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शिक्षा- अभियान की खबर

Sun, 03 Apr 2022 12:12 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2022 12:12 AM IST
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Stdents has been normal from Corona period
कोरोना काल में हुए अवसाद से उबर रहे विद्यार्थी
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महराजगंज। कोविड काल में जिले के लगभग 3,000 विद्यालयों की बेपटरी हुई शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर मौलिक रुप से गति पकड़ने लगी है। कोरोना काल में लंबे समय तक विद्यालय बंद रहने से तमाम विद्यार्थी अवसाद का शिकार हो गए थे। इसे देखते हुए परिषदीय हो या निजी शिक्षण संस्थान, लगभग सात लाख विद्यार्थियों को शारीरिक रुप से स्वस्थ व मजबूत बनाने का कार्य शुरु किया है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें विपत्तियों के दौरान धैर्य को बनाए रखते हुए बचाव के प्रयत्न को अपनाने के लिए भी लगातार प्रेरित किया जा रहा है। इससे जहां उनके मन में व्याप्त भय दूर हो रहा है, वहीं वे अवसाद से भी उबर रहे हैं।
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इन तौर-तरीकों से विद्यार्थियों की बदली गई मनोदशा
- शिक्षण संस्थानों में खेल से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की पहल
- विद्यार्थियों को व्यस्त रखने के लिए शैक्षिक व अन्य गतिविधियों में व्यस्त रखने की प्रेरणा
- नियमित रुप से योग से जोड़ने की कवायद, पाठ्यक्रम का घटाव
- सांस्कृतिक, प्रतियोगात्मक आयोजनों से व्यस्त रखने की कोशिश
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घर के अंदर बंद रहने की वजह से विद्यार्थियों के मन-मस्तिष्क पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। अब जबकि खुले हालात मिले हैं तो उन्हें बेहतर खानपान, बेहतर दिनचर्या, योग व व्यायाम से जोड़कर उन्हें शारीरिक व मानसिक रुप से तैयार करने की जरुरत है। इस कार्य में शिक्षकों व अभिभावकों की भूमिका अत्यंत अहम है।
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डॉ. मेधा विश्वनाथ, मनोचिकित्सक
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विद्यार्थियों की खराब हो रही मानसिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए उन्हें रुचिपूर्ण पाठ्यक्रमों व अन्य शैक्षिक कार्यों में व्यस्त रखने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही कोविड से बचाव के पूरे तौर-तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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डॉ. अमित कुमार गोंड़, प्रवक्ता समाज शास्त्र, राजकीय महाविद्यालय
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कोरोना की वजह से भविष्य के खराब होने को लेकर घबराहट होने लगती थी। आनलाइन शिक्षा में बहुत से बिंदु समझ में नहीं आते थे। विद्यालय खुला तो शिक्षकों का बेहतर सहयोग मिला, इससे न सिर्फ पाठ्यक्रम को समझने व पूरा करने में मदद मिला, बल्कि किसी भी कठिन हालात से निपटने की प्रेरणा भी मिली।

आदित्य मद्देशिया , छात्र
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कोरोना की वजह से बच्चों की शिक्षा में जो मजबूती होनी चाहिए थी, वह नहीं है। खेल, संगीत के साथ-साथ मनोरंजक गतिविधियों से छोट बच्चों को शिक्षित करते हुए उन्हें मानसिक रुप से मजबूत बनाने का प्रयास जारी है।
पुष्पा, अभिभावक
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जिले में संस्थान व अध्ययनरत विद्यार्थियों की स्थिति
परिषदीय विद्यालय-------1700, विद्यार्थी- लगभग ढाई लाख
निजी विद्यालय------------लगभग 800, विद्यार्थी-- दो लाख
माध्यमिक स्तर के विद्यालय- लगभग 400- डेढ़ लाख
उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थान--- लगभग 100, विद्यार्थी- लगभग एक लाख
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