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Maharajganj News: शिक्षकों ने बदल दी विद्यालयों की तस्वीर, छात्रों की संख्या भी बढ़ी और शिक्षा की गुणवत्ता भी
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कंपोजिट विद्यालय भगवतनगर परसिया में स्मार्ट क्लास लेते शिक्षक अरविंद गौड़।
- शिक्षक दिवस स्पेशल: खेल-खेल में बच्चों को बना रहे स्मार्ट, पढ़ाई को भी बना दिया मनोरंजक
महराजगंज। यदि बेहतर शिक्षक मिल जाए तो छात्र एक नहीं सफलता की कई सीढ़ियों को आसानी से चढ़ सकता है। शिक्षक छात्रों की ही नहीं स्कूल की भी तस्वीर बदल सकता है। जिले में भी कुछ ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने सरकारी स्कूलों की सूरत बदल दी और छात्रों को बेहतर शिक्षा दे रहे हैं।
जनपद में कई शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और त्याग की बदौलत परिषदीय विद्यालयों में संसाधनों में बढ़ोतरी तो की ही। शिक्षा का स्तर भी बेहद उम्दा कर दिया। इसके नतीजे भी सामने आए। सुविधाएं और मार्गदर्शन मिलने के बाद इन स्कूलों के बच्चों ने शिक्षा के साथ-साथ खेल के स्तर पर भी विद्यालय का नाम रौशन किया।
कंपोजिट विद्यालय में स्मार्ट क्लास की सुविधा
फरेंदा के कंपोजिट विद्यालय भगवतनगर परसिया के प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार गौड़ जब साल 2011 में विद्यालय को ज्वाइन किए तो स्कूल में कुल 132 छात्र थे। आज की तारीख में ये संख्या बढ़कर 215 पर पहुंच चुकी है। विद्यालय में स्मार्ट क्लास व कंम्प्यूटर कक्षाएं चलाई जाती हैं। विद्यालय में नवाचार से कई छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर मुकाम हासिल कर चुके हैं। इन्हें नवाचार की बदौलत वर्ष 2012 में मंडल स्तरीय नवाचार कार्यशाला में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का पुरस्कार मिला।
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पांच साल में 35 से बढ़कर हो गए 303 छात्र
कंपोजिट विद्यालय मधवापुर में शिक्षक प्रदुम्न कुमार सिंह पढ़ाई के साथ छात्रों में हमेशा कुछ नया करने की सीख देते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में मथुरानगर में तैनाती मिली। उस समय छात्रों की संख्या 35 थी लेकिन 2013 में 303 छात्र हो गए। वहां से त्रिमुहानी बैरियर टोला के प्राथमिक विद्यालय पर स्थानान्तरण हुआ। वर्ष 2017 में वनटांगिया गांव भारीवैसी नर्सरी पहुंचा तो बिना छत का विद्यालय मिला। वहां सात वर्ष रहने के बाद छात्रों की संख्या 313 हो गई। 2025 में बीएसए ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। छात्रों को नियमित नया करने की सीख दी जाती है।
छात्रों को नवाचार का प्रयोग करना सीखा रहे अजय कुमार
कंपोजिट विद्यालय छितही बुजुर्ग के शिक्षक अजय कुमार कुशवाहा शिक्षा के साथ खेलकूद, स्मार्ट क्लास, कम्प्यूटर कक्षा संचालित कर बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर रहे है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में विद्यालय में पहुंचा तो छात्रों की संख्या 256 थी जो अब 556 हो गई है। विद्यालय के छात्र जनपदस्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में विजेता बनकर मंडलस्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित हुए। पिछले वर्ष विद्यालय की छात्रा राष्ट्रीय आविष्कार अभियान में चयनित हुई। विद्यालय में विभिन्न प्रकार के नवाचारों का प्रयोग करना व किताबें पढ़ना रूचि पैदा की जा रही है।
प्रतियोगिता में अव्वल आ रहे छात्र, खुद हुए सम्मानित
