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Maharajganj News: नवरात्र में बढ़ी फलों की मांग... पूरा करने को केमिकल से पका रहे फल
Thu, 03 Apr 2025 11:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 03 Apr 2025 11:56 PM IST
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महराजगंज। सेहतमंद रहने के लिए व्रत में विशेष रूप से डाइट में फलों को शामिल किया जाता है। लेकिन, वही फल सेहत बनाने की बजाय सेहत बिगाड़ने का कारण बन जा रहे हैं। नवरात्र में फलों की मांग बढ़ गई है। ऐसे में फलों की मांग को पूरा करने के लिए केमिकल से पकाकर फलों की मांग पूरी की जा रही है। दरअसल, फलों को कृत्रिम तरीके से पकाने के लिए जिन रसायनों का उपयोग हो रहा है। वह सेहत के लिए ठीक नहीं माने जाते हैं। पपीता और केले को कार्बाइड से जल्दी से पका कर बाजार में बेचा जा रहा है। फलों को पकाने और उनको कई दिन तक ताजा रखने के लिए डीडीटी, इथरेल और जिब्रलिक का उपयोग किया जाता है। वहीं, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए संबंधित विभाग की टीम कार्रवाई भी कर रही है।
डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पेड़ पर पका हुआ फल सेहत का खजाना है। वहीं, रसायनों से पकाया हुआ फल सेहत के लिए खतरा है। कार्बाइड से पके केले में केमिकल इतने खतरनाक हैं कि इनसे त्वचा की गंभीर बीमारियां हो सकती है। टाइप-2 डायबिटीज, पीसीओडी का खतरा भी बढ़ जाता है।
सूत्रों की मानें तो सेब को अधिक समय पर ताजा रखने के लिए केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे ही अंगूर को टिकाने के लिए डाइक्लोवास 26 ईसी नाम के केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अंगूर को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल हो रहा यह केमिकल सेहत के लिए खतरनाक है। फल को कृत्रिम तरीके से पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग किया जाता है, इससे उस पर दाग धब्बे पड़ जाते हैं। केले और आम पर यह दाग धब्बे स्पष्ट दिखाई देते हैं। छिलके पर छिड़का गया यह रसायन बाद में भीतर तक चला जाता है। इस बार बाजार में केले आ रहे हैं, उन पर रसायन का छिड़काव इतना ज्यादा किया जा रहा है कि इसका स्वाद भी बदल जा रहा है।
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फल बेचने वाले अशोक ने बताया कि मंडी में ज्यादातर फल केमिकल से पकाए गए ही बिक रहे हैं। इस समय केले की मांग ज्यादा है। नवरात्र में फलों की बढ़ने से केले को जल्दी पकाने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
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फल के साथ सावधानी जरूरी
केएमसी मेडिकल काॅलेज के डॉ. डीसी कुशवाहा ने बताया कि सेहत के लिए फल जरूरी है। खरीदने और खाने से पहले सावधानी बरती जाए तो रसायनों से पके फल खाने से होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है। बाजार से जब भी फल खरीदें उन पर दाग धब्बे नहीं होने चाहिए। खाने से पहले फलों को अच्छी तरह से धोना चाहिए। अगर किसी फल पर वैक्सीनेशन किया गया है तो उसका छिलका उतार कर ही खाना चाहिए। फल हमेशा भरोसेमंद दुकानदार से ही खरीदने चाहिए।
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पपीते को पकाने में खेल, सावधानी जरूरी
महराजगंज। पपीते को पकाने में भी खेल हो रहा है। मांग बढ़ने के कारण एथिलीन गैस का प्रयोग किया जा रहा है। इससे पपीता ठीक से पक जाता है। इसके बाद इसे अखबार से लपेट दिया जाता है।
जानकारों के अनुसार, एथिलीन गैस की वजह से स्टार्च को शुगर में बदलने से यह गैस रोकती है, जिससे उसका स्वाद बढ़ जाता है। पपीते को एथिलीन गैस में पकाने के बाद अखबार में लपेट कर रखा जाता है, जिससे फल से निकलने वाली यह गैस रुक जाती है। दुकानदार राम प्रसाद ने बताया कि कागज लपेटने पकने में आसानी रहती है। प्लास्टिक से लपेटने पर नमी बाहर नहीं निकल पाती है और इससे फल की ऊपरी सतह चिपचिपी और फफूंदयुक्त हो जाती है। बाजार में आया केमिकल से पका आम बाजार में अप्रैल में ही आम बिकने लगा है। देसी आम को पकने में अभी डेढ़ महीने का समय बाकी है।
