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Maharajganj News: मर्ज और मरीज हजार...डॉक्टर सिर्फ चार

Sat, 30 May 2026 01:59 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 30 May 2026 01:59 AM IST
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Thousands of diseases and patients... only four doctors
महिला अस्पताल में लगी भीड़। 
जिले के 17 सीएचसी में सिर्फ तीन में महिला रोग विशेषज्ञ की स्थाई तैनाती, एक उधार के भरोसे, 40 पीएचसी पर कोई इंतजाम नहीं
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जिला महिला अस्पताल में तीन पदों पर सिर्फ दो डॉक्टरों की तैनाती, छह इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर और अधीक्षक के पद खाली


महराजगंज। गांव-कस्बों में सुरक्षित प्रसव, मां और नवजात की मृत्यु दर में कमी लाने के लिए शुरू की गई सरकार की तमाम योजनाएं अव्यवस्था के मर्ज से बेमानी साबित होती नजर आ रही हैं। जिले में संचालित 17 सीएचसी और 40 पीएचसी में सिर्फ तीन सीएचसी पर स्थाई रूप से स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। एक सीएचसी को हफ्ते में तीन दिन उधार की एक डॉक्टर मिल पाती हैं।
जांच और इलाज के अभाव में गर्भवतियों और नवजातों की मौत के साल-दर-साल बढ़ते आंकड़े स्वास्थ्य महकमे की अव्यवस्था की भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। ऐसे में सरकारों की ओर से चलाई जा रही राहत की योजनाएं भी दम तोड़ती नजर आ रही है। साल 2022-23 में जिले में 113 नवजातों की मौत हुई थी, 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 436 तक पहुंच गई। वहीं, व्यवस्था का आलम यह है कि केवल फरेंदा, परतावल और निचलौल सीएचसी में ही स्थायी तौर पर स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हैं। जाहिर है विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में महिलाओं को इलाज में रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें गांव-कस्बे के करीब के सीएचसी-पीएचसी को छोड़कर जिला अस्पताल की लंबी यात्रा करनी पड़ती है या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना मजबूरी हो जाती है।
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फरेंदा सीएचसी की ओपीडी में रोजाना औसतन 30-35 महिला मरीज होती हैं। यहां डॉ. रोचस्मति पांडेय और डॉ. कविता अग्रवाल की तैनाती है। डॉ. कविता हफ्ते में तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को लक्ष्मीपुर सीएचसी में सेवाएं देती हैं। लक्ष्मीपुर की ओपीडी में भी रोजाना 30 से 40 महिला मरीज होती हैं लेकिन उन्हें इलाज की सुविधा हफ्ते में सिर्फ तीन दिन ही मिल पाती है। रोजाना 150-200 महिला मरीजों की ओपीडी वाले सीएचसी परतावल में डाॅ. शालिनी सिंह की तैनाती है। 40 से 45 मरीजों की ओपीडी वाले निचलौल सीएचसी में डॉ. अंजली सिंह सेवाएं दे रही हैं। अन्य सीएचसी और 40 पीएचसी महिलाओं के लिए बेमानी हैं और जिला अस्पताल की भीड़ में धक्के खाना उनकी नियति बनी हुई है।
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एनेस्थीसिया के डॉक्टर भी हर समय उपलब्ध नहीं
जिन सीएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती है, वहां भी अन्य इंतजाम पूरे नहीं हैं कि जरूरत पर तत्काल इलाज और ऑपरेशन की सुविधा मिल सके। परतावल सीएचसी में एनेस्थीसिया के डॉ. दुर्गेश सिंह तैनात हैं। निचलौल में डॉ. शांति विजय मिश्र सिर्फ शनिवार और रविवार को रहते हैं, आपात स्थिति में भी फोन करने पर पहुंचते हैं। फरेंदा में डॉ. आरबी राम संविदा पर तैनात हैं। सीएचसी बनकटी और रतनपुर (मिश्रवलिया) से ऑनकाल एनेस्थिसिया चिकित्सक को बुलाया जाता है। सीएचसी लक्ष्मीपुर में एनेस्थीसिया के डॉक्टर नहीं हैं। ऑनकाल बुलाया जाता है।



जिला महिला अस्पताल में 10 में आठ पद खाली

महिला अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में स्त्री रोग विशेषज्ञ के तीन पद हैं। इसमें संविदा और नियमित के तौर पर एक-एक डॉक्टर तैनात हैं। चिकित्सा अधीक्षक का एक ही पद है और वह खाली है। इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) के सभी छह पद सभी खाली पड़े हुए हैं। सीएचसी-पीएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से गांवों से महिलाएं इलाज के लिए यहां पहुंचती हैं और आंकड़ो में रोजाना ढाई सौ तक की ओपीडी दर्ज होती है। अमूमन सामान्य और सिजेरियन मिलाकर आठ प्रसव भी रोजाना महिला अस्पताल में कराए जाते हैं।

खतरे में मरीज, निजी अस्पतालों की चांदी

सरकारी अस्पतालों में महिला डॉक्टरों की तैनाती न होने के कारण गरीब मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सीएचसी में महिला डॉक्टर न होने के कारण उन्हें निजी अस्पतालों में मोटी रकम चुकानी पड़ती है। सिजेरियन में 35 से 40 तो नार्मल डिलेवरी के लिए 20 से 25 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। निजी अस्पतालों में अधिकतर सिजेरियन डिलीवरी ही होती है। इसी भागम-भाग में अक्सर जच्चा-बच्चा की जान खतरे में पड़ जाती है।




गर्भवती महिला की मौत का आंकड़ा
वर्ष मौतें
2017-18 61

2018-19 78
2019-20 59

2020-21 49
2021-22 47

2022-23 9
2023-24 33

2024-25 35
2025 -26 45



हर साल इतने नवजातों की चली जाती है जान

वर्ष मौतें

2022-23 113
2023-24 256

2024-25 381
2025-26 436

2026-27 41

वर्जन

जिले में स्वीकृत पद के सापेक्ष रिक्त पदों की सूचना उच्चाधिकारियों को भेजी जाती है। डाॅक्टर मिलते ही सीएचसी पर तैनाती कराई जाएगी। अगर कहीं समस्या हो रही है तो जल्द ही उसका समाधान कराया जाएगा।
-डॉ. नवनाथ प्रसाद, सीएमओ
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