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पनियरा क्षेत्र था कांग्रेस का गढ़, वर्ष 1993 में खिला कमल
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पनियरा क्षेत्र था कांग्रेस का गढ़, वर्ष 1993 में खिला कमल
महराजगंज। पनियरा विधानसभा क्षेत्र कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था। यहां पहली बार वर्ष 1993 में कमल खिला था। यह विधानसभा क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह की कर्मस्थली रही है। पनियरा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर वीर बहादुर सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। वीर बहादुर सिंह के नाम से पहचाने जाने वाले पनियरा विधानसभा सीट कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ था, लेकिन 1996 से पार्टी इस सीट पर नहीं जीत सकी। पनियरा विधानसभा सीट से कांग्रेस को सात बार जीत मिली थी।
बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार भी पनियरा सीट से दो बार जीते हैं। भारतीय जनता पार्टी भी इस सीट से जीत चुकी है, लेकिन समाजवादी पार्टी को इस विधानसभा क्षेत्र में जीत नहीं मिली है। पहली बार पनियरा विधानसभा सीट के लिए 1952 में चुनाव हुआ था। उस समय कांग्रेस के टिकट पर द्वारिका प्रसाद पांडेय विधायक बने और 1957 में भी कब्जा बरकरार रखा। इसके बाद 1962 के चुनाव में कांग्रेस ने वीर बहादुर सिंह को पनियरा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, जिसमें उन्हें जीत भी मिली। वीर बहादुर सिंह का जीत का सफर लगातार जारी रहा और 1967, 1969, 1974, 1980 और 1985 में भी इसी सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचते रहे। इसी बीच 1985 से 1988 तक यूपी के मुख्यमंत्री रहे।
पनियरा सीट से 1989 में वीर बहादुर सिंह के निधन के बाद उनके पुत्र फतेह बहादुर सिंह को कांग्रेस ने पनियरा विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा। फतेह बहादुर को निर्दल प्रत्याशी गणपत सिंह ने हरा दिया। 1991 में जनता दल के परशुराम मिश्रा को हराकर फतेह बहादुर सिंह पनियरा विधानसभा सीट से विधानसभा पहुंचे, लेकिन 1993 में गणपत सिंह बीजेपी के टिकट पर जीत गए। 1996 में बसपा-कांग्रेस गठबंधन और 2007 में बसपा से फतेह बहादुर सिंह ने फिर बाजी मारते हुए विधायक बने। 2012 में बसपा के देव नारायण उर्फ जीएम सिंह ने विधायक बने।
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पनियरा विधानसभा सीट से वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के ज्ञानेंद्र सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बसपा के गणेश शंकर पांडेय को हरा दिया था। भाजपा के ज्ञानेंद्र सिंह को 1,19,308 मत मिले थे, जबकि बीएसपी के गणेश शंकर पांडेय को 51,817 मिले मत थे। वहीं कांग्रेस की तलत अजीज को 48,004 मिले थे।
क्या कहते हैं क्षेत्र के लोग
परतावल के रहने वाले सुनील पांडेय कहते हैं कि क्षेत्र में चुनाव समीकरण के बारे में कुछ सटीक कह पाना मुश्किल होगा। स्थानीय समस्याओं को मुद्दा बनाकर मतदान किया जाएगा। जनभावनाओं पर जो, प्रत्याशी खरा उतरेगा, उसे मौका दिया जाएगा। श्यामदेउरवां गांव के गोपाल श्रीवास्तव कहते हैं कि गुजरे वक्त और वर्तमान परिवेश में जमीन आसमान का अंतर है।
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महराजगंज। पनियरा विधानसभा क्षेत्र कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था। यहां पहली बार वर्ष 1993 में कमल खिला था। यह विधानसभा क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह की कर्मस्थली रही है। पनियरा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर वीर बहादुर सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। वीर बहादुर सिंह के नाम से पहचाने जाने वाले पनियरा विधानसभा सीट कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ था, लेकिन 1996 से पार्टी इस सीट पर नहीं जीत सकी। पनियरा विधानसभा सीट से कांग्रेस को सात बार जीत मिली थी।
बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार भी पनियरा सीट से दो बार जीते हैं। भारतीय जनता पार्टी भी इस सीट से जीत चुकी है, लेकिन समाजवादी पार्टी को इस विधानसभा क्षेत्र में जीत नहीं मिली है। पहली बार पनियरा विधानसभा सीट के लिए 1952 में चुनाव हुआ था। उस समय कांग्रेस के टिकट पर द्वारिका प्रसाद पांडेय विधायक बने और 1957 में भी कब्जा बरकरार रखा। इसके बाद 1962 के चुनाव में कांग्रेस ने वीर बहादुर सिंह को पनियरा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, जिसमें उन्हें जीत भी मिली। वीर बहादुर सिंह का जीत का सफर लगातार जारी रहा और 1967, 1969, 1974, 1980 और 1985 में भी इसी सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचते रहे। इसी बीच 1985 से 1988 तक यूपी के मुख्यमंत्री रहे।
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पनियरा सीट से 1989 में वीर बहादुर सिंह के निधन के बाद उनके पुत्र फतेह बहादुर सिंह को कांग्रेस ने पनियरा विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा। फतेह बहादुर को निर्दल प्रत्याशी गणपत सिंह ने हरा दिया। 1991 में जनता दल के परशुराम मिश्रा को हराकर फतेह बहादुर सिंह पनियरा विधानसभा सीट से विधानसभा पहुंचे, लेकिन 1993 में गणपत सिंह बीजेपी के टिकट पर जीत गए। 1996 में बसपा-कांग्रेस गठबंधन और 2007 में बसपा से फतेह बहादुर सिंह ने फिर बाजी मारते हुए विधायक बने। 2012 में बसपा के देव नारायण उर्फ जीएम सिंह ने विधायक बने।
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पनियरा विधानसभा सीट से वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के ज्ञानेंद्र सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बसपा के गणेश शंकर पांडेय को हरा दिया था। भाजपा के ज्ञानेंद्र सिंह को 1,19,308 मत मिले थे, जबकि बीएसपी के गणेश शंकर पांडेय को 51,817 मिले मत थे। वहीं कांग्रेस की तलत अजीज को 48,004 मिले थे।
क्या कहते हैं क्षेत्र के लोग
परतावल के रहने वाले सुनील पांडेय कहते हैं कि क्षेत्र में चुनाव समीकरण के बारे में कुछ सटीक कह पाना मुश्किल होगा। स्थानीय समस्याओं को मुद्दा बनाकर मतदान किया जाएगा। जनभावनाओं पर जो, प्रत्याशी खरा उतरेगा, उसे मौका दिया जाएगा। श्यामदेउरवां गांव के गोपाल श्रीवास्तव कहते हैं कि गुजरे वक्त और वर्तमान परिवेश में जमीन आसमान का अंतर है।