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Maharajganj News: दुष्कर्म मामले में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट खारिज, अग्रिम विवेचना का आदेश
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महराजगंज। विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट की अदालत ने दुष्कर्म और एससी/एसटी एक्ट से जुड़े मामले में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को खारिज करते हुए प्रकरण की अग्रिम विवेचना कराने का आदेश दिया है। अदालत ने विवेचना को प्रथम दृष्टया सरसरी बताते हुए केस डायरी में उपलब्ध बयानों और तथ्यों का समुचित अवलोकन नहीं किए जाने की बात कही।
कोल्हुई थाने में अभिमन्यु आदि के खिलाफ वर्ष 2024 में प्राथमिकी दर्ज किया गया था। विवेचना के बाद पुलिस ने अपराध होना न पाते हुए अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में भेजी थी। इसके विरोध में वादिनी ने 21 मार्च 2025 को प्रार्थनापत्र दाखिल कर अंतिम रिपोर्ट निरस्त करने और अग्रिम विवेचना की मांग की थी। अदालत ने पत्रावली के अवलोकन में पाया कि पीड़िता ने विवेचना के दौरान दिए बयान में अभियोजन कथानक का समर्थन किया है।
उसने आरोप लगाया कि अभिमन्यु ने उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया जबकि सर्वेन्दु राय रास्ते पर खड़े होकर निगरानी कर रहा था। धारा 183 के बयान में भी उसने इसी आरोप की पुष्टि की। गवाह के बयानों से भी पीड़िता के कथनों का समर्थन होना पाया गया। अदालत ने कहा कि विवेचक ने उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित परीक्षण नहीं किया। मामले में गहन विवेचना आवश्यक है। इसी आधार पर प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए अंतिम रिपोर्ट खारिज कर अग्रिम विवेचना का आदेश दिया गया।
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कोल्हुई थाने में अभिमन्यु आदि के खिलाफ वर्ष 2024 में प्राथमिकी दर्ज किया गया था। विवेचना के बाद पुलिस ने अपराध होना न पाते हुए अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में भेजी थी। इसके विरोध में वादिनी ने 21 मार्च 2025 को प्रार्थनापत्र दाखिल कर अंतिम रिपोर्ट निरस्त करने और अग्रिम विवेचना की मांग की थी। अदालत ने पत्रावली के अवलोकन में पाया कि पीड़िता ने विवेचना के दौरान दिए बयान में अभियोजन कथानक का समर्थन किया है।
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उसने आरोप लगाया कि अभिमन्यु ने उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया जबकि सर्वेन्दु राय रास्ते पर खड़े होकर निगरानी कर रहा था। धारा 183 के बयान में भी उसने इसी आरोप की पुष्टि की। गवाह के बयानों से भी पीड़िता के कथनों का समर्थन होना पाया गया। अदालत ने कहा कि विवेचक ने उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित परीक्षण नहीं किया। मामले में गहन विवेचना आवश्यक है। इसी आधार पर प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए अंतिम रिपोर्ट खारिज कर अग्रिम विवेचना का आदेश दिया गया।
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