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Maharajganj News: कालरात्रि का दर्शन-पूजन, लौंग फूल अर्पित कर मांगी समृद्धि
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महराजगंज। शारदीय नवरात्र की दुर्गाष्टमी और महानवमी की पावन तिथि के निकट आने से देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है। सोमवार को पूरे दिन श्रद्धालुओं ने कालरात्रि स्वरूप में माता का दर्शन- पूजन कर लौंग फूल के साथ अन्य सामग्री मां को समर्पित कर परिवार की समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।
भीड़ की बात करें तो सुबह की आरती के बाद शाम तक कोई ऐसा समय नहीं रहा जब बिना कतार के श्रद्धालु मां का दर्शन करते दिखे हों। ब्रह्म मुहूर्त से लेकर देर शाम तक देवी के जयघोष श्रद्धालुओं की आस्था बताने के प्रतीक बने।
शारदीय नवरात्र में दुर्गाष्टमी व महानवमी की विशेष मान्यता है। दुर्गाष्टमी को जहां चंडमुंड तो महानवमी पर महिषासुर के अंत की तिथि मानी जाती है। सोमवार को देवी मंदिरों में पूरे दिन रक्तबीज का वध करने वाली देवी कालरात्रि स्वरूप के रूप में पूजी गईं। आद्रवन में भीड़ की अधिकता के कारण सिर्फ प्रवेश व निकास द्वार पर ही नहीं, बल्कि मंदिर परिसर के भीतर भी सुरक्षा की दृष्टि से महिला जवानों की तैनाती देखी गई। यहां सुबह आठ बजे से शाम तक लगभग 100 मीटर लंबी कतार कम नहीं हुई। बनैलिया माता, कुड़ियां मंदिर में भी भीड़ की अधिकता देखी गई। इन मंदिरों में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने सामूहिक रूप से छाक (पूजन का विशेष जल) अर्पित कर देवी को प्रसन्न करने के जतन किए। मुख्यालय स्थित दुर्गा मंदिर में माता के दर्शन पूजन का दौर देर शाम तक चलता रहा।
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भीड़ की बात करें तो सुबह की आरती के बाद शाम तक कोई ऐसा समय नहीं रहा जब बिना कतार के श्रद्धालु मां का दर्शन करते दिखे हों। ब्रह्म मुहूर्त से लेकर देर शाम तक देवी के जयघोष श्रद्धालुओं की आस्था बताने के प्रतीक बने।
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शारदीय नवरात्र में दुर्गाष्टमी व महानवमी की विशेष मान्यता है। दुर्गाष्टमी को जहां चंडमुंड तो महानवमी पर महिषासुर के अंत की तिथि मानी जाती है। सोमवार को देवी मंदिरों में पूरे दिन रक्तबीज का वध करने वाली देवी कालरात्रि स्वरूप के रूप में पूजी गईं। आद्रवन में भीड़ की अधिकता के कारण सिर्फ प्रवेश व निकास द्वार पर ही नहीं, बल्कि मंदिर परिसर के भीतर भी सुरक्षा की दृष्टि से महिला जवानों की तैनाती देखी गई। यहां सुबह आठ बजे से शाम तक लगभग 100 मीटर लंबी कतार कम नहीं हुई। बनैलिया माता, कुड़ियां मंदिर में भी भीड़ की अधिकता देखी गई। इन मंदिरों में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने सामूहिक रूप से छाक (पूजन का विशेष जल) अर्पित कर देवी को प्रसन्न करने के जतन किए। मुख्यालय स्थित दुर्गा मंदिर में माता के दर्शन पूजन का दौर देर शाम तक चलता रहा।
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