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Maharajganj News: जमीन विवाद में हत्या के छह दोषियों को 8-8 साल की सजा
Sun, 04 Aug 2024 04:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 04 Aug 2024 04:01 AM IST
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महराजगंज। पनियरा क्षेत्र के माधोपुर गांव में 25 साल पहले जमीन के लिए हुई हत्या में अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार श्रीवास्तव ने छह दोषियों को आठ-आठ वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 40-40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
जानकारी के अनुसार, पनियरा क्षेत्र के माधोपुर निवासी रामसमुझ पांडे का गांव के ही रामहरख से आबादी की जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद था। रामसमुझ पांडेय उस जमीन पर अपना दावा करते थे, जिसे रामहरख पासी ने कब्जा कर लिया था। बताया जाता है कि 23 जुलाई 1999 की सुबह रामहरख पासी विवादित जमीन के शेष बचे भू-भाग को भी मिट्टी डालकर कब्जा कर रहा था। उस समय रामसमुझ के घर में केवल महिलाएं और बच्चियां थीं।
जमीन के कब्जे को मना करने गई रामसमुझ के परिवार की सरोज पांडेय व विंध्यवासिनी पांडे को रामहरख, राधेश्याम, प्रदीप ने गाली देते हुए मारपीट कर घायल कर दिया। लड़कियां घर में छिपकर किसी तरह अपनी जान बचाईं। घायल सरोज पांडेय व विंध्यवासिनी पांडेय जब अपना इलाज करा कर शाम को वापस घर आईं, तब फिर से हमलावर रामहरख, राधेश्याम व प्रदीप अपने अन्य साथियों रामसकुल निवासी ग्राम जिनवापुर जिला गोरखपुर, हरिशंकर, दुर्गेश व अवधेश निवासी ग्राम जर्दी थाना पनियरा, अशोक कुमार निवासी ग्राम रामगढ़ थाना पनियरा को बुलाकर गोलबंद होकर सरोज पांडेय व विंध्यवासिनी पांडेय पर लाठी से हमला कर दिया।
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अपने परिवार की बच्चियों को बचाने गए रामअनुज पांडेय व रामसमुझ पांडेय को भी हमलावरों ने लाठी-डंडे से बुरी तरह से पीटा। इससे रामसमुझ को गंभीर चोटें आईं। बाद में इलाज के दौरान 27 जुलाई 1999 को रामसमुझ पांडेय की मौत हो गई। इसबीच मुकदमे के परीक्षण के दौरान दो अभियुक्तों रामहरख व हरिशंकर की मौत हो गई। अभिलेखीय साक्ष्यों व गवाहों को न्यायालय समक्ष प्रस्तुत कर जीवित बचे छह आरोपितों के विरुद्ध सजा की मांग की गई।
अपर सत्र न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष व बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद राधेश्याम, प्रदीप, रामसकुल, दुर्गेश, अवधेश व अशोक कुमार को आठ-आठ वर्ष के सश्रम कारावास व प्रत्येक को 40-40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
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जानकारी के अनुसार, पनियरा क्षेत्र के माधोपुर निवासी रामसमुझ पांडे का गांव के ही रामहरख से आबादी की जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद था। रामसमुझ पांडेय उस जमीन पर अपना दावा करते थे, जिसे रामहरख पासी ने कब्जा कर लिया था। बताया जाता है कि 23 जुलाई 1999 की सुबह रामहरख पासी विवादित जमीन के शेष बचे भू-भाग को भी मिट्टी डालकर कब्जा कर रहा था। उस समय रामसमुझ के घर में केवल महिलाएं और बच्चियां थीं।
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जमीन के कब्जे को मना करने गई रामसमुझ के परिवार की सरोज पांडेय व विंध्यवासिनी पांडे को रामहरख, राधेश्याम, प्रदीप ने गाली देते हुए मारपीट कर घायल कर दिया। लड़कियां घर में छिपकर किसी तरह अपनी जान बचाईं। घायल सरोज पांडेय व विंध्यवासिनी पांडेय जब अपना इलाज करा कर शाम को वापस घर आईं, तब फिर से हमलावर रामहरख, राधेश्याम व प्रदीप अपने अन्य साथियों रामसकुल निवासी ग्राम जिनवापुर जिला गोरखपुर, हरिशंकर, दुर्गेश व अवधेश निवासी ग्राम जर्दी थाना पनियरा, अशोक कुमार निवासी ग्राम रामगढ़ थाना पनियरा को बुलाकर गोलबंद होकर सरोज पांडेय व विंध्यवासिनी पांडेय पर लाठी से हमला कर दिया।
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अपने परिवार की बच्चियों को बचाने गए रामअनुज पांडेय व रामसमुझ पांडेय को भी हमलावरों ने लाठी-डंडे से बुरी तरह से पीटा। इससे रामसमुझ को गंभीर चोटें आईं। बाद में इलाज के दौरान 27 जुलाई 1999 को रामसमुझ पांडेय की मौत हो गई। इसबीच मुकदमे के परीक्षण के दौरान दो अभियुक्तों रामहरख व हरिशंकर की मौत हो गई। अभिलेखीय साक्ष्यों व गवाहों को न्यायालय समक्ष प्रस्तुत कर जीवित बचे छह आरोपितों के विरुद्ध सजा की मांग की गई।
अपर सत्र न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष व बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद राधेश्याम, प्रदीप, रामसकुल, दुर्गेश, अवधेश व अशोक कुमार को आठ-आठ वर्ष के सश्रम कारावास व प्रत्येक को 40-40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।