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Maharajganj News: नेपाल से विदेश जाने पर रोक, भारतीय से रास्ता निकाल रहीं युवतियां
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कूट रचित दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनवाने में मदद करते हैं दलाल
जेल भेजी गई नेपाली युवती का पासपोर्ट फॉरेन सेक्सन में केंसीलेसन के लिए भेजा गया
महराजगंज। बीते दिन नेपाली युवती हांगकांग जाने की कोशिश में थी लेकिन सुरक्षा कर्मियों की चौकसी से पकड़ ली गई। नेपाली युवतियां ऐसे ही कूट रचित दस्तावेज के सहारे विदेश जाने की कोशिश करती हैं। पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं। जेल भेजी गई नेपाली युवती का पासपोर्ट फॉरेन सेक्सन में कैंसीलेसन के लिए भेजा गया है। युवती ने किसके जरिए कूटरचित दस्तावेज बनवाया। इसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, नेपाल से हांगकांग सहित कई देशों में नेपाली महिलाओं और युवतियों के जाने पर नेपाल सरकार ने रोक लगा रखी है। इसके कारण नेपाली युवतियां भारत का रास्ता अपना रही हैं। बीते दिनों सीमा पर कई युवतियों को नेपाली एवं भारतीय स्वयं सेवी संस्था ने बॉर्डर पर रोक को उन्हें वापस भेज दिया। कुछ महिलाओं और युवतियों को भारतीय दूतावास और भारत में नेपाल दूतावास के सहयोग से सोनौली के रास्ते नेपाल भेजा गया। नेपाली युवतियों को बाहर भेजने के लिए दलाल फर्जी दस्तावेज बनवाते हैं।
बीते शनिवार की रात पकड़ी गई नेपाली युवती भी भारत के रास्ते हांगकांग जाने की तैयारी में थी। भारत-नेपाल सीमा सोनौली पर नेपाली युवती आगमन डिपार्चर स्टांप लगाने के लिए पहुंची थी। हालांकि भारत एवं नेपाल के यात्रियों को भारत से नेपाल आने-जाने के दौरान पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं पड़ती। उसने अपना शर्मीला लामा पिता-कवास दोर्जे लामा, पता नया गांव देउपुर जिला, कावेरेपालन चौक नेपाल बताया। शर्मीला लामा ने अपने संपर्कों के माध्यम से सोनिया श्रेष्ठ के नाम से फर्जी तरीके से भारतीय पासपोर्ट बनवाया था। पूछताछ में शर्मीला लामा ने स्वीकार किया की उसने नाम व पता बदल कर भारतीय दस्तावेज बनवाए हैं।
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सूत्र बताते हैं कि नेपाली नागरिकों को भारत के रास्ते विदेश जाने के लिए दूतावास से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। इसके बाद ही वह भारत के रास्ते विदेश जा सकते हैं। दलाल युवतियों को भारत के महानगरों की नागरिकता दिला कर भारतीय नागरिक बनाकर विदेशों में भेजने की कोशिश करते हैं। बीते माह जुलाई में 12 से अधिक युवतियों को सरहद पार करते हुए पकड़ गया। इन्हें पूछताछ के बाद महिला सुधार केंद्र भैरहवा भेज दिया गया। नेपाली युवतियां काम करने का हवाला देकर भारत के रास्ते खाड़ी देश जाना चाहती हैं। दलाल सोनौली के रास्ते लड़कियों को खाड़ी देशों तक पहुंचा रहे हैं।
क्षेत्राधिकारी नौतनवा अंकुर गौतम ने बताया कि नेपाली युवती को जेल भेजने के बाद अन्य जरूरी जानकारी एकत्रित की जा रही है।
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केस नंबर एक-
तीन अगस्त को सोनौली सीमा से सटे नेपाल बेलहिया में नेपाल से भारत जाने वाली महिलाओं की निगरानी करने वाली संस्था के लोग सीमा पर थे। इस दौरान करीब 3 बजे एक युवती पहुंची, वह अकेले दिल्ली जा रही थी। उसे संदेह के आधार पर रोक लिया गया। पूछताछ के आधार पर संस्था के दोनों सदस्यों ने बताया कि युवती दिल्ली नौकरी के लिए जा रही थी, उसे नेपाल वापस भेज दिया गया।
केस नंबर दो-
30 जून को रूपनदेही जिले के कालिदहा पुलिस चौकी के पास नेपाल पुलिस ने वाहनों की जांच के दौरान नेपाल से भारत जा रही एक महिला सहित दो युवतियों और एक युवक को मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। इनमें से तीन भारतीय नागरिक गोरखपुर के कैंपियरगंज के निवासी थे जबकि एक युवती नेपाल की थी।
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सीमा पर भारत जाने वाली सभी महिलाओं और युवतियों के पहचान पत्र चेक किए जाते हैं। भारतीय आईडी होने पर उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है।
-माया छेत्री, अध्यक्ष, माइटी सेवा संस्थान भैरहवा
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जेल भेजी गई नेपाली युवती का पासपोर्ट फॉरेन सेक्सन में केंसीलेसन के लिए भेजा गया
महराजगंज। बीते दिन नेपाली युवती हांगकांग जाने की कोशिश में थी लेकिन सुरक्षा कर्मियों की चौकसी से पकड़ ली गई। नेपाली युवतियां ऐसे ही कूट रचित दस्तावेज के सहारे विदेश जाने की कोशिश करती हैं। पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं। जेल भेजी गई नेपाली युवती का पासपोर्ट फॉरेन सेक्सन में कैंसीलेसन के लिए भेजा गया है। युवती ने किसके जरिए कूटरचित दस्तावेज बनवाया। इसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, नेपाल से हांगकांग सहित कई देशों में नेपाली महिलाओं और युवतियों के जाने पर नेपाल सरकार ने रोक लगा रखी है। इसके कारण नेपाली युवतियां भारत का रास्ता अपना रही हैं। बीते दिनों सीमा पर कई युवतियों को नेपाली एवं भारतीय स्वयं सेवी संस्था ने बॉर्डर पर रोक को उन्हें वापस भेज दिया। कुछ महिलाओं और युवतियों को भारतीय दूतावास और भारत में नेपाल दूतावास के सहयोग से सोनौली के रास्ते नेपाल भेजा गया। नेपाली युवतियों को बाहर भेजने के लिए दलाल फर्जी दस्तावेज बनवाते हैं।
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बीते शनिवार की रात पकड़ी गई नेपाली युवती भी भारत के रास्ते हांगकांग जाने की तैयारी में थी। भारत-नेपाल सीमा सोनौली पर नेपाली युवती आगमन डिपार्चर स्टांप लगाने के लिए पहुंची थी। हालांकि भारत एवं नेपाल के यात्रियों को भारत से नेपाल आने-जाने के दौरान पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं पड़ती। उसने अपना शर्मीला लामा पिता-कवास दोर्जे लामा, पता नया गांव देउपुर जिला, कावेरेपालन चौक नेपाल बताया। शर्मीला लामा ने अपने संपर्कों के माध्यम से सोनिया श्रेष्ठ के नाम से फर्जी तरीके से भारतीय पासपोर्ट बनवाया था। पूछताछ में शर्मीला लामा ने स्वीकार किया की उसने नाम व पता बदल कर भारतीय दस्तावेज बनवाए हैं।
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सूत्र बताते हैं कि नेपाली नागरिकों को भारत के रास्ते विदेश जाने के लिए दूतावास से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। इसके बाद ही वह भारत के रास्ते विदेश जा सकते हैं। दलाल युवतियों को भारत के महानगरों की नागरिकता दिला कर भारतीय नागरिक बनाकर विदेशों में भेजने की कोशिश करते हैं। बीते माह जुलाई में 12 से अधिक युवतियों को सरहद पार करते हुए पकड़ गया। इन्हें पूछताछ के बाद महिला सुधार केंद्र भैरहवा भेज दिया गया। नेपाली युवतियां काम करने का हवाला देकर भारत के रास्ते खाड़ी देश जाना चाहती हैं। दलाल सोनौली के रास्ते लड़कियों को खाड़ी देशों तक पहुंचा रहे हैं।
क्षेत्राधिकारी नौतनवा अंकुर गौतम ने बताया कि नेपाली युवती को जेल भेजने के बाद अन्य जरूरी जानकारी एकत्रित की जा रही है।
केस नंबर एक-
तीन अगस्त को सोनौली सीमा से सटे नेपाल बेलहिया में नेपाल से भारत जाने वाली महिलाओं की निगरानी करने वाली संस्था के लोग सीमा पर थे। इस दौरान करीब 3 बजे एक युवती पहुंची, वह अकेले दिल्ली जा रही थी। उसे संदेह के आधार पर रोक लिया गया। पूछताछ के आधार पर संस्था के दोनों सदस्यों ने बताया कि युवती दिल्ली नौकरी के लिए जा रही थी, उसे नेपाल वापस भेज दिया गया।
केस नंबर दो-
30 जून को रूपनदेही जिले के कालिदहा पुलिस चौकी के पास नेपाल पुलिस ने वाहनों की जांच के दौरान नेपाल से भारत जा रही एक महिला सहित दो युवतियों और एक युवक को मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। इनमें से तीन भारतीय नागरिक गोरखपुर के कैंपियरगंज के निवासी थे जबकि एक युवती नेपाल की थी।
सीमा पर भारत जाने वाली सभी महिलाओं और युवतियों के पहचान पत्र चेक किए जाते हैं। भारतीय आईडी होने पर उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है।
-माया छेत्री, अध्यक्ष, माइटी सेवा संस्थान भैरहवा