कंपोजिट विद्यालय लेजार महदेवा के शिक्षक अंबिका प्रसाद को वर्ष 2025-26 में नवाचारी शिक्षा रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया था। 2025 में उत्कृष्ट शिक्षक का पुरस्कार लखनऊ में मिला। उन्होंने बताया कि विगत चार वर्षो में 20 बच्चे राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में चयनित हुए। विद्यालय के बच्चे प्रत्येक वर्ष खेलकूद प्रतियोगिता में ब्लॉक, जिला व मंडल सहित प्रदेश स्तरीय तक अपना स्थान बना रहे हैं। बच्चों को प्रतियोगिता परीक्षा जैसे कि नवोदय विद्यालय, विद्या ज्ञान, इंस्पायर अवार्ड, राष्ट्रीय आविष्कार अभियान एवं राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में सफलता हासिल कर रहे हैं।
रीडिंग कॉर्नर से बदली तस्वीर, किताबों से दोस्ती कर रहे नौनिहाल
परतावल विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय दमका टोला में प्रधानाध्यापिका डॉ. अनामिका की पहल से बच्चों में पुस्तकों के प्रति नई रुचि विकसित हो रही है। विद्यालय के कक्षों और विभिन्न कोनों को आकर्षक रीडिंग कॉर्नर के रूप में विकसित किया गया है। रीडिंग कॉर्नर में कहानी, नैतिक शिक्षा और ज्ञानवर्धक पुस्तकों की भरमार है। डॉ. अनामिका ने बताया कि विद्यालय के पुस्तकालय के लिए कुछ पुस्तकें शिक्षा विभाग से प्राप्त हुई है जबकि कई पुस्तकें उन्होंने स्वयं खरीदकर उपलब्ध कराई हैं। बच्चों की रुचि बढ़ाने के लिए विद्यालय में अनुपयोगी पड़े टूटे कैरम बोर्ड का भी रचनात्मक उपयोग किया गया है। उस पर शिक्षण सामग्री तैयार कर सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाया गया है।
11 साल में छह गुना हो गए छात्र, अपनी सैलरी से खरीदा डेस्क बेंच
प्राथमिक विद्यालय हरखा के प्रधानाध्यापक को साल 2015 में जब विद्यालय में तैनाती मिली तो उस वक्त विद्यालय में छात्रों की संख्या इकाई में थी। 11 साल बाद स्कूल की तस्वीर बदल चुकी है और आज की तारीख में छात्रों की संख्या 85 पर पहुंच चुकी है। स्कूल में डेस्क बेंच नहीं था तो उन्होंने अपनी सैलरी से डेस्क बेंच खरीदा। खेल पर जोर दिया तो साल 2020 में स्कूल की छात्रा आरती राजभर ने दौड़ व लांग जंप में जिला चैंपियन बनी थी। आज स्कूल में प्रोजेक्टर से क्लास चलाई जाती है।
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महराजगंज। यदि बेहतर शिक्षक मिल जाए तो छात्र एक नहीं सफलता की कई सीढ़ियों को आसानी से चढ़ सकता है। शिक्षक छात्रों की ही नहीं स्कूल की भी तस्वीर बदल सकता है। जिले में भी कुछ ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने सरकारी स्कूलों की सूरत बदल दी और छात्रों को बेहतर शिक्षा दे रहे हैं।
जनपद में कई शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और त्याग की बदौलत परिषदीय विद्यालयों में संसाधनों में बढ़ोतरी तो की ही। शिक्षा का स्तर भी बेहद उम्दा कर दिया। इसके नतीजे भी सामने आए। सुविधाएं और मार्गदर्शन मिलने के बाद इन स्कूलों के बच्चों ने शिक्षा के साथ-साथ खेल के स्तर पर भी विद्यालय का नाम रौशन किया।
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कंपोजिट विद्यालय में स्मार्ट क्लास की सुविधा
फरेंदा के कंपोजिट विद्यालय भगवतनगर परसिया के प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार गौड़ जब साल 2011 में विद्यालय को ज्वाइन किए तो स्कूल में कुल 132 छात्र थे। आज की तारीख में ये संख्या बढ़कर 215 पर पहुंच चुकी है। विद्यालय में स्मार्ट क्लास व कंम्प्यूटर कक्षाएं चलाई जाती हैं। विद्यालय में नवाचार से कई छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर मुकाम हासिल कर चुके हैं। इन्हें नवाचार की बदौलत वर्ष 2012 में मंडल स्तरीय नवाचार कार्यशाला में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का पुरस्कार मिला।
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पांच साल में 35 से बढ़कर हो गए 303 छात्र
