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Maharajganj News: ऑनलाइन ओपीडी बनाने की व्यवस्था धराशायी, जिम्मेदार बेखबर

Thu, 15 Aug 2024 03:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Thu, 15 Aug 2024 03:37 AM IST
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System for making online OPD collapsed, responsible unaware
जिला अस्पताल में कंप्यूटर से पर्ची काटते कर्मी।
महराजगंज। जिला अस्पताल में पेपरलेस ओपीडी बनाने का सपना धराशायी हो गया है। ऑफलाइन काम हो रहा है। अस्पताल परिसर वाईफाई से लैस हो चुका है। इसमें ज्यादतर काम नहीं हुए हैं। डॉक्टर भी प्रशिक्षण लेकर खामोश हैं। ऑफलाइन व्यवस्था के बीच मरीजों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। कभी-कभी तो पर्ची काउंटर पर घंटों मरीजों को कतार में खड़े रहना पड़ता है। यही हाल डॉक्टर कक्ष के सामने रहता है।
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जानकारी के अनुसार, करीब दो साल पहले दो डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिलाने के बाद जिम्मेदारों ने इधर से नजरें फेर ली। इस दिशा में कुछ खास पहल नहीं की जा रही है। दो काउंटरों पर कंप्यूटर से पर्ची कटती है। पूरे परिसर को वाईफाई से युक्त कर दिया गया है। अन्य जरूरी संसाधन मंगाने की दिशा में कोई पहल नहीं होने से आज भी मरीजों को पर्चा लेकर इधर-उधर भटकना पड़ता है।
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ओपीडी की पर्ची से लेकर दवा लिखने, जांच रिपोर्ट देने से लेकर अन्य काम ऑनलाइन देने की तैयारी की गई थी, लेकिन यह व्यवस्था अब तक पूरी तरह से प्रभावी नहीं हो सकी है। आज भी मरीज पर्ची लेकर डॉक्टरों के कक्ष के सामने खड़े रहते हैं। योजना के तहत सभी डॉक्टरों व कर्मियों का प्रशिक्षण होना है, लेकिन एक साल पहले दो डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिलाने के बाद किसी ने ध्यान नहीं दिया। नेटवर्किंग पूरे अस्पताल में कराया जा चुका है। प्रिंटर भी जिला अस्पताल को मिले हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 900 मरीज इलाज कराने आते हैं।
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शास्त्री नगर निवासी जयहिंद यादव ने बताया कि पर्ची कटाने से लेकर इलाज कराने तक घंटे भर से ज्यादा वक्त लग जाता है। ऑनलाइन व्यवस्था यहां पूरी तरह से काम नहीं कर रही है। ऑनलाइन प्रशिक्षण लेने वाले डॉ. एवी त्रिपाठी ने बताया कि प्रशिक्षण मिल चुका है। आने वाले दिनों में व्यवस्था संचालित होगी।

सीएमएस डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि जरूरी प्रक्रिया धीरे-धीरे पूरी की जा रही है। वाईफाई की व्यवस्था हो चुकी है। अन्य कार्य कराए जा रहे हैं।

आभा एप से जोड़ने की व्यवस्था भी नहीं बढ़ पा रही आगे
आभा एप से जोड़ने की व्यवस्था भी आगे नहीं बढ़ पा रही है। अब तक 12 से 15 मरीज ही इससे जुड़ पाए हैं। इससे मरीजों को ऑनलाइन सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। इस एप की खासियत यह है इस पर एक बार मरीजों का रजिस्ट्रेशन हो जाता है तो उसके बाद मरीज की पूरी हिस्ट्री एप पर मौजूद रहेगी। दोबारा मरीज जब भी अस्पताल आएगा तो पहले कौन सी बीमारी थी और क्या इलाज चला यह सब एप पर मौजूद रहेगा। साथ ही अस्पताल में विभिन्न बीमारियों की जांच रिपोर्ट भी ऑनलाइन मिलेगी। इसके लिए मरीज को पैथोलॉजी जाने की जरूरत नहीं होगी। पर्चा बनवाने के लिए लाइन में भी नहीं लगना पड़ेगा। क्यूआर कोड से तुरंत पर्चा बन जाएगा।
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