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Maharajganj News: 167 पदों पर महज 71 विशेषज्ञ तैनात, ऑपरेशन सिर्फ दो सर्जन के भरोसे
Wed, 16 Sep 2026 01:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 16 Sep 2026 01:47 AM IST
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- 18 सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 96 पद खाली
- नियमित विशेषज्ञों के 108 पदों में 84 खाली, संविदा विशेषज्ञों के 37 में 24 पद रिक्त
- सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और निश्चेतक की कमी से मरीजों को हो रही परेशानी
महराजगंज। जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावों के बीच विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 167 स्वीकृत पदों के सापेक्ष महज 71 की तैनाती है। 96 पद खाली हैं। हालात यह हैं कि जिले में ऑपरेशन की व्यवस्था केवल दो सर्जन के भरोसे चल रही है। गंभीर मरीजों को उपचार के लिए जिला अस्पताल या बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर करना पड़ रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को निजी अस्पतालों में अधिक खर्च कर इलाज कराने की मजबूरी भी बढ़ रही है।
जिले में जिला अस्पताल के अलावा 18 सीएचसी और 41 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) संचालित हैं। सीएचसी पर स्वीकृत विशेषज्ञ चिकित्सकों के 167 पदों में 96 पद खाली चल रहे हैं। नियमित विशेषज्ञ चिकित्सकों के 108 स्वीकृत पदों के सापेक्ष महज 24 की तैनाती है, जबकि 84 पद रिक्त हैं। इनमें स्त्री रोग विशेषज्ञ, सर्जन, निश्चेतक, बाल रोग विशेषज्ञ, डेंटल सर्जन और फिजिशियन के पद बड़ी संख्या में खाली हैं।
सबसे खराब स्थिति सर्जन और स्त्री रोग विशेषज्ञों की है। स्त्री रोग विशेषज्ञ के 18 स्वीकृत पदों में 16 खाली हैं। सर्जन के सभी 16 पद रिक्त हैं। निश्चेतक के 15, फिजिशियन के 15, डेंटल सर्जन के 13 और बाल रोग विशेषज्ञ के 11 पद खाली हैं। ऐसे में सीएचसी स्तर पर गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ उपचार और ऑपरेशन की सुविधा मिलना मुश्किल है।
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संविदा से भी नहीं भर पा रही विशेषज्ञों की कमी
नियमित चिकित्सकों की कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने संविदा पर भी चिकित्सकों की तैनाती की है, लेकिन इससे विशेषज्ञ सेवाओं की कमी दूर नहीं हो सकी है। संविदा चिकित्सकों के 47 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 45 की तैनाती है। वहीं संविदा विशेषज्ञ चिकित्सकों के 37 पदों में केवल 13 विशेषज्ञ ही कार्यरत हैं। 24 पद अब भी रिक्त हैं।
वर्तमान में संविदा पर दो स्त्री रोग विशेषज्ञ, तीन निश्चेतक, चार बाल रोग विशेषज्ञ, एक पैथोलॉजिस्ट, एक एमटी मेडिसिन और एक डेंटल सर्जन तैनात हैं। सर्जन और निश्चेतक की कमी के कारण सीएचसी स्तर पर ऑपरेशन की सुविधा प्रभावित है। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल या गोरखपुर रेफर करना पड़ता है।
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निजी अस्पताल का बढ़ रहा सहारा
विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। इससे इलाज का खर्च बढ़ जाता है। गंभीर मरीजों को गोरखपुर ले जाने में समय और धन दोनों खर्च होते हैं।
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बोले लाेग
पुरैना निवासी देवेंद्र पांडेय ने कहा कि सीएचसी पर स्वीकृत पदों के सापेक्ष चिकित्सकों की तैनाती हो जाए तो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को काफी राहत मिलेगी। सरकारी अस्पताल में कम खर्च में जांच, दवा और उपचार की सुविधा मिल सकती है।
बसंतपुर निवासी सिद्धार्थ सिंह उर्फ सिद्धू बाबू ने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने पर मरीजों को निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ता है। गंभीर स्थिति में गोरखपुर जाना पड़ता है, जिससे मरीज और परिजनों की परेशानी बढ़ जाती है।
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आंकड़ों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थिति
कुल विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वीकृत पद : 167
तैनात विशेषज्ञ : 71
रिक्त पद : 96
नियमित विशेषज्ञों के स्वीकृत पद : 108
नियमित विशेषज्ञ तैनात : 24
नियमित विशेषज्ञों के रिक्त पद : 84
संविदा विशेषज्ञों के स्वीकृत पद : 37
संविदा विशेषज्ञ तैनात : 13
संविदा विशेषज्ञों के रिक्त पद : 24
दो साल के अनुबंध पर तैनात चिकित्सक : 38
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इन विशेषज्ञों के पद सबसे ज्यादा खाली
स्त्री रोग विशेषज्ञ : 18 में 16 पद खाली
सर्जन : 16 में 16 पद खाली
निश्चेतक : 15 पद खाली
फिजिशियन : 15 पद खाली
डेंटल सर्जन : 13 पद खाली
बाल रोग विशेषज्ञ : 11 पद खाली
