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Maharajganj News: खेत गिरवी रखवाकर एजेंट ने कराया कर्ज का भुगतान
Thu, 03 Apr 2025 11:55 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 03 Apr 2025 11:55 PM IST
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महराजगंज। सदर ब्लॉक के खैचा गांव में माया देवी को खेत गिरवी रखना पड़ा। वसूली करने के लिए एजेंट घर पर पहुंचा तो तुरंत किस्त जमा करने का दबाव बनाने लगा। उसने खेत गिरवी रखवाकर किस्त जमा कराई। इस बीच उसने काफी नोकझोंक भी की। यह मामला सिर्फ एक महिला का नहीं है, बल्कि कर्ज लेने वाली सभी महिलाओं के पास एजेंट पहुंचकर किस्त जमा करने के लिए दबाव बनाते हैं।
माया ने बताया कि एक वर्ष पहले सिलाई मशीन खरीदने और घर बनाने के लिए तीन किश्तों में 50, 32 और 60 हजार रुपये कर्ज लिया गया था। ब्याज बढ़ जाने के कारण रकम भुगतान में दिक्कत होने लगी। छह माह पूर्व तीन एजेंट घर पर आए और भुगतान के लिए दबाव बनाने लगे। माली हालत ठीक नहीं होने के कारण किस्त जमा नहीं कर पाई। वसूली करने वाले एजेंट अपशब्दों कहने लगे। कई बार अनुरोध करने पर भी नहीं माने। एजेंटों ने कहा था कि अपना खेत गिरवी रखकर किस्त जमा कर दो। रकम नहीं जमा हुई तो घर का अनाज समेत सब उठा ले जाएंगे। माया ने बताया कि एजेंटों इतना परेशान कर दिया कि 50 हजार रुपये में खेत गिरवी रखकर एजेंटों को रकम दी। इसके बाद राहत मिली। माइक्रो फाइनेंस कंपनी से कर्ज लेने में दिक्कत नहीं होती है। वसूली करने वाले एजेंटों के बेरुखे व्यवहार से परेशानी होती है। समूह की अन्य महिलाएं भी ऐसी ही समस्या से परेशान हैं।
खैंचा गांव की सुभावती ने बताया कि दो साल पहले बड़ी बेटी खूशबू के विवाह के लिए पांच किस्तों में माइक्रो फाइनेंस समेत कई समूहों से दो लाख 20 हजार लिया गया था। ब्याज दर 25 प्रतिशत होने के कारण समूह के एजेंट घर किश्त भुगतान के लिए बदसलूकी करते हैं। विरोध करने पर मारने पीटने और गाली-गलौच के लिए आमदा हो जाते हैं। रात को नींद नहीं लगती है। हमेशा यही डर लगता है कि एजेंट घर पर आकर कहीं हंगामा न खड़ा कर दें। इस डर के कारण भोजन बनाकर दूसरे टोले पर चली जाती हूं। एजेंट घर पर आते हैं तो पूछताछ कर चले जाते हैं। आरोप है कि करीब तीन दिन पहले नहर के किनारे सड़क पर टहलते हुए वसूली करने वाला एजेंट मिल गया और पैसे भुगतान के लिए धमकी देने लगा। 20 डिस्मिल खेत किस्त जमा करने के लिए गिरवी रख दिया है।
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रामनगर गांव की रहने वाली पुनीता देवी ने बताया कि एक साल पहले माइक्रो फाइनेंस से तीन किस्त में 30 हजार रुपये लिए थे। पति बाहर रहकर मजदूरी करते हैं। आरोप है कि नौ महीने पूर्व माइक्रो फाइनेंस का एजेंट घर आया और अपशब्द बोलने लगा। समूह से लिए गए रकम का भुगतान के लिए दबाव बनाया। एक सप्ताह में रकम जमा करने के लिए कहा, लेकिन वे लोग नहीं माने। एजेंट और जिस महिला के जरिए कर्ज मिला था। दोनों मिलकर गैस सिलिंडर और चूल्हा और नकद 5000 रुपया लेकर चले गए। जब इसकी स्थानीय पुलिस चौकी मुजुरी में शिकायत की तो माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एजेंट ने महिला के जरिए सिलिंडर, चूल्हा और अलमारी को घर पर भिजवा दिया। पुनीता ने बताया कि एजेंटों का व्यवहार ठीक नहीं रहता है। सबसे बड़ी समस्या यह रहती है कि एक तो कर्ज को बोझ दूसरे इसका दबाव बनाया जाना, तनाव को बढ़ा देता है। घर की माली हालत ठीक नहीं होने से किस्त जमा करने में परेशानी हो रही है।
