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नशीली दवाओं की इंटरनेशनल तस्करी का मामला: प्रतिबंधित दवाओं के धंधेबाज पहले से थे रडार पर, मुख्य आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस
Sun, 08 Aug 2021 12:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज।
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 08 Aug 2021 12:35 PM IST
सार
मुख्य आरोपी गोविंद गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की पड़ताल जारी। सील कर दिया गया है आरोपी का मेडिकल स्टोर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
महराजगंज जिले के ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र के जमुई कला गांव में चार अगस्त को गोदाम में बरामद हुई प्रतिबंधित नशीली दवाओं ने पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मुख्य आरोपी गोविंद गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए पुलिस हाथ-पांव मार रही है, लेकिन वह कहां है, इसका पता नहीं लगा पा रही है। उधर, औषधि निरीक्षक ने दवाओं के 24 नमूेा जांच के लिए लैब भेजा है।
मुख्य आरोपी के गडौरा स्थित मेडिकल स्टोर को सील कर दिया गया है। जांच में पता चला है कि 686 करोड़ की दवा जहां बरामद हुई, वहां के लिए विभाग ने लाइसेंस जारी नहीं किया है। सूत्र बताते हैं कि करीब तीन माह पहले लक्ष्मीपुर के भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल दवा ले जाने के दौरान एक युवक पकड़ा गया था। पुलिस ने पूछताछ कर उससे अहम जानकारी हासिल की थी। पुलिस टीम प्रत्येक हलचल पर नजर रख रही थी। पुख्ता होने के बाद टीम बनाकर छापा डाला गया तो हकीकत सामने आ गई।
सूत्रें के मुताबिक, प्रतिबंधित नशीली दवाओं के धंधे से गोविंद गुप्ता की माली हालत काफी अच्छी हो गई है। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्र में तमाम ऐसे बिना लाइसेंसी धंधेबाज हैं, जो छोटे पैमाने पर प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी में जुटे हैं। नेपाल में भी प्रतिबंधित नशीली दवाओं के बरामद होने के बाद पूछताछ में जो तथ्य सामने आते हैं, उससे पता चलता है कि सीमावर्ती क्षेत्र से नशीले इंजेक्शन एवं दवाएं पहुंचाई जाती हैं।
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औषधि निरीक्षक शिव कुमार नायक ने बताया कि समय-समय पर जांच पड़ताल की जाती है। बरामदगी के बाद दवाओं के 25 नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। मुख्य आरोपित की दवा की दुकान को सील कर दिया गया है। जहां दवाएं बरामद हुई, वहां का लाइसेंस नहीं था।
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मुख्य आरोपी के गडौरा स्थित मेडिकल स्टोर को सील कर दिया गया है। जांच में पता चला है कि 686 करोड़ की दवा जहां बरामद हुई, वहां के लिए विभाग ने लाइसेंस जारी नहीं किया है। सूत्र बताते हैं कि करीब तीन माह पहले लक्ष्मीपुर के भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल दवा ले जाने के दौरान एक युवक पकड़ा गया था। पुलिस ने पूछताछ कर उससे अहम जानकारी हासिल की थी। पुलिस टीम प्रत्येक हलचल पर नजर रख रही थी। पुख्ता होने के बाद टीम बनाकर छापा डाला गया तो हकीकत सामने आ गई।
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सूत्रें के मुताबिक, प्रतिबंधित नशीली दवाओं के धंधे से गोविंद गुप्ता की माली हालत काफी अच्छी हो गई है। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्र में तमाम ऐसे बिना लाइसेंसी धंधेबाज हैं, जो छोटे पैमाने पर प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी में जुटे हैं। नेपाल में भी प्रतिबंधित नशीली दवाओं के बरामद होने के बाद पूछताछ में जो तथ्य सामने आते हैं, उससे पता चलता है कि सीमावर्ती क्षेत्र से नशीले इंजेक्शन एवं दवाएं पहुंचाई जाती हैं।
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औषधि निरीक्षक शिव कुमार नायक ने बताया कि समय-समय पर जांच पड़ताल की जाती है। बरामदगी के बाद दवाओं के 25 नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। मुख्य आरोपित की दवा की दुकान को सील कर दिया गया है। जहां दवाएं बरामद हुई, वहां का लाइसेंस नहीं था।
कहीं नेपाल में तो छिपा नहीं है मुख्य आरोपी
मुख्य आरोपी गोविंद गुप्ता पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम छापा डाल रही है, लेकिन वह हत्थे नहीं चढ़ रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं की मुख्य आरोपित नेपाल में छिप गया हो। उसकी रिश्तेदारी भी नेपाल में हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि वह नेपाल में शरण ले सकता है। एसपी प्रदीप गुप्ता ने बताया कि पुलिस टीम मुख्य आरोपित को गिरफ्तार करने में जुटी है। जल्द ही उसे पकड़ लिया जाएगा।
धंधे को अंजमा देने के लिए खर्च करता था रकम
मुख्य आरोपी गोविंद गुप्ता प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बेरोक टोक तस्करी करने के लिए कुछ लोगों को रकम भी देता था। उसे करीब से जानने वाले बताते हैं कि एक कर्मी मोटी रकम की वसूली करता था। यही कारण है कि विभाग के अधिकारी इससे बेखबर रहते थे।
धंधे को अंजमा देने के लिए खर्च करता था रकम
मुख्य आरोपी गोविंद गुप्ता प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बेरोक टोक तस्करी करने के लिए कुछ लोगों को रकम भी देता था। उसे करीब से जानने वाले बताते हैं कि एक कर्मी मोटी रकम की वसूली करता था। यही कारण है कि विभाग के अधिकारी इससे बेखबर रहते थे।