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Maharajganj News: परिषदीय स्कूलों में पर्यावरण जागरूकता पर चलेगा कार्यक्रम
Fri, 23 Feb 2024 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 23 Feb 2024 01:16 AM IST
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महराजगंज। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण व जागरूकता पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए शिक्षा निदेशक के आदेश पर बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर दिया हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों को जागरूक करने की योजना है।
जानकारी के अनुसार, पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों ने जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता, जैविक विविधता का संरक्षण, जैविक संसाधनों और जैव विविधता का प्रबंधन, वन और वन्य जीवन संरक्षण और सतत विकास जैसे क्षेत्रों के संबंधित जानकारी दी जाएगी। इसके विभाग ने शासन स्तर से विद्यालय स्तर तक तैयारियां शुरू कर दी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 स्कूली शिक्षा में पर्यावरण जागरूकता और स्थिरता के एकीकरण की परिकल्पना है। भारत में शिक्षा के प्रत्येक चरण में जलवायु परिवर्तन शिक्षा को एकीकृत करना अत्यन्त महत्वपूर्ण है क्योंकि यह छात्र-छात्राओं को जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए ज्ञान, कौशल और जागरूकता के साथ सशक्त बनाता है। बच्चों में ज्ञान, क्षमताआ, मूल्यों और स्वभाव को विकसित करने पर आवश्यक बल देता है, जो पर्यावरण की दृष्टि से जागरूकता और क्षमता दोनों विकसित करेगी।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रवण गुप्ता ने बताया कि एनसीएफ-एसई का लक्ष्य स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर पर्यावरण शिक्षा को एकीकृत करना है। उक्त के अतिरिक्त राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में जल और संसाधन संरक्षण सहित पर्यावरण जागरूकता 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों में से एक के रूप में है, जिसे आज की तेजी से बदलते विश्व में अच्छे, सफल, अभिनव, अनुकूलनीय और उत्पादक इंसान बनने के लिए सभी छात्र-छात्राओं को सीखना है। जीवन के अनुभवों पर आधारित पर्यावरण शिक्षा जीवन के प्रारंभिक वर्षों में ही प्रारंभ हो जानी चाहिए। जागरूकता कार्यक्रम चला कर बच्चों को पर्यावरण अनुकूल गतिविधियों में शामिल करने और जागरूकता विकसित है। सभी बीईओ के माध्यम से प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालयों को अवगत करा दिया गया है।
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यह प्रतियोगिताएं होंगी
पोस्टर बनाना, पेंटिंग एवं नारा लेखन आदि आयोजन स्कूलों में करना है। स्कूल और आसपास के क्षेत्र की सफाई अभियान और शौचालयों को हर समय सभी के लिए उपयोग योग्य रखना। स्कूल और घर में खाने के कचरे से खाद बनाना। विद्यालय में किचन गार्डन बनाना। सामुदायिक स्तर पर जैव विविधता संरक्षण पर जोर देना है।
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जानकारी के अनुसार, पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों ने जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता, जैविक विविधता का संरक्षण, जैविक संसाधनों और जैव विविधता का प्रबंधन, वन और वन्य जीवन संरक्षण और सतत विकास जैसे क्षेत्रों के संबंधित जानकारी दी जाएगी। इसके विभाग ने शासन स्तर से विद्यालय स्तर तक तैयारियां शुरू कर दी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 स्कूली शिक्षा में पर्यावरण जागरूकता और स्थिरता के एकीकरण की परिकल्पना है। भारत में शिक्षा के प्रत्येक चरण में जलवायु परिवर्तन शिक्षा को एकीकृत करना अत्यन्त महत्वपूर्ण है क्योंकि यह छात्र-छात्राओं को जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए ज्ञान, कौशल और जागरूकता के साथ सशक्त बनाता है। बच्चों में ज्ञान, क्षमताआ, मूल्यों और स्वभाव को विकसित करने पर आवश्यक बल देता है, जो पर्यावरण की दृष्टि से जागरूकता और क्षमता दोनों विकसित करेगी।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रवण गुप्ता ने बताया कि एनसीएफ-एसई का लक्ष्य स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर पर्यावरण शिक्षा को एकीकृत करना है। उक्त के अतिरिक्त राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में जल और संसाधन संरक्षण सहित पर्यावरण जागरूकता 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों में से एक के रूप में है, जिसे आज की तेजी से बदलते विश्व में अच्छे, सफल, अभिनव, अनुकूलनीय और उत्पादक इंसान बनने के लिए सभी छात्र-छात्राओं को सीखना है। जीवन के अनुभवों पर आधारित पर्यावरण शिक्षा जीवन के प्रारंभिक वर्षों में ही प्रारंभ हो जानी चाहिए। जागरूकता कार्यक्रम चला कर बच्चों को पर्यावरण अनुकूल गतिविधियों में शामिल करने और जागरूकता विकसित है। सभी बीईओ के माध्यम से प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालयों को अवगत करा दिया गया है।
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यह प्रतियोगिताएं होंगी
पोस्टर बनाना, पेंटिंग एवं नारा लेखन आदि आयोजन स्कूलों में करना है। स्कूल और आसपास के क्षेत्र की सफाई अभियान और शौचालयों को हर समय सभी के लिए उपयोग योग्य रखना। स्कूल और घर में खाने के कचरे से खाद बनाना। विद्यालय में किचन गार्डन बनाना। सामुदायिक स्तर पर जैव विविधता संरक्षण पर जोर देना है।