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Maharajganj News: सुबह शाम दिख रहा धुंध, निर्माण से उड़ने वाली धूल सेहत के लिए खतरनाक

Sun, 17 Nov 2024 01:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Sun, 17 Nov 2024 01:41 AM IST
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Smog visible in the morning and evening, dust blown from construction is dangerous for health
महराजगंज। सर्दी और मौसम में नमी बढ़ने के साथ ही लोगों की मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं। आसमान में नमी होने के कारण प्रदूषक ऊपर नहीं जा रहे हैं, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। नमी बढ़ने के साथ ही प्रदूषण का स्तर अब मध्यम से खराब की तरफ बढ़ने लगा है। विशेषज्ञों की मानें तो इससे लोगों की सेहत पर असर पड़ना तय है। दिवाली के आसपास प्रदूषण की मात्रा में ज्यादा बढ़ोतरी हुई थी। इस समय एक्यूआई 158 दर्ज किया गया है, यह स्तर सांस के रोगियों के लिए ठीक नहीं है। दूसरी ओर निर्माण कार्यों के दौरान उड़ रही धूल के कारण भी परेशानी बढ़ी है।
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शनिवार को शहर में सुबह नियमित टहलने जाने वाले लोग स्मॉग से परेशान रहे। धुंध होने और आसपास पराली जलने के कारण आंखों में जलन की समस्या से भी सुबह टहलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा। राम मनोहर लोहिया पार्क में मिले, जितेंद्र प्रसाद ने बताया कि इधर चार-पांच दिनों से आंखों में जलन की समस्या हो रही है। अगर कुछ दिन ऐसे ही रहा तो डॉक्टर से जांच कराना पड़ेगा। इसी तरह से राधेश्याम तिवारी टहलते हुए मिले। उन्होंने बताया कि सांस लेने में दिक्कत हो रही है। ऐसे लगा रहा है कि बढ़ते प्रदूषण के वजह से यह सब समस्या हो रही है।
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धूल से हो रही समस्या, रुक-रुककर लग रहा जाम

नौतनवा कस्बे के बनौलिया चौराहे ओवरब्रिज बनने से आसपास धूल के गुबार से परेशानी हो रही है। रुक-रुककर अक्सर जाम लग जाता है। धूल उड़ने से लोगों को सांस की दिक्कत हो रही है। राहगीर उमाशंकर यादव, गोपाल जायसवाल ने बताया कि एक वर्ष से अधिक समय बीत गया, लेकिन अबतक ओवरब्रिज का काम पूरा नहीं हुआ है। कभी-कभी जाम हो जाता है। यहां रास्ता गोरखपुर से सोनौली और दूसरा नौतनवा से खनुआ की ओर जाता है। रास्ता बंद करके एक तरफ मोड़ कर रास्ता खोला गया है। कुनसेरवा बाईपास चौराहा फ्लाईओवर, छपवा बाई फ्लाईओवर का काम तेजी से चल रहा है। निर्माण होने धूल हमेशा उड़ती रहती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में एक्यूआई 160 दर्ज किया गया है।
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धूल से दुकानों में रखे सामान हो जाते खराब
गोरखपुर-सोनौली हाईवे पर भैया फरेंदा के पास पुल बन रहा है। किनारे से जाने के लिए रास्ता तो बना है, लेकिन धूल उड़ने से आसपास की दुकानों में सामान खराब हो जा रहे हैं। उसे ठीक करने में दुकानदारों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। इस मार्ग पर धूल उड़ने की समस्या के अलावा आने-जाने में समय भी लग रहा है। नरेश से बताया कि कम से कम तीन चार बार टैंकर के जरिए सर्विस लेन सड़क पर पानी डालना चाहिए, तभी धूल से राहत मिल पाएगी। गोरखपुर और सोनौली के बीच की दूरी 98 किमी है। सड़क मार्ग से दूरी 96.6 किमी है। वर्तमान में इस रूट से आवागमन में समस्या हो रही है। इस फोरलेन पर 19 स्थानों पर अंडरपास बन रहा है। पुरंदरपुर के प्रवेश जायसवाल ने बताया कि उनका हमेशा आना-जाना लगा रहता है। हालत यह है कि धूल के कारण सांस लेने में समस्या होने लगी है। बीते दिन जांच कराई थी, अधिक दिनों तक ऐसे ही रहा तो समस्या बढ़ जाएगी। धूल के कारण सांस रोगियों को मुश्किल हो रही है। संपतिहा के नरेश तिवारी कहते हैं कि आंखों में चुनचुनाहट के साथ सांस की समस्या से लोग पीड़ित हो रहे हैं। सड़क पर पानी गिराने के नाम पर औपचारिकता पूरी की जा रही है।
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ठंड के कारण हवा की गति धीमी

जवाहर लाल नेहरू पीजी काॅलेज के भूगोल विभागाध्यक्ष दिवाकर सिंह ने बताया कि सर्दियों के आगमन के साथ ही प्रदूषक तत्व वातावरण में ऊपर उठने के बजाए सतह के करीब रुक जाते हैं। ठंड के कारण हवा की गति धीमी हो जाती है, जिससे प्रदूषक हवा में लंबे समय तक बने रहते हैं। इसकी वजह से एक्यूआई बढ़ता है। दूसरी ओर से निर्माण कार्यों की वजह से भी समस्या बढ़ रही है। बीते 15 दिनों की एक्यूआई पर नजर डालें तो यह 100 के नीचे नहीं आया है।

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एक्यूआई 50 के नीचे, तभी राहत
एक्यूआई का स्तर 0 से 50 के बीच ही अच्छा माना जाता है। हवा की गुणवत्ता इससे ज्यादा खराब हुई तो एक्यूआई के साथ मुश्किलें भी बढ़ने लगतीं हैं। 51 से 100 का स्तर संतोषजनक माना जाता है। इस दौरान सांस लेने में मामूली सी परेशानी हो सकती है। एक्यूआई 100 से 200 के बीच पहुंचने पर फेफड़े, अस्थमा व हृदय रोग वाले लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। 201 से 300 खराब श्रेणी में आता है। लंबे समय तक संपर्क में रहने पर अधिकांश लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो जाती है। 301 से 400 के बीच बहुत खराब श्रेणी में आता है। इससे श्वसन संबंधी बीमारी होने का खतरा हो जाता है। 401 से 500 गंभीर श्रेणी में आता है। यह स्वस्थ लोगों को प्रभावित करता है। वहीं बीमार लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
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आंखों में जलन, सांस लेने की दिक्कत वाले मरीज बढ़े
महराजगंज। दिवाली के बाद से जिला अस्पताल में सांस, आंख में जलन वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। पहले ऐसे मरीज कम आते थे, लेकिन इस एक सप्ताह से ओपीडी में इन समस्या से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
आयुष विभाग के डॉ. अनिल कुमार बताते हैं कि वातावरण में बदलाव के कारण सांस वाले मरीज आ रहे हैं। पहले आठ से 10 आते थे, लेकिन इन दिनों में 20 से 25 मरीज प्रत्येक दिन आ रहे हैं। उनको जरूरी दवा के जांच कराई जा रही है। नेत्र रोग विशेष डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि आंखों में जलन वाले मरीज पहले 15-16 आते थे, लेकिन अब तो 25 से अधिक मरीज प्रत्येक दिन आ रहे हैं। उनको ड्राॅप देने के साथ ही बचाव का तरीका भी बताया जा रहा है। असल में जिसे लोग कोहरा समझ रहे हैं, वह प्रदूषण का असर है। सुबह टहलने के दौरान सचेत रहने की जरूरत है। संवाद
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