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Maharajganj News: पराली प्रबंधन की एआई करेगा निगरानी, मजबूत होगा तंत्र

Mon, 12 Oct 2026 02:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 12 Oct 2026 02:21 AM IST
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The administration has geared up to rectify last year's mistake, and a team has been deployed on the ground.
महराजगंज। खरीफ सीजन-2025 में पराली जलाने के मामले में तराई का महराजगंज जिला प्रदेश में अव्वल रहा। इसने जिले की छवि बिगाड़ी, जिससे एनजीटी की सख्ती बढ़ी है। बीते वर्ष की गलती सुधारने के लिए इस बार नया प्रयोग किया गया है। इस बार पराली जलाने की निगरानी एआई करेगा। इससे तंत्र और मजबूत होगा।
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शासन से मिले निर्देश क्रम में डीएम की अध्यक्षता में कृषि महकमे के साथ अन्य विभाग के अधिकारियों के दायित्व तय कर दिए गए हैं। डीएम ने सप्ताह पूर्व बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि पराली जलाने की घटना हर हाल में रुकनी चाहिए अन्यथा एनजीटी के साथ-साथ प्रशासन भी कठोर कार्रवाई करेगा।
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जिले में धान की कटाई शुरू होने से पहले ही राजस्व और कृषि विभाग की टीमें धरातल पर उतर चुकी हैं। किसानों को पराली प्रबंधन के तरीके सिखाए जा रहे हैं और निगरानी तंत्र को गांव स्तर तक सक्रिय कर दिया गया है। जिले के 400 हार्वेस्टर संचालकों के लिए कृषि विभाग की तरफ से नया निर्देश जारी किया है। अब बिना एसएमएस (स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम) के कोई भी हार्वेस्टर खेत में नहीं उतर सकेगा। हार्वेस्टर पर सुपर एसएमएस लगा होना अनिवार्य किया गया है, ताकि पराली को काटकर खेत में ही फैला दिया जाए, जिससे उसे जलाने की नौबत न आए। इसका उल्लंघन करने पर मशीन सीज करने तक की कार्रवाई होगी।
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पंचायत स्तर पर तय हुई जिम्मेदारी
इस बार पराली प्रबंधन की जिम्मेदारी सिर्फ लेखपाल और कृषि विभाग तक सीमित नहीं रखी गई है। यूपी पंचायती राज अधिनियम के तहत गांव के प्रशासकों और जनप्रतिनिधियों को भी इसकी जिम्मेदारी दी गई है। प्रधान, रोजगार सेवक, पंचायत सहायक और कोटेदार भी निगरानी तंत्र का हिस्सा होंगे। उन्हें अपने गांव में पराली न जलने देने और जलाने पर तत्काल रिपोर्ट स्थानीय थाने पर करनी होगी। अगर ऐसा नहीं करते तो मामला अन्य माध्यमों से पकड़ा जाता तो शामिल सभी सदस्य कार्रवाई की जद में आएंगे।
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लेखपाल और कृषि विभाग के कर्मियों को भी जिम्मेदारी
जिले को पांच जोन में बांटकर नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं। हर न्याय पंचायत स्तर पर कृषि विभाग का एक कर्मचारी तैनात रहेगा, जो रोजाना रिपोर्ट देगा। लेखपालों को अपने हलके में पराली न जलने देने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी दी गई है। यदि किसी लेखपाल के क्षेत्र में पराली जलने की घटना दो बार से अधिक तो नोटिस जारी हो जाएगी। प्रशासन जागरूकता पर भी जोर दे रहा है।


नई रणनीति में सैटेलाइट और एआई से निगरानी
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कृषि सेक्टर को मजबूत बना रही है। पराली जलाने की घटनाओं को पकड़ने के लिए इस तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। सैटेलाइट डेटा और मोबाइल सेंसिंग के साथ एआई का उपयोग किया जाएगा। पिछले साल सैटेलाइट से पराली जलने की सूचना विभाग के पास एक दिन बाद पहुंचती थी लेकिन इस बार मोबाइल सेंसिंग और एआई के इस्तेमाल से इसे रियल टाइम किया गया है। जैसे ही कहीं पराली जलेगी, उसकी लोकेशन के साथ फोटो और डेटा कंट्रोल रूम को मिल जाएगा और तत्काल टीम मौके पर पहुंचेगी।
पिछले साल 285 घटनाएं, 81 किसानों पर जुर्माना
खरीफ सीजन 2024-25 में जिले में पराली जलाने की 285 घटनाएं सामने आई थीं। इन मामलों में 81 किसानों से 3.40 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया था। लापरवाही बरतने पर 39 लेखपाल, उप निदेशक कृषि और जिले के चारों एसडीएम को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इतना ही नहीं, 12 थानाध्यक्षों को भी इस मामले में नोटिस दिया गया था। इस बार ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए सतर्कता अक्तूबर से ही प्रभावी कर दी गई है।


बोले अधिकारीपराली जलाने को लेकर इस बार जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। किसानों को विकल्प दिए जा रहे हैं और निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है। उम्मीद है कि इस बार जिले की छवि सुधरेगी और किसान पराली को बोझ नहीं बल्कि आय का जरिया बनाएंगे।
- संजीव कुमार पटेल, उप कृषि निदेशक
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