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Maharajganj News: अवैध अस्पतालों में जान गंवा रहे मरीज...जिम्मेदारों की जांच नहीं हो रही पूरी

Tue, 07 Apr 2026 02:05 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 07 Apr 2026 02:05 AM IST
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Patients are losing their lives in illegal hospitals...investigations of those responsible are not being completed.
शहर स्थित अनुराग, मेडिकल स्टोर, परतावल में मरीजों की मौत का मामला
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अभी तक नहीं दी जांच रिपोर्ट, उठ रहे सवाल
महराजगंज। जिले में झोलाछाप की लापरवाही से मरीजों की मौत के कई मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग महज अवैध अस्पताल सील करने तक सीमित है। इसके बाद शुरू हुई जांच की प्रक्रिया पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं। जांच के लिए गठित टीम के रिपोर्ट सौंपने की समय सीमा निर्धारित नहीं होती, रिपोर्ट नहीं मिलने पर आगे की कार्रवाई नहीं हो पाती है। कई मामलों के पीड़ितों का आरोप है कि शुरुआती कार्रवाई के बाद जिम्मेदार मामले को भूल जाते हैं और पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटकता रहता है।
सूत्रों की माने तो कई अवैध अस्पताल बिना पंजीकरण और बिना डिग्री वाले कर्मचारियों के सहारे चल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी क्लीनिक संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने में हिचकिचाते हैं। कई मामलों में अस्पताल सील तो कर दिए जाते हैं लेकिन संचालक फरार हो जाते हैं और कुछ समय बाद फिर से गतिविधियां शुरू होने की आशंका बनी रहती हैं।
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29 मार्च की शाम को शाम को सदर कोतवाली क्षेत्र के अमरुतिया गांव के पासी टोला में रामसवार की बेटी मोनिका (17) को हल्का बुखार होने पर गांव के सोनू मेडिकल स्टोर ले जाया गया। मेडिकल स्टोर संचालक ने किशोरी को इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगने के करीब आधे घंटे बाद लड़की को चक्कर आने लगा और जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। परिजनों ने इस मामले में महराजगंज चौक पर शव रखकर जाम लगा दिया था। इस मामले का जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया था। इसके बाद इस मामले की जांच के लिए नोडल अधिकारी बनाए गए। अभी तक इस मामले की जांच चल रही है।
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वहीं 25 मार्च को नगर के अनुराग अस्पताल में रामपुर बलडीहा निवासी रेहाना खातून की ऑपरेशन से प्रसव के बाद मौत हो गई थी। हो-हल्ला मचने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया। बताया जा रहा है कि इस अस्पताल को पहले भी सील किया गया था। इसके बाद से मामले की जांच चल रही है। पूछने पर इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी भी स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं।
झोलाछाप ने दिलासा देकर एक महीने से कर रहा था मासूम अनन्या का इलाज

- जांच में दोषी पाए जाने पर बख्शे नहीं जाएंगे दोषी: जिलाधिकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
परतावल। परतावल में बीते बुधवार को झोलाछाप की लापरवाही से 10 माह के मासूम की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। परिजनों को बार-बार दिलासा देकर झोलाछाप एक महीने से ज्यादा समय से मासूम अनन्या का इलाज करता रहा। मामले में जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने कहा कि जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मासूम के पिता प्रदीप कुमार ने बताया कि वे पिछले एक माह से अधिक समय से अपनी बेटी का इलाज झोलाछाप संजय सिंह के यहां करा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि झोलाछाप लगातार उन्हें झूठा दिलासा देता रहा और कभी भी स्थिति की गंभीरता के बारे में नहीं बताया। पिता का कहना है कि यदि समय रहते सही सलाह मिल जाती तो वे किसी अच्छे अस्पताल में इलाज कराते और शायद उनकी बेटी की जान बच सकती थी। परिजनों के अनुसार, अनन्या की तबीयत खराब होने पर पहली बार 24 फरवरी को उसे इलाज के लिए संजय सिंह के पास ले जाया गया था।
बताया गया कि 25 मार्च को अचानक बच्ची की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। घबराए परिजन उसे तुरंत दोबारा संजय सिंह के पास लेकर पहुंचे। उस दिन भी उसने पांच दिन की दवा देकर घर भेज दिया और कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, बच्ची जल्द ठीक हो जाएगी। जब लगातार हालत बिगड़ती गई तो एक अप्रैल को एक बार फिर बच्ची को उसी झोलाछाप के पास ले जाया गया। झोलाछाप ने उसे भाप दिलवाया। इसके बाद वह अचानक सुस्त पड़ गई और सो गई। इस पर झोलाछाप ने परिजनों से कहा कि बच्ची को घर ले जाइए, नींद से उठने पर वह पूरी तरह ठीक हो जाएगी। परिजनों को यह जरा भी अंदाजा नहीं था कि वह नींद उसकी अंतिम नींद साबित होगी।

इस संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नवनाथ प्रसाद एवं आयुर्वेद अधिकारी हरेंद्र जैसवार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों अधिकारियों का फोन रिसीव नहीं हुआ।
वर्जन

मामले को गंभीरता से लेकर इसकी जांच कराई जाएगी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-संतोष कुमार शर्मा, जिलाधिकारी
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