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कोट
जिले में स्वीकृत पद के सापेक्ष रिक्त पदों की सूचना उच्चाधिकारियों को भेजी जाती है। तैनाती निदेशालय से होती है। जिले में जैसे ही विशेषज्ञ चिकित्सक मिलेंगे, उनकी तैनाती की जाएगी। - डॉ. राजेश द्विवेदी, डिप्टी सीएमओ
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- नियमित विशेषज्ञों के 108 पदों में 84 खाली, संविदा विशेषज्ञों के 37 में 24 पद रिक्त
- सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और निश्चेतक की कमी से मरीजों को हो रही परेशानी
महराजगंज। जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावों के बीच विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 167 स्वीकृत पदों के सापेक्ष महज 71 की तैनाती है। 96 पद खाली हैं। हालात यह हैं कि जिले में ऑपरेशन की व्यवस्था केवल दो सर्जन के भरोसे चल रही है। गंभीर मरीजों को उपचार के लिए जिला अस्पताल या बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर करना पड़ रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को निजी अस्पतालों में अधिक खर्च कर इलाज कराने की मजबूरी भी बढ़ रही है।
जिले में जिला अस्पताल के अलावा 18 सीएचसी और 41 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) संचालित हैं। सीएचसी पर स्वीकृत विशेषज्ञ चिकित्सकों के 167 पदों में 96 पद खाली चल रहे हैं। नियमित विशेषज्ञ चिकित्सकों के 108 स्वीकृत पदों के सापेक्ष महज 24 की तैनाती है, जबकि 84 पद रिक्त हैं। इनमें स्त्री रोग विशेषज्ञ, सर्जन, निश्चेतक, बाल रोग विशेषज्ञ, डेंटल सर्जन और फिजिशियन के पद बड़ी संख्या में खाली हैं।
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सबसे खराब स्थिति सर्जन और स्त्री रोग विशेषज्ञों की है। स्त्री रोग विशेषज्ञ के 18 स्वीकृत पदों में 16 खाली हैं। सर्जन के सभी 16 पद रिक्त हैं। निश्चेतक के 15, फिजिशियन के 15, डेंटल सर्जन के 13 और बाल रोग विशेषज्ञ के 11 पद खाली हैं। ऐसे में सीएचसी स्तर पर गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ उपचार और ऑपरेशन की सुविधा मिलना मुश्किल है।
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संविदा से भी नहीं भर पा रही विशेषज्ञों की कमी
नियमित चिकित्सकों की कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने संविदा पर भी चिकित्सकों की तैनाती की है, लेकिन इससे विशेषज्ञ सेवाओं की कमी दूर नहीं हो सकी है। संविदा चिकित्सकों के 47 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 45 की तैनाती है। वहीं संविदा विशेषज्ञ चिकित्सकों के 37 पदों में केवल 13 विशेषज्ञ ही कार्यरत हैं। 24 पद अब भी रिक्त हैं।
वर्तमान में संविदा पर दो स्त्री रोग विशेषज्ञ, तीन निश्चेतक, चार बाल रोग विशेषज्ञ, एक पैथोलॉजिस्ट, एक एमटी मेडिसिन और एक डेंटल सर्जन तैनात हैं। सर्जन और निश्चेतक की कमी के कारण सीएचसी स्तर पर ऑपरेशन की सुविधा प्रभावित है। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल या गोरखपुर रेफर करना पड़ता है।
निजी अस्पताल का बढ़ रहा सहारा
विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। इससे इलाज का खर्च बढ़ जाता है। गंभीर मरीजों को गोरखपुर ले जाने में समय और धन दोनों खर्च होते हैं।
बोले लाेग
पुरैना निवासी देवेंद्र पांडेय ने कहा कि सीएचसी पर स्वीकृत पदों के सापेक्ष चिकित्सकों की तैनाती हो जाए तो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को काफी राहत मिलेगी। सरकारी अस्पताल में कम खर्च में जांच, दवा और उपचार की सुविधा मिल सकती है।
बसंतपुर निवासी सिद्धार्थ सिंह उर्फ सिद्धू बाबू ने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने पर मरीजों को निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ता है। गंभीर स्थिति में गोरखपुर जाना पड़ता है, जिससे मरीज और परिजनों की परेशानी बढ़ जाती है।
आंकड़ों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थिति
कुल विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वीकृत पद : 167
तैनात विशेषज्ञ : 71
रिक्त पद : 96
नियमित विशेषज्ञों के स्वीकृत पद : 108
नियमित विशेषज्ञ तैनात : 24
नियमित विशेषज्ञों के रिक्त पद : 84
संविदा विशेषज्ञों के स्वीकृत पद : 37
संविदा विशेषज्ञ तैनात : 13
संविदा विशेषज्ञों के रिक्त पद : 24
दो साल के अनुबंध पर तैनात चिकित्सक : 38
इन विशेषज्ञों के पद सबसे ज्यादा खाली
स्त्री रोग विशेषज्ञ : 18 में 16 पद खाली
सर्जन : 16 में 16 पद खाली
निश्चेतक : 15 पद खाली
फिजिशियन : 15 पद खाली
डेंटल सर्जन : 13 पद खाली
बाल रोग विशेषज्ञ : 11 पद खाली
कोट
जिले में स्वीकृत पद के सापेक्ष रिक्त पदों की सूचना उच्चाधिकारियों को भेजी जाती है। तैनाती निदेशालय से होती है। जिले में जैसे ही विशेषज्ञ चिकित्सक मिलेंगे, उनकी तैनाती की जाएगी। - डॉ. राजेश द्विवेदी, डिप्टी सीएमओ