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Maharajganj News: अमृत सरोवर में गड़बड़ी पर तीन अफसरों के निलंबन की संस्तुति
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महराजगंज। नगर पालिका सिसवा बाजार के मीराबाईनगर वार्ड संख्या 25 में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन अमृत सरोवर परियोजना में कथित भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और वित्तीय अनियमितता के मामले में जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी, अवर अभियंता और लिपिक के निलंबन की संस्तुति करते हुए प्रमुख सचिव नगर विकास को पत्र भेजा है। वहीं, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के खिलाफ स्पष्टीकरण की कार्रवाई की संस्तुति की गई है। इसी निर्माणाधीन पोखरे में दो अगस्त को नहाने के दौरान तीन किशोरों की डूबने से मौत हो गई थी। घटना के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी थी।
सिसवा बाजार के बरवां द्वारिका निवासी बृजेंद्र सिंह ने 18 जुलाई को डीएम से शिकायत की थी कि मीराबाईनगर वार्ड संख्या 25 में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे अमृत सरोवर परियोजना में अनियमितता बरती जा रही है। शिकायत में घटिया निर्माण और वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए गए थे। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने 20 जुलाई को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति में एसडीएम निचलौल, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड पीडब्ल्यूडी और उपायुक्त श्रम एवं रोजगार को शामिल किया गया था। इसी बीच दो अगस्त को निर्माणाधीन पोखरे में तीन किशोरों की डूबने से मौत हो गई। चार अगस्त को डीएम ने मामले को संज्ञान में लेते हुए गठित समिति से परियोजना की जांच कर रिपोर्ट मांगी। समिति ने 22 अगस्त को अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर नगर पालिका सिसवा बाजार के वर्तमान अधिशासी अधिकारी विंध्याचल के खिलाफ स्पष्टीकरण जारी किया गया है। वहीं, अमृत-2.0 के तहत स्वीकृत तालाब सौंदर्यीकरण परियोजना के कार्य के दौरान तैनात रहे तत्कालीन अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार सरोज, वर्तमान अवर अभियंता देवेंद्र कुमार और परिषद के लिपिक विनोद कुमार के निलंबन की संस्तुति की गई है। परियोजना में पर्यवेक्षणीय दायित्वों में लापरवाही के आरोप में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी प्रियंका मिश्रा से भी स्पष्टीकरण लिए जाने की संस्तुति करते हुए डीएम ने प्रमुख सचिव नगर विकास को रिपोर्ट भेजी है।
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तीन किशोरों की मौत के बाद ठेकेदार को भेजा गया था जेल
निर्माणाधीन पोखरे में दो अगस्त को नहाने के दौरान सिसवा कस्बे के तीन किशोरों नितेश, रजत और किसन की डूबने से मौत हो गई थी। घटना के बाद डीएम और एसपी ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की घोषणा की थी। प्रशासन ने मामले में निर्माणाधीन पोखरे के ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था। इसके बाद परियोजना में हुई कथित अनियमितताओं की जांच आगे बढ़ी। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद अब संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
सरकारी धन से संचालित विकास परियोजनाओं में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, घटिया निर्माण अथवा पर्यवेक्षणीय दायित्वों में लापरवाही किसी भी दशा में स्वीकार नहीं की जाएगी। जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की भ्रष्टाचार और लापरवाही के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है।
गौरव सिंह सोगरवाल, जिलाधिकारी महराजगंज
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सिसवा बाजार के बरवां द्वारिका निवासी बृजेंद्र सिंह ने 18 जुलाई को डीएम से शिकायत की थी कि मीराबाईनगर वार्ड संख्या 25 में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे अमृत सरोवर परियोजना में अनियमितता बरती जा रही है। शिकायत में घटिया निर्माण और वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए गए थे। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने 20 जुलाई को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति में एसडीएम निचलौल, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड पीडब्ल्यूडी और उपायुक्त श्रम एवं रोजगार को शामिल किया गया था। इसी बीच दो अगस्त को निर्माणाधीन पोखरे में तीन किशोरों की डूबने से मौत हो गई। चार अगस्त को डीएम ने मामले को संज्ञान में लेते हुए गठित समिति से परियोजना की जांच कर रिपोर्ट मांगी। समिति ने 22 अगस्त को अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी।
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जांच रिपोर्ट के आधार पर नगर पालिका सिसवा बाजार के वर्तमान अधिशासी अधिकारी विंध्याचल के खिलाफ स्पष्टीकरण जारी किया गया है। वहीं, अमृत-2.0 के तहत स्वीकृत तालाब सौंदर्यीकरण परियोजना के कार्य के दौरान तैनात रहे तत्कालीन अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार सरोज, वर्तमान अवर अभियंता देवेंद्र कुमार और परिषद के लिपिक विनोद कुमार के निलंबन की संस्तुति की गई है। परियोजना में पर्यवेक्षणीय दायित्वों में लापरवाही के आरोप में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी प्रियंका मिश्रा से भी स्पष्टीकरण लिए जाने की संस्तुति करते हुए डीएम ने प्रमुख सचिव नगर विकास को रिपोर्ट भेजी है।
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तीन किशोरों की मौत के बाद ठेकेदार को भेजा गया था जेल
निर्माणाधीन पोखरे में दो अगस्त को नहाने के दौरान सिसवा कस्बे के तीन किशोरों नितेश, रजत और किसन की डूबने से मौत हो गई थी। घटना के बाद डीएम और एसपी ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की घोषणा की थी। प्रशासन ने मामले में निर्माणाधीन पोखरे के ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था। इसके बाद परियोजना में हुई कथित अनियमितताओं की जांच आगे बढ़ी। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद अब संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
सरकारी धन से संचालित विकास परियोजनाओं में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, घटिया निर्माण अथवा पर्यवेक्षणीय दायित्वों में लापरवाही किसी भी दशा में स्वीकार नहीं की जाएगी। जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की भ्रष्टाचार और लापरवाही के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है।
गौरव सिंह सोगरवाल, जिलाधिकारी महराजगंज