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चमक देखकर गुड़ खरीदा तो खराब हो सकती है सेहत
महराजगंज। गुड़ खरीदने में भी सावधानी बरतने की जरूरत है। चमकता देखकर गुड़ खरीदने पर समस्या हो सकती है। यह सेहत के लिए ठीक नहीं रहेगी। धंधेबाजों ने इसमें भी मिलावट कर दी है। सूत्रों की मानें तो गुड़ बनाने में केमिकल का प्रयोग हो रहा है। वहीं उसकी रंगत के लिए भी केमिकल वाले रंग डाले जा रहे हैं। इसे खाने से लिवर को खतरा हो सकता है। जिले में अभी गुड़ के नमूने नहीं लिए गए हैं। धंधेबाजों ने अधिक मात्रा में चमकदार गुड़ बाजार में उतार दिया है। संवाद
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पांच ट्रक अधिक हो गई केले की खपत
फल विक्रेता नौशाद अहमद ने बताया कि केला 50 से 60 रुपया दर्जन बिक रहा है। इन दिनों आंध्र प्रदेश से 20 ट्रक केले की गाड़ी है। इसके पहले 15 ट्रक केला आता था। पपीता 50 से 60 रुपया किलो बिक रहा है। 18 ट्रक पपीता आ रहा है। इसके पहले 10 ट्रक आता था। नवरात्र के कारण मांग बढ़ी है। सेब 150 से लेकर 220 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। इसे कश्मीर से मंगाया जाता है। नवरात्र से पहले 100 रुपया किलो बिकता था, अब रेट बढ़ गया है।
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खाद्य पदार्थों के गुणवत्ता की जांच टीम कर रही है। नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद नियम के अनुसार कार्रवाई की जाती है। बीते साल फल के सभी नमूने पास हो गए थे। कोई गड़बड़ी नहीं मिली थी।
डॉ. टीआर रावत, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा द्वितीय
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छह नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए
महराजगंज। इन दिनों सनातन धर्मावलंबी चैत्र नवरात्र उपवास कर रहे हैं। व्रत में फलाहार के रूप में फाफड़ व सिंघाड़े का आटा, घी, राम दाना, मूंगफली सेंधा नमक, बाकला दाल, तिन्नी चावल व मेवे प्रयुक्त होते है। लेकिन, दुकानों पर बिक रही इन उत्पादों के गुणवत्ता की गारंटी नहीं है। घी से लेकर नमक तक में मिलावट की आशंका पर खाद्य विभाग इनका नमूना संग्रहीत कर रहा है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी केके उपाध्याय के नेतृत्व में अभियान चलाकर विभिन्न नमूने लिए गए। धानी में पनीर तो फरेंदा में साबूदाना, सेंधा नमक, हल्दी, काली मिर्च व देशी घी का नमूना लिया गया। उन्होंने बताया कि कुट्टू का आटा जो खुला बिक रहा है, उसका उपयोग न करें। टीम में हंसराज प्रसाद, अंकित सिंह, रंजन श्रीवास्तव शामिल रहे। संवाद
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डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पेड़ पर पका हुआ फल सेहत का खजाना है। वहीं, रसायनों से पकाया हुआ फल सेहत के लिए खतरा है। कार्बाइड से पके केले में केमिकल इतने खतरनाक हैं कि इनसे त्वचा की गंभीर बीमारियां हो सकती है। टाइप-2 डायबिटीज, पीसीओडी का खतरा भी बढ़ जाता है।
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सूत्रों की मानें तो सेब को अधिक समय पर ताजा रखने के लिए केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे ही अंगूर को टिकाने के लिए डाइक्लोवास 26 ईसी नाम के केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अंगूर को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल हो रहा यह केमिकल सेहत के लिए खतरनाक है। फल को कृत्रिम तरीके से पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग किया जाता है, इससे उस पर दाग धब्बे पड़ जाते हैं। केले और आम पर यह दाग धब्बे स्पष्ट दिखाई देते हैं। छिलके पर छिड़का गया यह रसायन बाद में भीतर तक चला जाता है। इस बार बाजार में केले आ रहे हैं, उन पर रसायन का छिड़काव इतना ज्यादा किया जा रहा है कि इसका स्वाद भी बदल जा रहा है।
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फल बेचने वाले अशोक ने बताया कि मंडी में ज्यादातर फल केमिकल से पकाए गए ही बिक रहे हैं। इस समय केले की मांग ज्यादा है। नवरात्र में फलों की बढ़ने से केले को जल्दी पकाने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
फल के साथ सावधानी जरूरी
केएमसी मेडिकल काॅलेज के डॉ. डीसी कुशवाहा ने बताया कि सेहत के लिए फल जरूरी है। खरीदने और खाने से पहले सावधानी बरती जाए तो रसायनों से पके फल खाने से होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है। बाजार से जब भी फल खरीदें उन पर दाग धब्बे नहीं होने चाहिए। खाने से पहले फलों को अच्छी तरह से धोना चाहिए। अगर किसी फल पर वैक्सीनेशन किया गया है तो उसका छिलका उतार कर ही खाना चाहिए। फल हमेशा भरोसेमंद दुकानदार से ही खरीदने चाहिए।
पपीते को पकाने में खेल, सावधानी जरूरी
महराजगंज। पपीते को पकाने में भी खेल हो रहा है। मांग बढ़ने के कारण एथिलीन गैस का प्रयोग किया जा रहा है। इससे पपीता ठीक से पक जाता है। इसके बाद इसे अखबार से लपेट दिया जाता है।
जानकारों के अनुसार, एथिलीन गैस की वजह से स्टार्च को शुगर में बदलने से यह गैस रोकती है, जिससे उसका स्वाद बढ़ जाता है। पपीते को एथिलीन गैस में पकाने के बाद अखबार में लपेट कर रखा जाता है, जिससे फल से निकलने वाली यह गैस रुक जाती है। दुकानदार राम प्रसाद ने बताया कि कागज लपेटने पकने में आसानी रहती है। प्लास्टिक से लपेटने पर नमी बाहर नहीं निकल पाती है और इससे फल की ऊपरी सतह चिपचिपी और फफूंदयुक्त हो जाती है। बाजार में आया केमिकल से पका आम बाजार में अप्रैल में ही आम बिकने लगा है। देसी आम को पकने में अभी डेढ़ महीने का समय बाकी है।
चमक देखकर गुड़ खरीदा तो खराब हो सकती है सेहत
महराजगंज। गुड़ खरीदने में भी सावधानी बरतने की जरूरत है। चमकता देखकर गुड़ खरीदने पर समस्या हो सकती है। यह सेहत के लिए ठीक नहीं रहेगी। धंधेबाजों ने इसमें भी मिलावट कर दी है। सूत्रों की मानें तो गुड़ बनाने में केमिकल का प्रयोग हो रहा है। वहीं उसकी रंगत के लिए भी केमिकल वाले रंग डाले जा रहे हैं। इसे खाने से लिवर को खतरा हो सकता है। जिले में अभी गुड़ के नमूने नहीं लिए गए हैं। धंधेबाजों ने अधिक मात्रा में चमकदार गुड़ बाजार में उतार दिया है। संवाद
पांच ट्रक अधिक हो गई केले की खपत
फल विक्रेता नौशाद अहमद ने बताया कि केला 50 से 60 रुपया दर्जन बिक रहा है। इन दिनों आंध्र प्रदेश से 20 ट्रक केले की गाड़ी है। इसके पहले 15 ट्रक केला आता था। पपीता 50 से 60 रुपया किलो बिक रहा है। 18 ट्रक पपीता आ रहा है। इसके पहले 10 ट्रक आता था। नवरात्र के कारण मांग बढ़ी है। सेब 150 से लेकर 220 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। इसे कश्मीर से मंगाया जाता है। नवरात्र से पहले 100 रुपया किलो बिकता था, अब रेट बढ़ गया है।
खाद्य पदार्थों के गुणवत्ता की जांच टीम कर रही है। नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद नियम के अनुसार कार्रवाई की जाती है। बीते साल फल के सभी नमूने पास हो गए थे। कोई गड़बड़ी नहीं मिली थी।
डॉ. टीआर रावत, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा द्वितीय
छह नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए
महराजगंज। इन दिनों सनातन धर्मावलंबी चैत्र नवरात्र उपवास कर रहे हैं। व्रत में फलाहार के रूप में फाफड़ व सिंघाड़े का आटा, घी, राम दाना, मूंगफली सेंधा नमक, बाकला दाल, तिन्नी चावल व मेवे प्रयुक्त होते है। लेकिन, दुकानों पर बिक रही इन उत्पादों के गुणवत्ता की गारंटी नहीं है। घी से लेकर नमक तक में मिलावट की आशंका पर खाद्य विभाग इनका नमूना संग्रहीत कर रहा है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी केके उपाध्याय के नेतृत्व में अभियान चलाकर विभिन्न नमूने लिए गए। धानी में पनीर तो फरेंदा में साबूदाना, सेंधा नमक, हल्दी, काली मिर्च व देशी घी का नमूना लिया गया। उन्होंने बताया कि कुट्टू का आटा जो खुला बिक रहा है, उसका उपयोग न करें। टीम में हंसराज प्रसाद, अंकित सिंह, रंजन श्रीवास्तव शामिल रहे। संवाद