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खरपतवार से बढ़ी धान की खेती की लागत

Fri, 12 Aug 2022 11:36 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Aug 2022 11:36 PM IST
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The cost of cultivation of paddy increased due to weeds
खेत से खरपतवार निकालता किसान। - फोटो : MAHARAJGANJ
खरपतवार से बढ़ी धान की खेती की लागत
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सब हेड
कम बारिश होने की वजह से खेतों में उग आए हैं खरपतवार, पोषक तत्वों को खींच लेते हैं जिससे फसल हो जाती है कमजोर
किसानों को मजदूरों से करानी पड़ रही है निराई, जिसमें लग रही है अधिक मजदूरी
खरपतवार नाशक दवा के प्रयोग से भी किया जा रहा नियंत्रण, पर यह भी है महंगा
महराजगंज। बहुत कम बारिश होने के कारण इस साल धान की खेती करना काफी महंगा पड़ रहा है। सिंचाई पर तो अधिक खर्च करना ही पड़ रहा है, खेतों में खरपतवार अधिक हो जाने से उनकी निराई पर भी अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
यदि खरपतवार नाशक दवा का प्रयोग करते हैं तब भी खर्च में कमी नहीं आ रही है। हाल यह है कि पिछले साल जहां प्रति एकड़ धान की खेती करने में 12 से 13 हजार रुपये खर्च होते थे, वहीं इस बार 18 से 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
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जिले में एक लाख पैसठ हजार हेक्टेयर में धान की फसल की बुवाई की गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेत में खरपतवार ज्यादा हो गए हैं। यदि इन्हें खेत से निकाला नहीं गया तो धान की फसल विकसित नहीं होगी। पैदावार घट जाएगी। किसानों को नुकसान होगा। वहीं, धान के खेत से खरपतवार निकलवाने में किसानों को पसीना छूट रहा है। कई-कई दिन लग जाने से उन्हें अधिक मजदूरी चुकानी पड़ रही है। यही नहीं इस काम के लिए मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं। खरपतवार नाशक दवा का प्रयोग करने पर भी लागत बढ़ जा रही है। किसानों की समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें। यदि खरपतवार नहीं निकालते हैं तो फसल नहीं होगी। निकालते हैं तो अधिक लागत लग रही है।
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कृषि वैज्ञानिक किसानों को पारंपरिक तरीकों के अलावा वैज्ञानिक विधि से खरपतवार पर नियंत्रण का सुझाव दे रहे हैं। गेड़हवा, मिश्रवलिया, बैठवलिया, बहुआर, खोन्हौली, हरदी, सिधावें, रायपुर सहित अन्य गांवों के सिवान में किसान खेत की निराई कराने में जुटे हैं। गौनरिया राजा गांव के किसान चंद्रशेखर यादव ने बताया कि खरपतवार से धान की फसल को काफी नुकसान हो रहा है। किसान अखिलेश कुमार, ईश्वरचंद्र पटेल, बेचई गुप्ता, नंदकिशोर कसौधन आदि ने बताया कि इस बार धान की फसल खरपतवार की वजह से प्रभावित हो सकती है। खरपतवार से 25 से 30 फीसदी तक उपज प्रभावित हो जाती है। खरपतवार फसलों के पोषक तत्वों को फसल से दो से तीन गुना अधिक मात्रा में ग्रहण कर जाते हैं।
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खरपतवार पर ऐसे करें नियंत्रण
कृषि विज्ञान केंद्र वसूली के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विनोद बहादुर सिंह ने बताया कि खरपतवारों के ज्यादा प्रकोप के कारण खेत की निराई करने से लागत बढ़ जाती है। किसानों को खरपतवार नियंत्रण के लिए ब्यूटाक्लोर 50 ईसी की दो से तीन लीटर की मात्रा प्रति हेक्टेयर या प्रेटिलाकलोर 50 ईसीप्लस सेफनर डेढ़ लीटर की मात्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए।

इसी तरह क्लोरीमयूरान प्लस, मेटसलफयूरान 20 डब्लूपी 20 ग्राम मात्रा की प्रति हेक्टेयर के हिसाब छिड़काव जरूरी है। बिशपायरीबेक सोडियम 10 ईसी 250 मिलीलीटर मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर छिड़काव किया जा सकता है।
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धान की खेती में प्रति एकड़ लागत (रुपये में)
दो बार जुताई--5,000
डाई खाद ---1,350
यूरिया खाद---560
मोनो जिंक---200
सल्फर----100
बीज रोपाई---3,000
सिंचाई----4,000
निराई----4,200
खरपतवार नाशक दवा---600
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