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Maharajganj News: चिटफंड कंपनी का खाताधारकों को झटका, सत्यापन के पेंच में रकम अटकी

Sat, 16 Sep 2023 01:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Sat, 16 Sep 2023 01:46 AM IST
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Shock to chit fund company's account holders, money stuck in verification process
निचलौल शहर स्थित एक सहज जन सेवा केंद्र पर मैसेज दिखाते विंदेश कुशवाहा। संवाद
करीब 45 हजार आवदेन जमा हुए हैं,
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मोबाइल पर आ रहा संदेश, नाम-पता है मिसमैच

महराजगंज। चिटफंड कंपनियों ने खाताधारकों को झटका दे दिया है। मोबाइल पर संदेश आ रहा की नाम-पता में गड़बड़ी है। खाताधारक इसे लेकर परेशान हैं। उन्हें कुछ समझ नहीं रहा है कि अब वे क्या करें। लोग कह रहे हैं कि चिटफंड कंपनियों की नियत में खोट नजर आ रहा है। इतना सब कुछ कराने के बाद बेवकूफ बनाया जा रहा है। जिले में करीब 45 हजार आवेदन रकम लेने के लिए जमा हुए हैं।
जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने चिटफंड कंपनी में फंसे धन को दिलाने का वादा किया था। इसके तहत पहले ऑफलाइन आवेदन मांगे गए। करीब 10 हजार लोगों ने ऑफलाइन आवेदन किया था। इसके बाद ऑनलाइन आवेदन मांगा गया, जिस पर करीब 35 हजार लोगों ने आवेदन किया। सरकार ने आवेदन के 45 दिन में धन देने का वादा तो किया, मगर इसके लिए चिटफंड कंपनी का सत्यापन होना था, जिसे कंपनी सत्यापित करने के बजाय आवेदकों को मिसमैच का मैसेज भेज रही है। यानी अब फिर आवेदकों को चिटफंड कंपनी झटका दे रही हैं।
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निचलौल शहर के रहने वाले विद्यासागर प्रजापति ने बताया कि सहारा में छोटे-छोटे कई किस्तों में खुद के नाम से रकम जमा किया था। जिसे निकालने के लिए 7 सितंबर को शहर स्थित एक सहज जन सेवा केंद्र पहुंचकर ऑनलाइन डॉक्यूमेंट जमा कराया था। लेकिन चिंता की बात यह है कि आधार कार्ड से नाम मिसमैच होने का मोबाइल पर संदेश आया है। कंपनी की ओर से आए संदेश से लग रहा है कि रकम देने के बजाय उलझाने की कोशिश की जा रही है। ऑनलाइन आवेदन विद्यासागर कुमार लिखकर किया है। इतने दिन की भागदौड़ के बाद ऐसा संदेश आना कंपनी की नियत पर सवाल खड़ा कर रहा है।
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सजह सेवा केंद्र पर सुधार कराने पहुंचे विंदेश
निचलौल शहर के कृष्णानगर के रहने वाले विंदेश कुशवाहा शुक्रवार को कस्बे में सहज सेवा केंद्र पर पहुंचे। मोबाइल पर आए संदेश को केंद्र संचालक को दिखाने लगे। उन्होंने बताया कि सब कुछ ठीक से भरा था फिर भी नाम मिसमैच बता रहा है। उन्होंने बताया कि अपने नाम से सहारा में पैसा जमा किया था। जिसको रिफंड करने के लिए 27 जुलाई को शहर के सहज जनसेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन किया था। आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज में सब कुछ ठीक है। फिर भी आवेदन करने से लेकर अब तक तीन बार मोबाइल पर मैसेज आ चुका कि पोर्टल पर अपने आवेदन को चेक कराइए। पता नहीं रकम मिलेगी भी या नहीं। प्रत्येक दिन पेंच फंसते देखकर लग रहा है कि भागदौड़ करते हुए जिंदगी गुजर जाएगी।

पत्नी बबिता के नाम से सहारा में 20 हजार रुपये जमा किया था। जिसे निकलने के लिए सहज जन सेवा केंद्र से बीते 20 अगस्त को ऑनलाइन कराया था। करीब एक सप्ताह बाद मोबाइल पर मैसेज आया की आपके आवेदन में नाम गलत है। जिसकी जानकारी होने के बाद आधार और जमा बांड को लेकर कई बार सहज जन सेवा केंद्र पर गए। उसके बाद किसी तरह से सुधार हुआ है।

प्रमोद गुप्ता, हरखोड़ा

खुद के नाम से सहारा में दो लाखा रुपये जमा किया था। जिसके भुगतान होने की उम्मीद टूट चुकी थी। सरकार के एक फैसले से जमा रकम मिलने की उम्मीद जग गई। फिर जमा रकम को वापस लेने के लिए 18 अगस्त को सभी दस्तावेजों के साथ सहज जन सेवा केंद्र पहुंचकर ऑनलाइन आवेदन कराया था। ऑनलाइन हुए करीब एक माह होने वाले हैं। अभी तक तो रकम रिफंड नहीं हुई। बल्कि मोबाइल पर कई बार पोर्टल पर आवेदन चेक कराने के लिए मैसेज आ चुके हैं।
मंजूर आलम, हिंदी मुहल्ला

कंपनियां बोरिया-बिस्तर समेटकर लापता हो गईं
जिले में एक दर्जन से अधिक चिट फंड कंपनियां खोलकर संचालकों और कर्मचारियों ने लोगों को कम समय में अधिक लाभ देने का झांसा दिया। इस चक्कर में पड़कर लोगों ने मेहनत से कमाई पूंजी जमा कराई। किसी ने बेटी की शादी तो किसी ने बच्चों की पढ़ाई, किसी ने आगे चलकर मकान बनवाने का सपना संजोया, लेकिन रुपये जमा कराने के बाद भुगतान का समय आया तो कंपनियां बोरिया-बिस्तर समेटकर लापता हो गईं। इसके बाद लोग बांड, रसीद और अन्य कागजात लेकर दर-दर भटकते रहे। लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिल सकी। शासन से निर्देश के बाद जब प्रक्रिया शुरू हुई तो तहसीलों में लाइन लगी थी। कर्मचारियों के अनुसार, इन आवेदनों में पांच हजार से लेकर दो-दो लाख तक का जिक्र है। अधिकांश ग्राहकों ने 45 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक जमा कराए हैं। एक अनुमान के अनुसार, करीब तीन करोड़ रुपये की वापसी के लिए आवेदन हो चुका है।


इन कंपनियों में जमा हुई है रकम

पियरलेस, सहारा, स्काईलैंड, कल्पतरू, जीसीए, लीला लीजिंग एंड हाउसिंग फाइनेंस, यक्ष फाइनेंस सहित एक दर्जन से अधिक कंपनियों में लोगों ने रकम जमा कराई है। इनमें उन्हीं कंपनियों के लिए ज्यादातर आवेदन आ रहे हैं, जो वर्ष 2013 के बाद खुली थीं।
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