फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Unlicensed medical stores... running clinics there too

Maharajganj News: बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर... उसमें भी चला रहे क्लीनिक

Sun, 02 Nov 2025 01:56 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 02 Nov 2025 01:56 AM IST
विज्ञापन
Unlicensed medical stores... running clinics there too
मेडिकल स्टोर।
महराजगंज। जिले में मेडिकल स्टोर की आड़ में अवैध रूप से क्लीनिक का धंधा फल-फूल रहा है। इसमें ज्यादातर बिना लाइसेंसी मेडिकल स्टोर शामिल हैं। इन मेडिकल स्टोरों पर दवा देने के साथ ही मरीजों को बाकायदा ड्रिप तक चढ़ाया जाता है। स्थिति बिगड़ने पर कथित डॉक्टर पल्ला झाड़कर किनारे हो जाते हैं। बीते दिनों स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई में ऐसे क्लीनिक का खुलासा हुआ था।
विज्ञापन

सूत्रों की मानें तो जिले के विभिन्न कस्बों, चौराहों और ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर की आड़ में क्लिनिक सेंटर तेजी से फैलते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का नियंत्रण नहीं होने से इनके हौसले बुलंद हैं। पनियरा क्षेत्र के गांगी बाजार में एक मेडिकल स्टोर पर बकायदा क्लीनिक संचालित है। यहां किसी भी बीमारी के मरीजों को भर्ती कर दिया जाता है।
विज्ञापन

इसी तरह मुजुरी सतगुर बाजार के सोनार गली में मेडिकल स्टोर की आड़ में एक क्लीनिक है जहां भोले-भाले मरीजों को हर बीमारी का इलाज करने का भरोसा दिलाकर भर्ती किया जाता है। खुटहा बाजार में मेडिकल स्टोर का लाइसेंस तो है लेकिन अंदर क्लीनिक है जहां भर्ती करने और ड्रिप की सुविधा भी दी जाती है। परतावल चौराहा, सिसवा, नौतनवा, लक्ष्मीपुर, बनकटी, धानी बाजार, फरेंदा, पनियरा, श्यामदेरवा, जखिरा, घुघुली, मिठौरा, चौक, सिंदुरिया, निचलौल आदि जगहों पर भी यही स्थिति है। कई मेडिकल स्टोर दवाओं की जगह इलाज का धंधा कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इन अवैध क्लीनिक पर न तो चिकित्सक की डिग्री होती है न ही पंजीकरण। कुछ जगहों पर आठवीं पास लोग डॉक्टर बन बैठे हैं। इन झोलाछापों के पास सिर्फ दवा कंपनियों के एमआर कमीशन के लालच में दवाएं थमा जाते हैं।
शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चौक बाजार स्थित एक निजी अस्पताल पर छापा मारा, जहां मेडिकल स्टोर के नाम पर क्लीनिक चलता मिला था। एसीएमओ डॉ. वीरेंद्र आर्या ने संचालक से क्लिनिक का पंजीकरण मांगा तो कोई दस्तावेज नहीं दिखाया गया तो उसे सील कर दिया।
गलियों और चौराहों पर चल रहा झोलाछाप का धंधा : भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में झोलाछाप की संख्या इस कदर है कि वह गांव की गलियों और चौराहों पर झोपड़ी और टीनशेड बड़े से बड़े बीमारी का इलाज कर ठीक करने का दावा करते हैं। यही कारण है कि तमाम लोग झोलाछाप के झांसे में आकर फंस जाते हैं। क्योंकि बीमारी ठीक होने के बजाय बढ़ती चली जाती है। फिर लोग मोटी रकम खर्च करने के बाद हार कर सरकारी अस्पताल या किसी बड़े डॉक्टर के पास इलाज के लिए पहुंचते हैं।
ब्याज पर रकम बांटने से लेकर भूमि को रखते हैं बंधक : सूत्रों की मानें तो झोलाछाप की कमाई इतनी मोटी है कि लोगों में ब्याज पर रकम बांटने के अलावा कृषि भूमि को भी बंधक रखते हैं। मामूली बीमारी को भी ठीक करने में झोलाछाप करीब एक सप्ताह का दिन लगा देते हैं। इन दिनों के बीच मरीजों को इलाज कर ठीक करने की दावा करते हुए मोटी रकम वसूल कर कमाई करते हैं।

जांच कराने पर पैथाॅलोजी से तय है कमीशन
क्लीनिक पर इलाज कराने के लिए पहुंचने वाले मरीजों को झोलाछाप पहले इंजेक्शन और दवा देते हैं। फिर तमाम प्रकार के जांच के लिए चिंह्नित पैथालाॅजी पर भेजते हैं। जहां पर पैथालाॅजी संचालक की ओर से मोटी रकम ली जाती है। फिर सप्ताह या 15 दिनों के बाद जांच के लिए भेजने वाले झोलाछाप को तय कमीशन देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed