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शिक्षक की मौत से अनाथ हुई बेटियां
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शिक्षक की मौत से अनाथ हुई बेटियां
फरेंदा (महराजगंज)। पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी संक्रमित हुए। इनमें से बहुत से लोगों ने जिंदगी की जंग जीत ली तो कुछ हार गए। बहुत से लोगों का अब भी इलाज चल रहा है। ऐसा ही दिल को झकझोर देने वाली घटना फरेंदा तहसील क्षेत्र के रतनपुर निवासी सिद्धार्थनगर में तैनात शिक्षक अश्वनी त्रिपाठी के परिवार की है। पंचायत चुनाव के प्रशिक्षण के दौरान वह 11 अप्रैल को संक्रमित हो गए थे। उनकी तबीयत बिगड़ी व सांस फूलने लगा तो परिजनों ने गोरखपुर के बांबे हॉस्पिटल में भर्ती कराया। एक सप्ताह तक चले इलाज के दौरान अस्पताल में ही 21 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी की दो वर्ष पहले मौत हो चुकी है।
शिक्षक अश्वनी त्रिपाठी की मौत के पांच दिन बाद उनके पिता सुरेश तिवारी की मौत हो गई। मां बाप का साया सिर से छिन जाने के बाद अनाथ हुईं 11 वर्षीय अपर्णा व सात वर्षीय आराध्या बाबा की मौत से बेसहारा हो गई हैं। शिक्षक की बूढ़ी मां का आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा है। बेटियों की मां की मौत के बाद पिता का सहारा था, लेकिन कुदरत के फैसले से दोनों बेसहारा हो गईं। इस विपदा में शासन से सहायता राशि न मिलने से इन बेटियों का भविष्य संकट में हो गया है। शिक्षक की मां ने बताया कि बेटे की मौत के बाद शासन-प्रशासन ने कोई सुधि नहीं ली। कोई हाल लेने भी नहीं आया। क्षेत्र के भारतेंदु मिश्र, पवन गुप्ता, विनय कुमार त्रिपाठी, महेंद्र मिश्रा, अंकुर मिश्र, कैलास नाथ मौर्या, अभिषेक पांडेय सहित अन्य लोगों ने कहा कि शिक्षकों को बिना सुविधा के चुनाव ड्यूटी में लगा देना उनके आश्रितों को जीवन भर पीड़ा देगा।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद शर्मा के नेतृत्व में प्रत्येक मृतक शिक्षक परिवार के लिए एक करोड़ रुपये की सहायता की मांग सरकार से की गई है। एक सदस्य को नौकरी व विधवा व उनके पाल्य को पेंशन की सुविधा देने की मांग लगातार की जा रही है। इसके लिए शिक्षक संघ संघर्ष के लिए तैयार है।
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केशव मणि त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
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फरेंदा (महराजगंज)। पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी संक्रमित हुए। इनमें से बहुत से लोगों ने जिंदगी की जंग जीत ली तो कुछ हार गए। बहुत से लोगों का अब भी इलाज चल रहा है। ऐसा ही दिल को झकझोर देने वाली घटना फरेंदा तहसील क्षेत्र के रतनपुर निवासी सिद्धार्थनगर में तैनात शिक्षक अश्वनी त्रिपाठी के परिवार की है। पंचायत चुनाव के प्रशिक्षण के दौरान वह 11 अप्रैल को संक्रमित हो गए थे। उनकी तबीयत बिगड़ी व सांस फूलने लगा तो परिजनों ने गोरखपुर के बांबे हॉस्पिटल में भर्ती कराया। एक सप्ताह तक चले इलाज के दौरान अस्पताल में ही 21 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी की दो वर्ष पहले मौत हो चुकी है।
शिक्षक अश्वनी त्रिपाठी की मौत के पांच दिन बाद उनके पिता सुरेश तिवारी की मौत हो गई। मां बाप का साया सिर से छिन जाने के बाद अनाथ हुईं 11 वर्षीय अपर्णा व सात वर्षीय आराध्या बाबा की मौत से बेसहारा हो गई हैं। शिक्षक की बूढ़ी मां का आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा है। बेटियों की मां की मौत के बाद पिता का सहारा था, लेकिन कुदरत के फैसले से दोनों बेसहारा हो गईं। इस विपदा में शासन से सहायता राशि न मिलने से इन बेटियों का भविष्य संकट में हो गया है। शिक्षक की मां ने बताया कि बेटे की मौत के बाद शासन-प्रशासन ने कोई सुधि नहीं ली। कोई हाल लेने भी नहीं आया। क्षेत्र के भारतेंदु मिश्र, पवन गुप्ता, विनय कुमार त्रिपाठी, महेंद्र मिश्रा, अंकुर मिश्र, कैलास नाथ मौर्या, अभिषेक पांडेय सहित अन्य लोगों ने कहा कि शिक्षकों को बिना सुविधा के चुनाव ड्यूटी में लगा देना उनके आश्रितों को जीवन भर पीड़ा देगा।
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उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद शर्मा के नेतृत्व में प्रत्येक मृतक शिक्षक परिवार के लिए एक करोड़ रुपये की सहायता की मांग सरकार से की गई है। एक सदस्य को नौकरी व विधवा व उनके पाल्य को पेंशन की सुविधा देने की मांग लगातार की जा रही है। इसके लिए शिक्षक संघ संघर्ष के लिए तैयार है।
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केशव मणि त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