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झोले की सिलाई से खुला उन्नति का द्वार
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झोले की सिलाई से खुला उन्नति का द्वार
महराजगंज। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं घर बैठे काम कर आर्थिक समस्या को दूर करने में जुटी हैं। सरकार की मदद से महिला समूहों के कामकाज में होने वाली समस्या दूर हो जाती है। महिलाओं द्वारा तैयार उत्पाद बेचने में समस्या भी नहीं होती।
शहर के लोहिया नगर मोहल्ले में रमन स्वयं सहायता समूह संचालित है। रिवाल्विंग फंड समूह को मिल चुका है। समूह में 13 सदस्य हैं। सभी मिलकर काम करते हैं। समूह का गठन 8 अगस्त 2019 को हुआ था। समूह की अध्यक्ष आरती कहती हैं कि घर बैठे काम आसानी से हो जाता है। स्थानीय बाजार से कपड़ा लेकर बड़ा एवं छोटा झोला बनाया जाता है। एक झोले को बनाने में करीब 24 रुपये की लागत आती है, जिसे 40 से 50 रुपये में बेच दिया जाता है। प्रत्येक महिला सदस्य को करीब 1000 से 1500 की आमदनी होती है। आर्डर पर झोला तैयार किया जाता है। कोरोना काल में काम बंद हो गया था। अब काम मिलने से मुश्किल दूर हो रही है।
कोषाध्यक्ष बबली ने बताया कि झोले की सिलाई से होने वाली आमदनी से छोटी-मोटी जरूरतें आसानी से पूरी हो जाती हैं। सदस्य गेना, आरती सिंह, संध्या, आसमा खातून, निशा, शकुंतला, पूनम ने बताया कि घरेलू कामकाज के बाद वक्त मिलने पर झोले की सिलाई करने से कुछ आमदनी हो जाती है। महिला प्रशिक्षण सेवा संस्थान की सचिव सरोज पांडेय कहती हैं कि समूह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में काफी मददगार है। सरकार से मिलने वाली मदद एवं प्रशिक्षण से मुश्किल दूर होती है। महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव कोशिश करनी चाहिए।
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महराजगंज। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं घर बैठे काम कर आर्थिक समस्या को दूर करने में जुटी हैं। सरकार की मदद से महिला समूहों के कामकाज में होने वाली समस्या दूर हो जाती है। महिलाओं द्वारा तैयार उत्पाद बेचने में समस्या भी नहीं होती।
शहर के लोहिया नगर मोहल्ले में रमन स्वयं सहायता समूह संचालित है। रिवाल्विंग फंड समूह को मिल चुका है। समूह में 13 सदस्य हैं। सभी मिलकर काम करते हैं। समूह का गठन 8 अगस्त 2019 को हुआ था। समूह की अध्यक्ष आरती कहती हैं कि घर बैठे काम आसानी से हो जाता है। स्थानीय बाजार से कपड़ा लेकर बड़ा एवं छोटा झोला बनाया जाता है। एक झोले को बनाने में करीब 24 रुपये की लागत आती है, जिसे 40 से 50 रुपये में बेच दिया जाता है। प्रत्येक महिला सदस्य को करीब 1000 से 1500 की आमदनी होती है। आर्डर पर झोला तैयार किया जाता है। कोरोना काल में काम बंद हो गया था। अब काम मिलने से मुश्किल दूर हो रही है।
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कोषाध्यक्ष बबली ने बताया कि झोले की सिलाई से होने वाली आमदनी से छोटी-मोटी जरूरतें आसानी से पूरी हो जाती हैं। सदस्य गेना, आरती सिंह, संध्या, आसमा खातून, निशा, शकुंतला, पूनम ने बताया कि घरेलू कामकाज के बाद वक्त मिलने पर झोले की सिलाई करने से कुछ आमदनी हो जाती है। महिला प्रशिक्षण सेवा संस्थान की सचिव सरोज पांडेय कहती हैं कि समूह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में काफी मददगार है। सरकार से मिलने वाली मदद एवं प्रशिक्षण से मुश्किल दूर होती है। महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव कोशिश करनी चाहिए।
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