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जिले में हर साल बढ़ता घटता रहा डेंगू का कहर
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जिले में हर साल बढ़ता-घटता रहा डेंगू का असर
महराजगंज। जनपद में डेंगू का असर है। लेकिन, इसकी चपेट में आने के बाद लोग बेहतर इलाज के बाद ठीक हो जा रहे हैं। जिले में साल दर साल डेंगू की चपेट में आने वालों की संख्या घटती बढ़ती रही। सबसे खास बात यह है कि इससे मौत की पुष्टि नहीं है। वहीं, रिकवरी रेट काफी अच्छा है। वर्तमान समय में डेंगू के असर को देखते हुए इलाज का बेहतर प्रबंध किया गया है। जिला अस्पताल में तो एक अलग से वार्ड बना दिया गया है। वहीं, मलेरिया विभाग की ओर से भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में 19 लोग डेंगू की चपेट में आए थे। वही, वर्ष 2018 में 10 लोग चपेट में आए। लेकिन वर्ष 2019 में यह संख्या बढ़कर 22 हो गई थी। वर्ष 2020 में घटकर 2 हो गई। लेकिन वर्ष 2021 में यह संख्या बढ़कर 15 तक पहुंच गई है। इस तरह से डेंगू के केस साल दर साल घटते बढ़ते रहे। सबसे खास बात यह रही की डेंगू की चपेट में आने के बाद लोग स्वस्थ हो गए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इससे बचाव के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
जिला मलेरिया अधिकारी त्रिभुवन चौधरी ने बताया कि कि डेंगू सहित अन्य वेक्टर जनित रोगों के रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। रोकथाम के लिए टीम भी गठित है। टीम द्वारा जन सामान्य को डेंगू से बचाव के लिए जागरूक किया जाता है। घरों में कूलर, फ्रीज, गमलों आदि में जमे जल को साफ कराया जाता है। जन समुदाय को पीने का पानी उबाल कर प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है।
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क्या होता है डेंगू
डॉक्टरों के अनुसार डेंगू एक मच्छर जनित वायरल इंफेक्शन या डिजीज है। डेंगू होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते आदि निकल आते हैं। डेंगू बुखार को हड्डी तोड़ बुखार भी कहते हैं। एडीज मच्छर के काटने से डेंगू होता है।
जिले में एईएस का केस घटा
जिले में एईएस की चपेट में आने वालों में कमी आई है। वर्ष 2017 में 437 केस मिला। वहीं 68 मौत हुई थी। वर्ष 2018 में 252 इस बीमारी की चपेट में आए। 26 की मौत हुई थी। लेकिन वर्ष 2019 में यह घटकर 189 हो गई। वहीं, मरने वालों की संख्या भी घटकर 15 हो गई। वर्ष 2020 में 167 केस मिला। जबकि मौत 12 की हुई। वर्ष 2021 में 138 केस मिला। मरने वालों की संख्या 7 रही। इस तरह आंकड़े बता रहे हैं कि जिले में जेई- एईएस केस मिलने की संख्या एवं मौत के ग्राफ में कमी आई है।
मलेरिया की चपेट में आने वाली घटी संख्या
जिले में मलेरिया की चपेट में आने वालों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2017 में 10, वर्ष 2018 में 20, वर्ष 2019 में 14 लोग मेलेरिया की चपेट में आए। वहीं, वर्ष 2020 में जिले में कोई केस ही नहीं मिला। वर्ष 2021 में अब तक 4 केस मलेरिया का सामने आया है।
जिले में इलाज की समुचित व्यवस्था है। बेहतर इलाज के वजह से ही रिकवरी रेट ठीक है। इसके अलावा विभाग की ओर से बीमारियों से बचाव के प्रति समय-समय पर जागरूक किया जाता है जिसके परिणाम अच्छे दिख रहे हैं।
-डॉ.एके श्रीवास्तव, सीएमओ
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महराजगंज। जनपद में डेंगू का असर है। लेकिन, इसकी चपेट में आने के बाद लोग बेहतर इलाज के बाद ठीक हो जा रहे हैं। जिले में साल दर साल डेंगू की चपेट में आने वालों की संख्या घटती बढ़ती रही। सबसे खास बात यह है कि इससे मौत की पुष्टि नहीं है। वहीं, रिकवरी रेट काफी अच्छा है। वर्तमान समय में डेंगू के असर को देखते हुए इलाज का बेहतर प्रबंध किया गया है। जिला अस्पताल में तो एक अलग से वार्ड बना दिया गया है। वहीं, मलेरिया विभाग की ओर से भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में 19 लोग डेंगू की चपेट में आए थे। वही, वर्ष 2018 में 10 लोग चपेट में आए। लेकिन वर्ष 2019 में यह संख्या बढ़कर 22 हो गई थी। वर्ष 2020 में घटकर 2 हो गई। लेकिन वर्ष 2021 में यह संख्या बढ़कर 15 तक पहुंच गई है। इस तरह से डेंगू के केस साल दर साल घटते बढ़ते रहे। सबसे खास बात यह रही की डेंगू की चपेट में आने के बाद लोग स्वस्थ हो गए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इससे बचाव के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
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जिला मलेरिया अधिकारी त्रिभुवन चौधरी ने बताया कि कि डेंगू सहित अन्य वेक्टर जनित रोगों के रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। रोकथाम के लिए टीम भी गठित है। टीम द्वारा जन सामान्य को डेंगू से बचाव के लिए जागरूक किया जाता है। घरों में कूलर, फ्रीज, गमलों आदि में जमे जल को साफ कराया जाता है। जन समुदाय को पीने का पानी उबाल कर प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है।
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क्या होता है डेंगू
डॉक्टरों के अनुसार डेंगू एक मच्छर जनित वायरल इंफेक्शन या डिजीज है। डेंगू होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते आदि निकल आते हैं। डेंगू बुखार को हड्डी तोड़ बुखार भी कहते हैं। एडीज मच्छर के काटने से डेंगू होता है।
जिले में एईएस का केस घटा
जिले में एईएस की चपेट में आने वालों में कमी आई है। वर्ष 2017 में 437 केस मिला। वहीं 68 मौत हुई थी। वर्ष 2018 में 252 इस बीमारी की चपेट में आए। 26 की मौत हुई थी। लेकिन वर्ष 2019 में यह घटकर 189 हो गई। वहीं, मरने वालों की संख्या भी घटकर 15 हो गई। वर्ष 2020 में 167 केस मिला। जबकि मौत 12 की हुई। वर्ष 2021 में 138 केस मिला। मरने वालों की संख्या 7 रही। इस तरह आंकड़े बता रहे हैं कि जिले में जेई- एईएस केस मिलने की संख्या एवं मौत के ग्राफ में कमी आई है।
मलेरिया की चपेट में आने वाली घटी संख्या
जिले में मलेरिया की चपेट में आने वालों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2017 में 10, वर्ष 2018 में 20, वर्ष 2019 में 14 लोग मेलेरिया की चपेट में आए। वहीं, वर्ष 2020 में जिले में कोई केस ही नहीं मिला। वर्ष 2021 में अब तक 4 केस मलेरिया का सामने आया है।
जिले में इलाज की समुचित व्यवस्था है। बेहतर इलाज के वजह से ही रिकवरी रेट ठीक है। इसके अलावा विभाग की ओर से बीमारियों से बचाव के प्रति समय-समय पर जागरूक किया जाता है जिसके परिणाम अच्छे दिख रहे हैं।
-डॉ.एके श्रीवास्तव, सीएमओ