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Maharajganj News: जंगली सुअरों पर तस्करों की नजर, नेपाल पहुंचा रहे मांस
Tue, 08 Apr 2025 01:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 08 Apr 2025 01:03 AM IST
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महराजगंज/निचलौल। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के जंगलों में मिलने वाले सुअरों के मांस की मांग नेपाल राष्ट्र में बढ़ गई है। ऐसे में तस्कर सुअरों का शिकार कर मांस चोरी-छिपे नेपाल भेजने लगे हैं। क्योंकि नेपाल में इसकी अच्छी कीमत मिल जाती है।
इतना ही नहीं यहां पर तस्करों के लिए ज्यादा जोखिम भी नहीं रहता है। बीते 13 मार्च को जंगल में सुअर का शिकार कर झाड़ियों के बीच मांस काटते कुशीनगर जिले के दो आरोपी पकड़े गए थे।
सूत्रों की माने तो तस्कर नेपाल के सीमावर्ती गांवों तक झोले में रखकर सुअर का मांस ले जाते हैं। वहां से परासी, बर्धघाट, बुटवल समेत नारायणघाट व काठमांडों तक इसे पहुंचाया जाता है। नेपाल में तस्कर इसे 500 से 600 रुपये प्रति किलो की दर से बेचते हैं। नेपाल सीमा के अंदर दूरी बढ़ने पर रेट भी बढ़ता जाता है। सूत्रों की माने तो मांग के हिसाब से रेट घटता बढ़ता रहता है। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के निचलौल, मधवलिया, चौक, लक्ष्मीपुर, पकड़ी, शिवपुर सहित अन्य वन क्षेत्र जंगली जानवरों के साथ ही बहुमूल्य वन संपदाओं से भरा हुआ है। ऐसे में विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते यहां पर तस्कर काफी सक्रिय हैं। बीते दिनों हुई वारदातों पर नजर डाले तो पता चलेगा कि लकड़ी कटान, अवैध खनन के साथ ही सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के जंगलों में सुअर के मांस की तस्करी भी बढ़ चुकी है।
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सूत्रों की माने तो निचलौल वन रेंज के चरगहां वीट मदनपुर कंपार्ट संख्या एक के गैनही जंगल में शिकार करने वाले गिरफ्तार आरोपी काफी समय से सुअर का शिकार करते थे। आरोपी जंगली सूअर का शिकार करने के बाद झाड़ियों के बीच मांस को काट लेते थे। फिर मांस को झोले में रखकर आसानी से बाॅर्डर पारकर नेपाल भेज देते हैं। शिकारियों के गिरोह में भारत नेपाल बाॅर्डर से सटे गांव से लेकर कुशीनगर जिले के भी शख्स शामिल रहते हैं। अक्सर जंगलों में सूअर का शिकार करने की आवाज आती थी। कुछ समय बाद शांत भी हो जाती थी।
शिकारियों के जाल में कई बार फंस जाते हैं तेंदुए: जंगली सुअरों का शिकार करने के लिए शिकारियों की ओर से लगाए जाने वाले जाल और जंजीर में कई बार तेंदुए भी फंस जाते हैं। गनीमत रहता है कि वन कर्मियों की सक्रियता से फंसे तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू कर जान बचा लिया जाता है।
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इतना ही नहीं यहां पर तस्करों के लिए ज्यादा जोखिम भी नहीं रहता है। बीते 13 मार्च को जंगल में सुअर का शिकार कर झाड़ियों के बीच मांस काटते कुशीनगर जिले के दो आरोपी पकड़े गए थे।
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सूत्रों की माने तो तस्कर नेपाल के सीमावर्ती गांवों तक झोले में रखकर सुअर का मांस ले जाते हैं। वहां से परासी, बर्धघाट, बुटवल समेत नारायणघाट व काठमांडों तक इसे पहुंचाया जाता है। नेपाल में तस्कर इसे 500 से 600 रुपये प्रति किलो की दर से बेचते हैं। नेपाल सीमा के अंदर दूरी बढ़ने पर रेट भी बढ़ता जाता है। सूत्रों की माने तो मांग के हिसाब से रेट घटता बढ़ता रहता है। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के निचलौल, मधवलिया, चौक, लक्ष्मीपुर, पकड़ी, शिवपुर सहित अन्य वन क्षेत्र जंगली जानवरों के साथ ही बहुमूल्य वन संपदाओं से भरा हुआ है। ऐसे में विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते यहां पर तस्कर काफी सक्रिय हैं। बीते दिनों हुई वारदातों पर नजर डाले तो पता चलेगा कि लकड़ी कटान, अवैध खनन के साथ ही सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के जंगलों में सुअर के मांस की तस्करी भी बढ़ चुकी है।
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सूत्रों की माने तो निचलौल वन रेंज के चरगहां वीट मदनपुर कंपार्ट संख्या एक के गैनही जंगल में शिकार करने वाले गिरफ्तार आरोपी काफी समय से सुअर का शिकार करते थे। आरोपी जंगली सूअर का शिकार करने के बाद झाड़ियों के बीच मांस को काट लेते थे। फिर मांस को झोले में रखकर आसानी से बाॅर्डर पारकर नेपाल भेज देते हैं। शिकारियों के गिरोह में भारत नेपाल बाॅर्डर से सटे गांव से लेकर कुशीनगर जिले के भी शख्स शामिल रहते हैं। अक्सर जंगलों में सूअर का शिकार करने की आवाज आती थी। कुछ समय बाद शांत भी हो जाती थी।
शिकारियों के जाल में कई बार फंस जाते हैं तेंदुए: जंगली सुअरों का शिकार करने के लिए शिकारियों की ओर से लगाए जाने वाले जाल और जंजीर में कई बार तेंदुए भी फंस जाते हैं। गनीमत रहता है कि वन कर्मियों की सक्रियता से फंसे तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू कर जान बचा लिया जाता है।