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Maharajganj News: मगहर में टेक्सटाइल पार्क के निर्माण का रास्ता साफ, कैबिनेट ने दी मंजूरी

Wed, 06 May 2026 02:58 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 06 May 2026 02:58 AM IST
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The way is cleared for the construction of a textile park in Maghar, the cabinet has given its approval.
सरकार ने पहले ही की थी टेक्सटाइल पार्क बनाने की घोषणा, मंजूरी के बाद पार्क बनने की जगी आस
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टेक्सटाइल पार्क बनने से इलाके का होगा विकास, रोजगार के बढ़ेंगे अवसर

संतकबीरनगर। मगहर में बंद पड़ी कताई मिल में टेक्सटाइल पार्क बनाने का रास्ता साफ हो गया है। कैबिनेट की बैठक में इसकी मंजूरी मिलने से जल्द कार्य शुरू होने की उम्मीद जग गई है। यहां टेक्सटाइल पार्क बनने से जहां उद्यमियों को राहत मिलेगी, वहीं इलाके का तेजी से विकास होने की संभावना है। साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे एक बार फिर मगहर की रौनक लौट सकती है। संतकबीर सहकारी सूती कताई मिल की जमीन पर टेक्सटाइल पार्क बनाने की घोषणा शासन ने पहले ही कर दी थी। इसके बाद सर्वे कराया गया। शासन ने इसके साथ ही जमीन की स्थिति और पेयजल स्रोत के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी, जिसे प्रशासन ने शासन को भेज दी थी।
अब शासन ने इसे कैबिनेट की बैठक में मंजूरी प्रदान कर दी है। इससे यहां टेक्सटाइल पार्क की आस जग गई है। वैसे भी शासन-प्रशासन सूफी संतकबीर की परिनिर्वाण स्थली को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कराने के लिए कार्य करा रहा है। इस कार्य का शुभारंभ पूर्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था, लेकिन संतकबीर सहकारी कताई मिल को लेकर कोई कार्य नहीं हो पाया था, अब टेक्सटाइल पार्क बनने से मगहर के विकास को गति मिल सकती है।
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12 सौ मजदूर व उनके परिवार झेल रहे बेरोजगारी की मार
मगहर। मिल के बंद होने से करीब 12 सौ मजदूर व उनके परिवार बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं, मगहर में भी आर्थिक असर पड़ा है। वजह यह है कि कर्मचारियों के वेतन का बड़ा हिस्सा कस्बे के बाजारों, किरायेदारी में खर्च होता था। सूती कताई मिल बंद हुए लगभग 29 वर्ष बीत चुके हैं। करीब 40 एकड़ में फैली बंद पड़ी सूती मिल की आधारशिला सात जनवरी 1977 को सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने रखी थी। इस मिल में 1978 से सूती धागे का उत्पादन शुरू हुआ और कम ही दिनों में बाजार में अपनी मजबूत पकड़ मजबूत कर ली थी। बुनकर बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण बुनकरों को सुलभता से सूत मिल जाया करता था।
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मिल चालू होने से क्षेत्र के अलावा कस्बे के लोगों के हुनरमंद हाथों को काम मिला। मिल मजदूर संगठन के अस्तित्व में आने से वर्ष 1981 में मिल प्रबंधन व मजदूर संगठन के बीच गोलीकांड होने के कारण मिल 28 दिन तक बंद रही। इसके बाद आपसी सहमति के बाद पुनः मिल चालू हुई और उत्पादन सुचारू रूप से चलता रहा। वर्ष 1989 में सूती मिल में आग लगने के कारण काफी नुकसान होने से यह मिल लगभग दो वर्ष तक बंद पड़ी रही।
वर्ष 1992 में पुनः मिल चालू हुई, लेकिन मुनाफे की जगह घाटे के कारण वह नहीं चल सकी। वर्ष 1997 में मिल पूरी तरह से बंद हो गई। इसके बाद फेडरेशन ने कर्मचारियों को वीआरएस देने की घोषणा कर दी और तत्कालीन एमडी एसडी खन्ना के कार्यकाल में मिल कर्मचारियों को वीआरएस का भुगतान कर दिया गया।
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मिल जब चलती थी तो लोगों को रोजगार मिल रहा था। हर तरफ खुशहाली थी। कस्बे के लोग भी खुशहाल थे। यहां व्यापारियों के रोजगार भी बढ़ रहे थे, परंतु मिल बंद होने से लोग बदहाल हो गए। कामगार हाथ बेकार हो गए। कर्मचारियों के आगे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया। पेंशन के रूप में प्रति माह 1000 रुपये मिलते हैं। इस समय की महंगाई में इससे गुजारा हो पाना संभव नहीं है। परिसर को इंडस्ट्रियल हब बनाना अच्छी बात है, परंतु मिल के कर्मचारियों का भी ख्याल रखा जाना चाहिए।
-परवेज कौसर, पूर्व कर्मचारी
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संतकबीर कताई मिल को टेक्सटाइल पार्क बनाने की पहल से उम्मीद जगी है। इससे लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। मगहर की खोई रौनक एक बार फिर लौट सकती है। सरकार को पूर्व कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए भी कदम उठाना चाहिए।
-मो. इरफानुल्लाह, पूर्व कर्मचारी
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बंद पड़ी कताई मिल में टेक्सटाइल पार्क बनाने की पहल सराहनीय है। इसके लिए कई बार शासन स्तर पर प्रयास किया गया था। अब कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है तो उम्मीद है कि जल्द ही कार्य शुरू हो जाएंगे।
-अरविंद पाठक, अध्यक्ष, इंड्रस्टि्रयल एसोसिएशन
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कताई मिल में टेक्सटाइल पार्क बनने से उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। उद्यमियों को उद्यम लगाने के लिए जमीन की समस्या रहती है। इससे इस समस्या का भी समाधान हो जाएगा। यहां पर कार्य जल्द से जल्द शुरू कराया जाना चाहिए।

-पवन सर्राफ, उद्यमी
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संतकबीर कताई मिल में टेक्सटाइल पार्क बनाने के लिए शासन ने कदम उठाया है। सर्वे कराकर रिपोर्ट भेज दी गई है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही कार्य शुरू कराया जाएगा।
-राजकुमार शर्मा, उपायुक्त उद्योग
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