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31383 बच्चों पर सिर्फ एक बाल रोग विशेषज्ञ

Wed, 02 Jun 2021 11:22 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 02 Jun 2021 11:22 PM IST
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Only one pediatric doctor per 31383 children
31383 बच्चों पर सिर्फ एक बाल रोग डॉक्टर
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ऐसे में कैसे करेंगे कोरोना की तीसरी लहर से मुकाबला
निजी और सरकारी अस्पतालों को मिलाकर 58 बाल रोग विशेषज्ञ
इस तरह एक डॉक्टर पर औसतन 5952 बच्चों की जिम्मेदारी पड़ेगी
6-17 साल तक बच्चों की संख्या को जोड़ने पर स्थिति और खराब
डब्ल्यूएचओ के अनुसार एक हजार की आबादी पर एक डॉक्टर जरूरी
महराजगंज। आशंका जताई जा रही है कि कोरोना की तीसरी लहर में सबसे अधिक प्रभावित बच्चे होंगे। इसी को ध्यान में रखकर सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियां कर रही है। फिलहाल जिले में शून्य से पांच साल तक के 31383 बच्चों पर केवल एक बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर है। ऐसे में यदि तीन प्रतिशत बच्चे भी संक्रमित होते हैं तो उनका इलाज कैसे हो पाएगा? विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानक के अनुसार एक हजार की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में शून्य से पांच वर्ष तक के 345217 बच्चे हैं। इसमें यदि 17 साल तक के बच्चों को भी जोड़ दिया जाए तो यह संख्या दोगुनी से भी अधिक हो जाएगी। वहीं, सरकारी अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर महज 11 हैं। इस तरह सिर्फ शून्य से पांच वर्ष तक के 31383 बच्चों पर केवल एक डॉक्टर है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कहते हैं कि हर हालात से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम हैं। लेकिन डॉक्टरों की कमी को वह भी स्वीकार करते हैं।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके राय ने बताया कि जिला अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए पांच बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इसके अलावा ईटीसी वार्ड, एसएनसीयू वार्ड, आईसीयू की व्यवस्था है। वहीं, जिले में 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिसमें से निचलौल एवं रतनपुर में तीन-तीन बेड का पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट है। इसके अलावा कहीं इसकी व्यवस्था नहीं है। निचलौल में दो, परतावल में एक, मंसूरगंज में एक, बृजमनगंज में एक बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। इस तरह जिले के सरकारी अस्पतालों में बच्चों के कुल 11 विशेषज्ञ डाक्टर हैं। इनके अलावा एक एसीएमओ और डीएलओ भी बाल रोग विशेषज्ञ हैं। जरूरत पड़ने पर इनकी भी सेवा ली जाएगी तो कुल 13 हो जाएंगे। इस हिसाब से भी 26555 बच्चों पर एक डॉक्टर होते हैं। इसमें यदि निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को भी शामिल करें तो स्थिति थोड़ी सुधरती है। जिले में 65 पंजीकृत निजी अस्पताल हैं, जिनमें करीब 20 अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। यानी 45 निजी अस्पतालों में बाल रोग के विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। इस तरह निजी और सरकारी अस्पतालों को मिलाकर कुल 58 बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हो जाते हैं। इसके बाद भी एक डॉक्टर पर औसतन 5952 बच्चों की जिम्मेदारी बैठती है। यह स्थिति तो सामान्य दिनों के लिए भी ठीक नहीं है। कोरोना जैसी संक्रामक बीमारी के लिए तो बिल्कुल भी सही नहीं कही जा सकती। यह संख्या तब है जबकि बच्चों की संख्या केवल पांच साल तक ली गई है। इसमें यदि 17 साल तक बच्चों की भी संख्या को शामिल कर लिया जाए तो स्थिति और भयावह हो जाती है।
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---वर्जन --
जिले में 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। यहां बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। जहां नहीं है, वहां जरूरत पड़ने पर बाल रोग विशेषज्ञ भेज दिए जाएंगे। एसीएमओ एवं डीएलओ भी बाल रोग विशेषज्ञ हैं, जरूरत पड़ने पर उनकी सेवा ली जाएगी। निचलौल एवं रतनपुर में तीन-तीन बेड का पीआईसीयू है। जिले के बच्चों के इलाज के लिए बेहतर प्रबंध है।
- डॉ. एके राय, मुख्य चिकित्साधिकारी
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जिले की व्यवस्था
- जिला अस्पताल में एसएनसीयू वार्ड-15 बेड, 15 आईसीयू, ईटीसी वार्ड में 10 बेड की व्यवस्था
- हर बेड पर बच्चे के साथ एक तीमारदार भी रहेगा
- अस्पताल के किचन में बच्चों की उम्र के लिहाज से खाना बनाया जाएगा
- छह सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ तैनात
- एसीएमओ एवं डीएलओ भी बाल रोग विशेषज्ञ
- सीएचसी निचलौल एवं रतनपुर में 3-3 बेड का पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट)
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