नीलगाय, गैंडा लंगूर, घड़ियाल, डॉल्फिन, मगरमच्छ, पालतू हाथी, बारहसिंगा, जंगली सुअर आदि मौजूद हैं।
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सोहगीबरवां के पक्षियों पर अध्ययन करेंगे बर्डमैन आजाद
बर्डमैन आफ अयोध्या के नाम से मशहूर आजाद सप्ताह भर तक सोहगीबरवां के विभिन्न रेंजों में देखेंगे पक्षियों की स्थिति
संतोष शर्मा
महराजगंज। बर्डमैन आफ अयोध्या के नाम से मशहूर आजाद सिंह सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग के विभिन्न वन क्षेत्रों में पहुंचकर पक्षियों पर अध्ययन करेंगे। वे पक्षियों की प्रजातियों के साथ-साथ उनके संरक्षण की उपलब्ध व्यवस्था पर नजर रखेंगे। संभावना है कि उनके अध्ययन के बाद वन विभाग द्वारा बर्ड आफ सोहगीबरवां के नाम से एक डाक्यूमेंट्री भी बनेगी।
सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग वन संपदा व वन्यजीवों से परिपूर्ण हैं। यहां पर उपलब्ध संसाधनों की ख्याति दूर तक फैलाने व इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से वन विभाग ने यहां के विशेषताओं को एकत्र करने के लिए अयोध्या के बर्डमैन के रूप में पहचाने जाने वाले आजाद सिंह से संपर्क साधा है। आजाद सिंह जिले में आ चुके हैं तथा एक सप्ताह वह यहां रहकर सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग के सभी आठ वन क्षेत्र में भ्रमण करेंगे तथा वहां पर आने वाले पक्षियों पर अध्ययन करेंगे। अध्ययन के उपरांत वह अपनी रिपोर्ट तैयार करते हुए इस बात का उल्लेख करेंगे कि वहां किस प्रजाति के पक्षी हैं तथा उनके संरक्षण व संवर्धन के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। विभाग की मंशा है कि उनके अध्ययन के बाद बर्ड आफ सोहगीबरवां के नाम से एक डाक्यूमेंट्री बनाई जाए। सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी पुष्प कुमार कांधला ने बताया कि प्राकृतिक व वन्यजीवों की मौजूदगी वाले इस प्रभाग को पर्यटन की दृष्टि से पहचान दिलाने की दिशा में यह पहल की जा रही है। अयोध्या निवासी आजाद सिंह ने कहा कि पक्षियों के विकास में सभी की सहभागिता जरूरी है। प्रभाग के विभिन्न वन क्षेत्र का अध्ययन करने के लिए वे आए हुए हैं तथा सप्ताह भर ठहर कर अध्ययन कर पक्षियों के बारे में जानकारी एकत्र करेंगे।