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प्रदूषण: धुंध और धूल का गुबार बना रहा शहरवासियों को बीमार

Wed, 08 Nov 2023 01:08 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 08 Nov 2023 01:08 AM IST
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Pollution: Clouds of smog and dust are making city residents sick
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155 से 161 के बीच रहेगा शहर का एक्यूआई, सांस के मरीजों को सावधान रहने की जरूरत
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। शहर में वायु का प्रदूषण स्तर बढ़ रहा है। वर्तमान में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 152 है। यह सेहत के लिए हानिकारक है। कोरोना काल में शहर की हवा बेहद अच्छी थी, लेकिन अब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो गई है। हवा की गुणवत्ता थोड़े से खराब स्तर पर पहुंच गई है। धुंध और धूल का गुबार लोगों को बीमार बना रहा है। निर्माण कार्यों के जगह पर उड़ रहे धूल, टूटी सड़कों पर धूल से लोगों को परेशानी बढ़ रही है।
मंगलवार को शहर में फरेंदा रोड पर सर्विस लेन के किनारे मकान का निर्माण हो रहा है। ट्राॅली से गिट्टी उतारने के दौरान करीब पांच मिनट तक धूल का गुबार उठा। आसपास के लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। सर्विस लेन से गुजर रहे रवि तिवारी ने बताया कि शहर में इन दिनों सुबह व शाम धुंध दिख रहा है। रास्ते में धूल से भी समस्या हो रही है। ऐसे ही रहा तो आने वाले दिनों में समस्या बढ़ सकती है। शहर में अलग-अलग हिस्सों में इसी तरह से धूल व धुंध का असर सुबह शाम दिख रहा है।
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इसकी वजह से कभी-कभी तो दूर तक दिखता ही नहीं है। वन क्षेत्र के करीब शहर होने के कारण अभी यहां ज्यादा समस्या नहीं है, लेकिन हवा की गुणवत्ता में थोड़े से खराब स्तर तक पहुंच चुकी है। इस वजह से थोड़ी बहुत समस्या लोगों को हो रही है। इसी वजह से जिला अस्पताल की ओपीडी में चेस्ट रोग विशेषज्ञ के कक्ष में सांस के मरीजों की कतार बढ़ने लगी है। डॉक्टर के अनुसार प्रत्येक दिन ओपीडी में 25 से 30 की संख्या में सांस के रोगी आ रहे हैं।
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बुजुर्गों के अलावा युवा भी समस्या से पीड़ित होकर आ रहे हैं। कतार में खड़े रितेश ने बताया कि सांस लेने में समस्या हुई तो डॉक्टर से आकर जांच कराई। कुछ जांच कराने के लिए डॉक्टर ने कहा है, रिपोर्ट आने के बाद इलाज होगा।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि बुजुर्गाें के लिए अस्पताल में अलग वार्ड है। गंभीर हालत होने पर अगल वार्ड में भर्ती किया जाता है। धूल व धुंध के प्रभाव से बचाव करने की जरूरत है। अस्पताल की ओपीडी में मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है।

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एयर क्वालिटी इंडेक्स मानक

0-50------------अच्छा

51-100----------संतोषजक

101-200--------थोड़ा खराब

201--300------खराब

301--400-------अत्यंत खराब

401-500--------गंभीर

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दिनांक--------एक्यूआई
आठ नवंबर---161
नौ नवंबर---162
10 नवंबर---157
11 नवंबर--155
12 नवंबर--157
13 नवंबर --155

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अलग छह दिनों शहर के एक्यूआई में उतार चढ़ाव रहेगा। 100 से 200 के बीच एक्यूआई को थोड़े खराब स्तर का माना जाता है। इस वजह से सचेत रहने की जरूरत है।
कैलाश पांडेय, मौसम विशेषज्ञ
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वायु प्रदूषण तब होता है जब गैसें, धूल, गंदगी, पराग, कालिख, वायरस, आदि हवा को दूषित करते हैं जिससे यह अशुद्ध, अस्वास्थ्यकर और विषाक्त होता है। हवा में मौजूद वायु प्रदूषण की मात्रा मनुष्यों, जानवरों, पौधों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रभाव को निर्धारित करती है। हवा में प्रदूषण की मात्रा मनुष्यों, जानवरों और पौधों को नुकसान के स्तर को प्रभावित करती है।

अनिल कुमार सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, भूगोल विभाग, जवाहर लाल नेहरू पीजी काॅलेज
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