कंपोजिट विद्यालय मधवापुर में शिक्षक प्रदुम्न कुमार सिंह पढ़ाई के साथ छात्रों में हमेशा कुछ नया करने की सीख देते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में मथुरानगर में तैनाती मिली। उस समय छात्रों की संख्या 35 थी लेकिन 2013 में 303 छात्र हो गए। वहां से त्रिमुहानी बैरियर टोला के प्राथमिक विद्यालय पर स्थानान्तरण हुआ। वर्ष 2017 में वनटांगिया गांव भारीवैसी नर्सरी पहुंचा तो बिना छत का विद्यालय मिला। वहां सात वर्ष रहने के बाद छात्रों की संख्या 313 हो गई। 2025 में बीएसए ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। छात्रों को नियमित नया करने की सीख दी जाती है।
छात्रों को नवाचार का प्रयोग करना सीखा रहे अजय कुमार
कंपोजिट विद्यालय छितही बुजुर्ग के शिक्षक अजय कुमार कुशवाहा शिक्षा के साथ खेलकूद, स्मार्ट क्लास, कम्प्यूटर कक्षा संचालित कर बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर रहे है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में विद्यालय में पहुंचा तो छात्रों की संख्या 256 थी जो अब 556 हो गई है। विद्यालय के छात्र जनपदस्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में विजेता बनकर मंडलस्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित हुए। पिछले वर्ष विद्यालय की छात्रा राष्ट्रीय आविष्कार अभियान में चयनित हुई। विद्यालय में विभिन्न प्रकार के नवाचारों का प्रयोग करना व किताबें पढ़ना रूचि पैदा की जा रही है।
प्रतियोगिता में अव्वल आ रहे छात्र, खुद हुए सम्मानित
कंपोजिट विद्यालय लेजार महदेवा के शिक्षक अंबिका प्रसाद को वर्ष 2025-26 में नवाचारी शिक्षा रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया था। 2025 में उत्कृष्ट शिक्षक का पुरस्कार लखनऊ में मिला। उन्होंने बताया कि विगत चार वर्षो में 20 बच्चे राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में चयनित हुए। विद्यालय के बच्चे प्रत्येक वर्ष खेलकूद प्रतियोगिता में ब्लॉक, जिला व मंडल सहित प्रदेश स्तरीय तक अपना स्थान बना रहे हैं। बच्चों को प्रतियोगिता परीक्षा जैसे कि नवोदय विद्यालय, विद्या ज्ञान, इंस्पायर अवार्ड, राष्ट्रीय आविष्कार अभियान एवं राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में सफलता हासिल कर रहे हैं।
रीडिंग कॉर्नर से बदली तस्वीर, किताबों से दोस्ती कर रहे नौनिहाल
परतावल विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय दमका टोला में प्रधानाध्यापिका डॉ. अनामिका की पहल से बच्चों में पुस्तकों के प्रति नई रुचि विकसित हो रही है। विद्यालय के कक्षों और विभिन्न कोनों को आकर्षक रीडिंग कॉर्नर के रूप में विकसित किया गया है। रीडिंग कॉर्नर में कहानी, नैतिक शिक्षा और ज्ञानवर्धक पुस्तकों की भरमार है। डॉ. अनामिका ने बताया कि विद्यालय के पुस्तकालय के लिए कुछ पुस्तकें शिक्षा विभाग से प्राप्त हुई है जबकि कई पुस्तकें उन्होंने स्वयं खरीदकर उपलब्ध कराई हैं। बच्चों की रुचि बढ़ाने के लिए विद्यालय में अनुपयोगी पड़े टूटे कैरम बोर्ड का भी रचनात्मक उपयोग किया गया है। उस पर शिक्षण सामग्री तैयार कर सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाया गया है।
11 साल में छह गुना हो गए छात्र, अपनी सैलरी से खरीदा डेस्क बेंच
प्राथमिक विद्यालय हरखा के प्रधानाध्यापक को साल 2015 में जब विद्यालय में तैनाती मिली तो उस वक्त विद्यालय में छात्रों की संख्या इकाई में थी। 11 साल बाद स्कूल की तस्वीर बदल चुकी है और आज की तारीख में छात्रों की संख्या 85 पर पहुंच चुकी है। स्कूल में डेस्क बेंच नहीं था तो उन्होंने अपनी सैलरी से डेस्क बेंच खरीदा। खेल पर जोर दिया तो साल 2020 में स्कूल की छात्रा आरती राजभर ने दौड़ व लांग जंप में जिला चैंपियन बनी थी। आज स्कूल में प्रोजेक्टर से क्लास चलाई जाती है।