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Maharajganj News: नवजात शिशु देखभाल इकाई में क्षमता से अधिक बच्चे भर्ती
Mon, 16 Sep 2024 07:50 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 16 Sep 2024 07:50 PM IST
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महराजगंज। जिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई में 32 बेड पर 44 नवजात भर्ती हैं। इससे इलाज में समस्या हो रही है। जन्म के बाद बीमार होने वाले बच्चों को इस वार्ड में भर्ती किया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चों का बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है।
जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में 32 बेड हैं। वर्तमान में लगातार नवजात मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, जांडिस, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है। इनमें कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिनों के लिए इसमें रखना पड़ता है।
आए-दिन कम से कम आठ से दस नवजात इस तरह के आ रहे हैं। सोमवार को यहां 44 नवजात भर्ती मिले। एक बेड पर दो-दो नवजातों को भर्ती कर इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। जिला अस्पताल के सिक एंड न्यू बर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन मिश्रा ने बताया कि भर्ती बच्चों का बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है। कोई समस्या नहीं है। सीएमएस डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों में बेहतर कार्य कराने की कोशिश की जा रही है।
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जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में 32 बेड हैं। वर्तमान में लगातार नवजात मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, जांडिस, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है। इनमें कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिनों के लिए इसमें रखना पड़ता है।
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आए-दिन कम से कम आठ से दस नवजात इस तरह के आ रहे हैं। सोमवार को यहां 44 नवजात भर्ती मिले। एक बेड पर दो-दो नवजातों को भर्ती कर इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। जिला अस्पताल के सिक एंड न्यू बर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन मिश्रा ने बताया कि भर्ती बच्चों का बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है। कोई समस्या नहीं है। सीएमएस डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों में बेहतर कार्य कराने की कोशिश की जा रही है।