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अस्पताल में सर्जन नहीं, आपरेशन कराने में जेब ढीली

Thu, 07 Jul 2022 12:48 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 07 Jul 2022 12:48 AM IST
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Surgen not available in Hospital
अस्पताल में नहीं है सर्जन, ऑपरेशन कराने में हो रही जेब ढीली
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महराजगंज। जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सर्जन तैनात होना चाहिए, लेकिन सभी सीएचसी पर सर्जन तैनात नहीं हैं। मरीजों को जिला अस्पताल, अन्य सीएचसी या मेडिकल कालेज कॉलेज ऑपरेशन कराने जाना पड़ता है। तमाम मरीज तो निजी अस्पतालों में ऑपरेशन कराते हैं, जिससे उन्हें मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। 15 में से सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सर्जन नहीं हैं, जबकि आठ पर सर्जन की तैनाती है, वह भी समय से नहीं मिलते हैं। लोगों को विवश होकर निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है।
जानकारी के अनुसार करीब एक लाख की आबादी पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सदर, मिठौरा, गोपाला, घुघली, परतावल, फरेंदा एवं नौतनवां में सर्जन की तैनाती नहीं है। यहां आने वाले मरीजों को जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ऑपरेशन कराने के लिए जाना पड़ता है। ज्यादातर लोग निजी अस्पतालों में मोटी रकम खर्च कर ऑपरेशन कराते हैं। नियम के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सर्जन की तैनाती होनी चाहिए। लंबे समय से रिक्त पदों को भरने की दिशा में कुछ खास पहल नहीं हुईं। गौनरिया राजा के रहने वाले मनीष कुमार कहते हैं कि जहां सर्जन तैनात हैं, वह अस्पताल में समय से नहीं मिलते हैं, ऐसे में परेशानी होती है।
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इस सीएचसी पर सर्जन की तैनाती है
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रतनपुर में डॉ. शिवम यादव, अड्डा बाजार में डॉ. शाश्वत, लक्ष्मीपुर में जयनेंद्र, बृजमनगंज में डॉ. मुकेश, निचलौल में डॉ. उमेश, सिसवा में डॉ. दयानंद, मंसूरगंज में डॉ. रणविजय, धानी में डॉ. देवेंद्र की तैनाती है।
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केस नंबर एक- सिंदुरिया गांव के रहने वाले मुमताज ने बताया कि दो माह पहले दुर्घटना में घायल होने पर पैर में घाव हो गया। जांच कराने पर पता चला की ऑपरेशन कराना पड़ेगा। करीब 50 हजार रुपये खर्च कर महराजगंज एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन और दवा कराया, इसके बाद पैर ठीक हुआ।
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केस नंबर दो- पतरेंगवां टोला शीतलापुर के ढोढ़े साहनी ने बताया कि पत्नी पूनम के कंधे का ऑपरेशन कराना था। सरकारी अस्पताल का चक्कर लगाया तो पता चला डॉक्टर कब मिलेंगे कोई गारंटी नहीं है, ऐसे में निजी अस्पताल में ऑपरेशन कराया। करीब एक लाख रुपये खर्च हुए। सरकारी अस्पताल में सुविधा मिली होती तो रकम खर्च नहीं होता।

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चिकित्सकों की तैनाती शासन स्तर से होती है। जिले में जहां सर्जन तैनात हैं, वहां मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज किया जाता है। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की हर संभव कोशिश की जा रही है।
डॉ. आईए अंसारी, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी
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