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Maharajganj News: एसएनसीयू का हाल... 36 बेड पर 42 बच्चे भर्ती
Sun, 28 Sep 2025 09:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 28 Sep 2025 09:41 AM IST
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महराजगंज। जिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में 36 बेड पर 42 बच्चे भर्ती हैं। इससे मरीजों को उचित देखभाल की व्यवस्था में कठिनाई हो रही है।
जानकारी के अनुसार, नवजात शिशु देखभाल इकाई में 13 स्टाफ नर्स और आठ बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। यहां शिफ्टवार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन मिश्रा ने बताया कि एसएनसीयू वार्ड में बच्चों को भर्ती कर बेहतर ढंग से इलाज देने का प्रयास रहता है।
वर्तमान में लगातार मौसम बदल रहा है। इसका असर नवजात पर पड़ रहा है। इससे वह बीमार पड़ रहे हैं। इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, पीलिया, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है। इनमें कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से करीब आठ से 10 दिनों के लिए इसमें रखना पड़ता है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि नवजात शिशु देखभाल इकाई में बेहतर व्यवस्था की गई है। डॉक्टरों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है। अस्पताल में मरीजों के इलाज की बेहतर व्यवस्था है। दवाएं पर्याप्त हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से बेहतर सुविधा देने के लिए हर संभव प्रयास जारी है।
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जानकारी के अनुसार, नवजात शिशु देखभाल इकाई में 13 स्टाफ नर्स और आठ बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। यहां शिफ्टवार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन मिश्रा ने बताया कि एसएनसीयू वार्ड में बच्चों को भर्ती कर बेहतर ढंग से इलाज देने का प्रयास रहता है।
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वर्तमान में लगातार मौसम बदल रहा है। इसका असर नवजात पर पड़ रहा है। इससे वह बीमार पड़ रहे हैं। इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, पीलिया, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है। इनमें कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से करीब आठ से 10 दिनों के लिए इसमें रखना पड़ता है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि नवजात शिशु देखभाल इकाई में बेहतर व्यवस्था की गई है। डॉक्टरों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है। अस्पताल में मरीजों के इलाज की बेहतर व्यवस्था है। दवाएं पर्याप्त हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से बेहतर सुविधा देने के लिए हर संभव प्रयास जारी है।