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Maharajganj News: सामूहिक दुष्कर्म के तीन दोषियाें को 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास
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जिला जज अरविन्द मलिक ने सुनाया फैसला
महराजगंज। एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में जिला जज अरविन्द मलिक ने तीनों आरोपियों नेवास, हरिकेश और रिकेश को दोषी करार दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता, घटनाक्रम और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए तीनों को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास व प्रत्येक को 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न अदा करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन के अनुसार, यह घटना 10 मार्च 2013 की शाम की है। पीड़िता अपने घर में खाना बना रही थी। इसी दौरान आरोपित नेवास, हरिकेश और रिकेश अचानक उसके घर में घुस आए। तीनों ने पीड़िता का मुंह दबाकर उसे जबरन उठाया और पास ही स्थित घारी (गौशाला) में ले जाकर बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता ने साहस जुटाकर मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में पीड़िता, उसके परिजनों और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
जिला शासकीय अधिवक्ता ने अभियोजन पक्ष की ओर से तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि घटना न सिर्फ जघन्य है बल्कि समाज को झकझोर देने वाली है। अभियोजन ने कहा कि पीड़िता के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट तथा अन्य अभिलेखीय साक्ष्य आरोपितों के अपराध को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं। बचाव पक्ष ने आरोपितों को फंसाए जाने की दलील दी लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। सभी पक्षों की दलीलें सुनने, साक्ष्यों का विश्लेषण करने और घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला जज ने तीनों को दोष सिद्ध माना और कड़ी सजा सुनाई।
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महराजगंज। एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में जिला जज अरविन्द मलिक ने तीनों आरोपियों नेवास, हरिकेश और रिकेश को दोषी करार दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता, घटनाक्रम और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए तीनों को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास व प्रत्येक को 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न अदा करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन के अनुसार, यह घटना 10 मार्च 2013 की शाम की है। पीड़िता अपने घर में खाना बना रही थी। इसी दौरान आरोपित नेवास, हरिकेश और रिकेश अचानक उसके घर में घुस आए। तीनों ने पीड़िता का मुंह दबाकर उसे जबरन उठाया और पास ही स्थित घारी (गौशाला) में ले जाकर बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता ने साहस जुटाकर मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में पीड़िता, उसके परिजनों और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
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जिला शासकीय अधिवक्ता ने अभियोजन पक्ष की ओर से तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि घटना न सिर्फ जघन्य है बल्कि समाज को झकझोर देने वाली है। अभियोजन ने कहा कि पीड़िता के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट तथा अन्य अभिलेखीय साक्ष्य आरोपितों के अपराध को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं। बचाव पक्ष ने आरोपितों को फंसाए जाने की दलील दी लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। सभी पक्षों की दलीलें सुनने, साक्ष्यों का विश्लेषण करने और घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला जज ने तीनों को दोष सिद्ध माना और कड़ी सजा सुनाई।
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