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माया ने बताया कि एक वर्ष पहले सिलाई मशीन खरीदने और घर बनाने के लिए तीन किश्तों में 50, 32 और 60 हजार रुपये कर्ज लिया गया था। ब्याज बढ़ जाने के कारण रकम भुगतान में दिक्कत होने लगी। छह माह पूर्व तीन एजेंट घर पर आए और भुगतान के लिए दबाव बनाने लगे। माली हालत ठीक नहीं होने के कारण किस्त जमा नहीं कर पाई। वसूली करने वाले एजेंट अपशब्दों कहने लगे। कई बार अनुरोध करने पर भी नहीं माने। एजेंटों ने कहा था कि अपना खेत गिरवी रखकर किस्त जमा कर दो। रकम नहीं जमा हुई तो घर का अनाज समेत सब उठा ले जाएंगे। माया ने बताया कि एजेंटों इतना परेशान कर दिया कि 50 हजार रुपये में खेत गिरवी रखकर एजेंटों को रकम दी। इसके बाद राहत मिली। माइक्रो फाइनेंस कंपनी से कर्ज लेने में दिक्कत नहीं होती है। वसूली करने वाले एजेंटों के बेरुखे व्यवहार से परेशानी होती है। समूह की अन्य महिलाएं भी ऐसी ही समस्या से परेशान हैं।
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खैंचा गांव की सुभावती ने बताया कि दो साल पहले बड़ी बेटी खूशबू के विवाह के लिए पांच किस्तों में माइक्रो फाइनेंस समेत कई समूहों से दो लाख 20 हजार लिया गया था। ब्याज दर 25 प्रतिशत होने के कारण समूह के एजेंट घर किश्त भुगतान के लिए बदसलूकी करते हैं। विरोध करने पर मारने पीटने और गाली-गलौच के लिए आमदा हो जाते हैं। रात को नींद नहीं लगती है। हमेशा यही डर लगता है कि एजेंट घर पर आकर कहीं हंगामा न खड़ा कर दें। इस डर के कारण भोजन बनाकर दूसरे टोले पर चली जाती हूं। एजेंट घर पर आते हैं तो पूछताछ कर चले जाते हैं। आरोप है कि करीब तीन दिन पहले नहर के किनारे सड़क पर टहलते हुए वसूली करने वाला एजेंट मिल गया और पैसे भुगतान के लिए धमकी देने लगा। 20 डिस्मिल खेत किस्त जमा करने के लिए गिरवी रख दिया है।
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रामनगर गांव की रहने वाली पुनीता देवी ने बताया कि एक साल पहले माइक्रो फाइनेंस से तीन किस्त में 30 हजार रुपये लिए थे। पति बाहर रहकर मजदूरी करते हैं। आरोप है कि नौ महीने पूर्व माइक्रो फाइनेंस का एजेंट घर आया और अपशब्द बोलने लगा। समूह से लिए गए रकम का भुगतान के लिए दबाव बनाया। एक सप्ताह में रकम जमा करने के लिए कहा, लेकिन वे लोग नहीं माने। एजेंट और जिस महिला के जरिए कर्ज मिला था। दोनों मिलकर गैस सिलिंडर और चूल्हा और नकद 5000 रुपया लेकर चले गए। जब इसकी स्थानीय पुलिस चौकी मुजुरी में शिकायत की तो माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एजेंट ने महिला के जरिए सिलिंडर, चूल्हा और अलमारी को घर पर भिजवा दिया। पुनीता ने बताया कि एजेंटों का व्यवहार ठीक नहीं रहता है। सबसे बड़ी समस्या यह रहती है कि एक तो कर्ज को बोझ दूसरे इसका दबाव बनाया जाना, तनाव को बढ़ा देता है। घर की माली हालत ठीक नहीं होने से किस्त जमा करने में परेशानी हो रही है।