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Maharajganj News: रामग्राम को मिलेगी पहचान, पर्यटन विकास से खुलेगा तरक्की का द्वार
Fri, 28 Apr 2023 01:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 28 Apr 2023 01:11 AM IST
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चौक रामग्राम देवदह का फोटो ।संवाद
रामग्राम में मौजूद है बुद्ध की अस्थियों का सबसे बड़ा हिस्सा
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। चौक बाजार से सटे जंगल में रामग्राम दुनिया के पर्यटन के नक्शे में दिखने लगेगा। यहां पर्यटन विकास के लिए सरकार ने रकम जारी कर दी है। विकास कार्यों को कराने के लिए पूरा खाका तैयार हो चुका है। जल्दी ही रामग्राम विकसित हो जाएगा। क्षेत्र में विकास को गति मिलने के साथ ही पर्यटकों को आने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। बुद्ध की अस्थियों का सबसे बड़ा हिस्सा रामग्राम में माना जाता है।
इतिहासकारों के अनुसार, भगवान के कुशीनगर में निर्वाण प्राप्त करने के बाद उनके अनुयायी राजा वहां पहुंच गए। बुद्ध की अस्थियों को अपने साथ ले जाने की बात पर उनके बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई। इसी दौरान किसी ने सुझाया कि अस्थियों को आठ हिस्सों में बांट कर हर किसी को एक-एक हिस्सा सौंप दिया जाए। अस्थियों के आठवें हिस्से को कोलिय वंश के राजा महाकाल अपने साथ ले आए और रामग्राम में उसके ऊपर धातु स्तूप का निर्माण कराया। कुषाण व गुप्त कालखंड में इसे विस्तृत आकार दिया गया।
बाद में बौद्ध धर्म ग्रहण करने के बाद सम्राट अशोक ने बुद्ध की अस्थियों के सात हिस्सों को निकलवाकर सैकड़ों हिस्सों में बांटा और देश-दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भेजवाकर बौद्ध धर्म का प्रचार किया। कहा जाता है कि सम्राट अशोक अस्थियों के लिए रामग्राम भी पहुंचा था, लेकिन यहां जंगली जानवरों को अस्थि स्तूप की परिक्रमा करते देखकर वह आश्चर्यचकित रह गया और अस्थियों का कुछ हिस्सा यहां से निकलवाने का विचार त्याग दिया। ऐसे में रामग्राम स्तूप ही वह स्थान है, जहां भगवान बुद्ध की अस्थियों के आठ हिस्सों में से एक हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित है।
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कोट
मेरी पुस्तक ‘जनपद महराजगंज के बौद्ध स्थल देवदह- रामग्राम-कुंवरवर्ती स्तूप’ में बौद्ध भूमि के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है। सभी तथ्यों को प्रमाण के साथ सहेजा गया है। रामग्राम में पर्यटन का विकास होने से क्षेत्र को एक नई पहचान मिलेगी।
-डॉ. परशुराम गुप्त, पूर्व विभागाध्यक्ष, सैन्य विज्ञान
चौक बाजार के रामग्राम का विकास होने से पर्यटक बढ़ेंगे। रामग्राम प्राचीन व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल है। जिसे भगवान बुद्ध के ननिहाल के रूप में जाना जाता है। रामग्राम में मिले अवशेषों से यह पता चला है कि यह स्थल कुषाणकाल से गुप्तकाल खंड का है।
- जितेंद्र राव, अध्यक्ष, देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति
रामग्राम में घाट, लैंड स्केपिंग व गेस्ट हाउस का होगा निर्माण
चौक बाजार क्षेत्र के बौद्ध पर्यटन स्थल रामग्राम का पर्यटन विभाग 8.27 लाख से पर्यटक सुविधाओं का विकास करेगा। यहां पर गेस्ट हाउस, हाल, लैंड स्केपिंग, घाट निर्माण तथा सोलर लाइट लगाने का काम किया जाएगा। विभाग ने इसकी कार्य योजना तैयार कर ली है। जल्द ही इस पर काम शुरू किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। चौक बाजार से सटे जंगल में रामग्राम दुनिया के पर्यटन के नक्शे में दिखने लगेगा। यहां पर्यटन विकास के लिए सरकार ने रकम जारी कर दी है। विकास कार्यों को कराने के लिए पूरा खाका तैयार हो चुका है। जल्दी ही रामग्राम विकसित हो जाएगा। क्षेत्र में विकास को गति मिलने के साथ ही पर्यटकों को आने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। बुद्ध की अस्थियों का सबसे बड़ा हिस्सा रामग्राम में माना जाता है।
इतिहासकारों के अनुसार, भगवान के कुशीनगर में निर्वाण प्राप्त करने के बाद उनके अनुयायी राजा वहां पहुंच गए। बुद्ध की अस्थियों को अपने साथ ले जाने की बात पर उनके बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई। इसी दौरान किसी ने सुझाया कि अस्थियों को आठ हिस्सों में बांट कर हर किसी को एक-एक हिस्सा सौंप दिया जाए। अस्थियों के आठवें हिस्से को कोलिय वंश के राजा महाकाल अपने साथ ले आए और रामग्राम में उसके ऊपर धातु स्तूप का निर्माण कराया। कुषाण व गुप्त कालखंड में इसे विस्तृत आकार दिया गया।
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बाद में बौद्ध धर्म ग्रहण करने के बाद सम्राट अशोक ने बुद्ध की अस्थियों के सात हिस्सों को निकलवाकर सैकड़ों हिस्सों में बांटा और देश-दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भेजवाकर बौद्ध धर्म का प्रचार किया। कहा जाता है कि सम्राट अशोक अस्थियों के लिए रामग्राम भी पहुंचा था, लेकिन यहां जंगली जानवरों को अस्थि स्तूप की परिक्रमा करते देखकर वह आश्चर्यचकित रह गया और अस्थियों का कुछ हिस्सा यहां से निकलवाने का विचार त्याग दिया। ऐसे में रामग्राम स्तूप ही वह स्थान है, जहां भगवान बुद्ध की अस्थियों के आठ हिस्सों में से एक हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित है।
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मेरी पुस्तक ‘जनपद महराजगंज के बौद्ध स्थल देवदह- रामग्राम-कुंवरवर्ती स्तूप’ में बौद्ध भूमि के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है। सभी तथ्यों को प्रमाण के साथ सहेजा गया है। रामग्राम में पर्यटन का विकास होने से क्षेत्र को एक नई पहचान मिलेगी।
-डॉ. परशुराम गुप्त, पूर्व विभागाध्यक्ष, सैन्य विज्ञान
चौक बाजार के रामग्राम का विकास होने से पर्यटक बढ़ेंगे। रामग्राम प्राचीन व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल है। जिसे भगवान बुद्ध के ननिहाल के रूप में जाना जाता है। रामग्राम में मिले अवशेषों से यह पता चला है कि यह स्थल कुषाणकाल से गुप्तकाल खंड का है।
- जितेंद्र राव, अध्यक्ष, देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति
रामग्राम में घाट, लैंड स्केपिंग व गेस्ट हाउस का होगा निर्माण
चौक बाजार क्षेत्र के बौद्ध पर्यटन स्थल रामग्राम का पर्यटन विभाग 8.27 लाख से पर्यटक सुविधाओं का विकास करेगा। यहां पर गेस्ट हाउस, हाल, लैंड स्केपिंग, घाट निर्माण तथा सोलर लाइट लगाने का काम किया जाएगा। विभाग ने इसकी कार्य योजना तैयार कर ली है। जल्द ही इस पर काम शुरू किया जाएगा।