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Maharajganj News: कागज में नदी, हकीकत में नाला...हर साल छीन रहा किसानों का निवाला
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सेखुआनी बघेला नाला पुल के समीप झाड़ झंखाड़ से पटा हुआ बघेला नाला।
हर साल किसानों की डूब जाती है फसल, मानसून को देखकर बढ़ी किसानों की चिंता
ड्रोन कैमरे व लेबल मशीन से सर्वे कराने के बाद भी नहीं कराई गई नाले की सफाई
29 किलोमीटर लंबा है बघेला नाला
परसामलिक। नेपाल की पहाड़ियों से निकले बघेला नाला की सफाई नहीं होने से मानसून को करीब देखते हुए किसान चिंतित हो गए हैं। लगभग हर साल इस नाला में बाढ़ की वजह से सैकड़ों एकड़ फसल डूब जाती है। वहीं सिंचाई विभाग का कहना है कि केंद्रीय जल आयोग और राजस्व रिकॉर्ड में यह बघेल नदी के नाम से दर्ज है। इसलिए इसकी सफाई नहीं होती है।
बघेला नाला जिले के नौतनवा ब्लॉक की ग्राम पंचायत रेहरा के पास भारतीय सीमा में प्रवेश करता है। इसका प्रवाह मार्ग झाड़-झंखाड़ उग जाने से संकरा हो गया है, जिससे इसके बाढ़ का पानी सिवान में फैल कर किसानों की धान की फसल को बरबाद कर देता है। क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई विभाग ने कई बार ड्रोन कैमरे व लेबल मशीन से इसका सर्वे कराया, फिर भी इसकी सफाई नहीं कराई गई।
सीमावर्ती गांव रेहरा से आगे गंगवलिया करौता के सामने दोमुहान घाट तक बघेला नाला की लंबाई करीब 29 किलोमीटर है। बरसात के सीजन में इसकी बाढ़ से रेहरा, महुलानी, बेलभार, मनिकौरा,परसा, सेखुआनी, शंकरपुर, शिवपुरी, निपनिया, ब्रह्मस्थान, लुठहवा, विषखोप, लक्ष्मीपुर, परसाभरटोलिया, जिगिना, श्रीरामपुर, गंगापुर, गंगवलिया, करौता, सिरसिया मसर्की, जिगिना, चुड़िहारी, बरनहवा, पिपरवास, मनिकापुर, बेलभार, चकदह, महुलैना, शाहपुर आदि गांवों के किसानों की सैकड़ों एकड़ धान की फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो जाती है। किसानों में बघेला नाला की सफाई और चौड़ीकरण नहीं होने से आक्रोश है।
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क्षेत्रीय किसान जयकिशुन यादव, महबूब अली, गतिराम साहनी, रामबेलास यादव, जयप्रकाश सिंह, शमशाद खान, गिरजेश यादव, संदीप मद्धेशिया, प्रदीप यादव, विवेक मद्धेशिया, रामसिंह, विजय, शिवेन्द्र यादव, गया, रामबचन यादव, रामप्रसाद, त्रिलोकी यादव, चन्द्र केश इत्यादि का कहना है कि सिंचाई विभाग ने कई बार बघेला नाला का सर्वे कराया गया है फिर भी सफाई नहीं कराई गई।
सफाई नाले की होती है, नदी की नहीं
बघेला नाला की सफाई कराने के मामले में पूछने पर सिंचाई विभाग द्वितीय खंड के सहायक अभियंता जितेंद्र कुमार पटेल ने बताया कि जिसे लोग बघेला नाला मानते आ रहे हैं, वह केंद्रीय जल आयोग और राजस्व के रिकॉर्ड में बघेल नदी के नाम से दर्ज है। उन्होंने कहा कि सफाई नाले की होती है नदी की नहीं। विशेष परिस्थिति में ही नदी की सफाई कराई जाती है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इस नदी पर बांध बनाने को लेकर एक तकनीकी कमेटी गठित हुई थी, जिसने जांच के बाद पाया गया कि बघेल नदी में ढलान बहुत अच्छी है। ऐसे में इस पर बांध बनाने की आवश्यकता नहीं है। बघेल नदी के बाढ़ का पानी एक-दो दिन में ही निकल जाता है।
स्पीकअप
बघेला नाला की सफाई के साथ ही इसका चौड़ीकरण सिंचाई विभाग करवा देता तो बाढ़ का पानी आसानी से बह जाता। हर साल बाढ़ में धान की फसल नहीं डूबती। बाढ़ के चलते हर साल मेहनत बर्बाद हो जाती है।
-जयकिशुन यादव, किसान, बेलभार
बघेला नाला झाड़-झंखाड़ से पट कर संकरा हो गया है। इस वजह से बाढ़ का पानी निकल नहीं पाता है। पानी सिवान में फैलकर किसानों की धान की फसल को बर्बाद कर देता है। बघेला नाले की सफाई के साथ ही उसके प्रवाह मार्ग का चौड़ीकरण कराना जरूरी है।
