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Maharajganj News: पहचान के बिना फाइलों में उलझ कर रह गई अज्ञात शवों की गुत्थी
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महराजगंज। जिले में अक्सर अज्ञात शव मिलने के मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन पुलिस ज्यादातर मामलों में शवों की पहचान नहीं कर पा रही है। ऐसे में अज्ञात शवों की गुत्थी सुलझने की जगह फाइलों में उलझ कर रह गई है।
पिछले दो माह में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में कई अज्ञात शव मिल चुके हैं। इनमें अधिकांश प्रकरणों में अब तक न तो मृतकों की पहचान हो सकी है और न ही उनकी मौत के कारणों का खुलासा हो पाया है। कुछ शव रेल पटरियों पर मिले, तो कुछ सुनसान इलाकों में बरामद हुए। पुलिस की ओर से इन शवों की गुत्थी को सुलझाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है। लेकिन यह गुत्थी सुलझने के बजाय फाइलों में ही उलझी रहती है। लोगों का मानना है कि अज्ञात शव मिलने के मामले में जिम्मेदारों की ओर से सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जाती है।
सूत्रों का मानना है कि पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अनसुलझे अधिकांश मामलों में मौत की वजह तय नहीं हो पाती है। क्योंकि रेल ट्रैक, सुनसान रास्तों, नहर तालाबों और जंगलों में मिले शवों को लेकर कभी हादसे की, तो कभी आत्महत्या की आशंका जताई जाती है। इतना ही नहीं जांच में भी कोई सटीक जानकारी निकलकर सामने नहीं आती है। इससे न तो मृतकों की पहचान हो सकी और न ही परिजनों तक पुलिस पहुंच पाई। निचलौल तहसील बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता सरजू पांडेय ने कहा कि जिन अज्ञात शवों की पहचान नहीं हो सकी है। वे आज भी पुलिस के रिकॉर्ड में केवल एक केस नंबर बनकर ही रह गए हैं। रहस्यमयी मौतों की गुत्थियां नहीं सुलझ पाती हैं। ऐसे में केस की फाइलें धूल खा रहीं हैं। जबकि पुलिस को अज्ञात शवों के मामलों को गंभीरता से लेकर विशेष टीम गठित करनी चाहिए। ताकि लंबित मामलों की गुत्थी सुलझ सके।
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पिछले दो माह में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में कई अज्ञात शव मिल चुके हैं। इनमें अधिकांश प्रकरणों में अब तक न तो मृतकों की पहचान हो सकी है और न ही उनकी मौत के कारणों का खुलासा हो पाया है। कुछ शव रेल पटरियों पर मिले, तो कुछ सुनसान इलाकों में बरामद हुए। पुलिस की ओर से इन शवों की गुत्थी को सुलझाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है। लेकिन यह गुत्थी सुलझने के बजाय फाइलों में ही उलझी रहती है। लोगों का मानना है कि अज्ञात शव मिलने के मामले में जिम्मेदारों की ओर से सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जाती है।
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सूत्रों का मानना है कि पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अनसुलझे अधिकांश मामलों में मौत की वजह तय नहीं हो पाती है। क्योंकि रेल ट्रैक, सुनसान रास्तों, नहर तालाबों और जंगलों में मिले शवों को लेकर कभी हादसे की, तो कभी आत्महत्या की आशंका जताई जाती है। इतना ही नहीं जांच में भी कोई सटीक जानकारी निकलकर सामने नहीं आती है। इससे न तो मृतकों की पहचान हो सकी और न ही परिजनों तक पुलिस पहुंच पाई। निचलौल तहसील बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता सरजू पांडेय ने कहा कि जिन अज्ञात शवों की पहचान नहीं हो सकी है। वे आज भी पुलिस के रिकॉर्ड में केवल एक केस नंबर बनकर ही रह गए हैं। रहस्यमयी मौतों की गुत्थियां नहीं सुलझ पाती हैं। ऐसे में केस की फाइलें धूल खा रहीं हैं। जबकि पुलिस को अज्ञात शवों के मामलों को गंभीरता से लेकर विशेष टीम गठित करनी चाहिए। ताकि लंबित मामलों की गुत्थी सुलझ सके।
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