- रामबेलास यादव, किसान, बिषखोप
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ड्रोन कैमरे व लेबल मशीन से सर्वे कराने के बाद भी नहीं कराई गई नाले की सफाई
29 किलोमीटर लंबा है बघेला नाला
परसामलिक। नेपाल की पहाड़ियों से निकले बघेला नाला की सफाई नहीं होने से मानसून को करीब देखते हुए किसान चिंतित हो गए हैं। लगभग हर साल इस नाला में बाढ़ की वजह से सैकड़ों एकड़ फसल डूब जाती है। वहीं सिंचाई विभाग का कहना है कि केंद्रीय जल आयोग और राजस्व रिकॉर्ड में यह बघेल नदी के नाम से दर्ज है। इसलिए इसकी सफाई नहीं होती है।
बघेला नाला जिले के नौतनवा ब्लॉक की ग्राम पंचायत रेहरा के पास भारतीय सीमा में प्रवेश करता है। इसका प्रवाह मार्ग झाड़-झंखाड़ उग जाने से संकरा हो गया है, जिससे इसके बाढ़ का पानी सिवान में फैल कर किसानों की धान की फसल को बरबाद कर देता है। क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई विभाग ने कई बार ड्रोन कैमरे व लेबल मशीन से इसका सर्वे कराया, फिर भी इसकी सफाई नहीं कराई गई।
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सीमावर्ती गांव रेहरा से आगे गंगवलिया करौता के सामने दोमुहान घाट तक बघेला नाला की लंबाई करीब 29 किलोमीटर है। बरसात के सीजन में इसकी बाढ़ से रेहरा, महुलानी, बेलभार, मनिकौरा,परसा, सेखुआनी, शंकरपुर, शिवपुरी, निपनिया, ब्रह्मस्थान, लुठहवा, विषखोप, लक्ष्मीपुर, परसाभरटोलिया, जिगिना, श्रीरामपुर, गंगापुर, गंगवलिया, करौता, सिरसिया मसर्की, जिगिना, चुड़िहारी, बरनहवा, पिपरवास, मनिकापुर, बेलभार, चकदह, महुलैना, शाहपुर आदि गांवों के किसानों की सैकड़ों एकड़ धान की फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो जाती है। किसानों में बघेला नाला की सफाई और चौड़ीकरण नहीं होने से आक्रोश है।
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क्षेत्रीय किसान जयकिशुन यादव, महबूब अली, गतिराम साहनी, रामबेलास यादव, जयप्रकाश सिंह, शमशाद खान, गिरजेश यादव, संदीप मद्धेशिया, प्रदीप यादव, विवेक मद्धेशिया, रामसिंह, विजय, शिवेन्द्र यादव, गया, रामबचन यादव, रामप्रसाद, त्रिलोकी यादव, चन्द्र केश इत्यादि का कहना है कि सिंचाई विभाग ने कई बार बघेला नाला का सर्वे कराया गया है फिर भी सफाई नहीं कराई गई।
सफाई नाले की होती है, नदी की नहीं
बघेला नाला की सफाई कराने के मामले में पूछने पर सिंचाई विभाग द्वितीय खंड के सहायक अभियंता जितेंद्र कुमार पटेल ने बताया कि जिसे लोग बघेला नाला मानते आ रहे हैं, वह केंद्रीय जल आयोग और राजस्व के रिकॉर्ड में बघेल नदी के नाम से दर्ज है। उन्होंने कहा कि सफाई नाले की होती है नदी की नहीं। विशेष परिस्थिति में ही नदी की सफाई कराई जाती है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इस नदी पर बांध बनाने को लेकर एक तकनीकी कमेटी गठित हुई थी, जिसने जांच के बाद पाया गया कि बघेल नदी में ढलान बहुत अच्छी है। ऐसे में इस पर बांध बनाने की आवश्यकता नहीं है। बघेल नदी के बाढ़ का पानी एक-दो दिन में ही निकल जाता है।
स्पीकअप
बघेला नाला की सफाई के साथ ही इसका चौड़ीकरण सिंचाई विभाग करवा देता तो बाढ़ का पानी आसानी से बह जाता। हर साल बाढ़ में धान की फसल नहीं डूबती। बाढ़ के चलते हर साल मेहनत बर्बाद हो जाती है।
-जयकिशुन यादव, किसान, बेलभार
बघेला नाला झाड़-झंखाड़ से पट कर संकरा हो गया है। इस वजह से बाढ़ का पानी निकल नहीं पाता है। पानी सिवान में फैलकर किसानों की धान की फसल को बर्बाद कर देता है। बघेला नाले की सफाई के साथ ही उसके प्रवाह मार्ग का चौड़ीकरण कराना जरूरी है।
- रामबेलास यादव, किसान, बिषखोप