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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Monkeys bit 11 children in Belbhar Manikaura village; frightened parents are personally escorting them to school.

Maharajganj News: बेलभार मनिकौरा गांव में बंदरों ने 11 बच्चों को काटा, सहमे अभिभावक खुद पहुंचा रहे स्कूल

Wed, 29 Jul 2026 01:57 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jul 2026 01:57 AM IST
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Monkeys bit 11 children in Belbhar Manikaura village; frightened parents are personally escorting them to school.
बंदरों के काटने के बाद अकेले स्कूल जाने से से डर रहे बच्चे, परिजन पहुंचा रहे स्कूल
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25-30 बंदर गांवों में पहुंच कर मचा रहे उत्पाद, खाने-पीने का सामान कर रहे नष्ट
परसामलिक। क्षेत्र के बेलभार मनिकौरा गांव के ग्रामीण बंदरों के झुंड से आतंकित हैं। गांव में 25 से 30 संख्या में आए बंदर घरों में घुसकर खाने-पीने वस्तुओं को तो नुकसान पहुंचाते ही हैं। इतना ही नहीं बंदरों ने स्कूल से आते या जाते समय गांव के 11 बच्चों को काट लिया है। हालत यह है कि बंदरों के खौफ के कारण बच्चे अकेले स्कूल नहीं जा रहे हैं। मजबूरी में अभिभावकों को बच्चों को स्कूल पहुंचाना पड़ रहा है।
कंपोजिट विद्यालय सेखुआनी में बीते एक माह में उपद्रवी बंदरों के झुंड ने इस स्कूल के करीब एक दर्जन छात्रों को काट लिया है। इस वजह से बच्चे एकदम डरे हुए हैं। डरे हुए बच्चों ने स्कूल जाना भी छोड़ दिया है।
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अब तो इन बंदरों का आतंक स्कूल की चहारदीवारी से निकलकर करीब एक किमी दूर स्थित बेलभार मनिकौरा तक पहुंच चुका है। इन बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम ने हाथ खड़े कर दिए हैं। मजबूरी में बच्चों को बंदरों से सुरक्षित करने की कमान अभिभावकों ने अपने हाथ में ले ली है। अभिभावक बच्चों को स्कूल पहुंचा रहे हैं।
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बंदर ने काटा तो 20 दिन नहीं गई स्कूल, अब नहीं जाती अकेले

सेखुआनी निवासी रामू ने बताया कि कक्षा एक में पढ़ने वाली उनकी बेटी साधना को बंदरों ने काट लिया था। रतनपुर सीएचसी पर इलाज हुआ था और टीका भी लगा था। बेटी 20 दिन तक स्कूल नहीं गई थी। जब जाने लायक हुई तो वह अकेले जाने में डरने लगी। अब खुद ही उसे रोजाना साइकिल पर बिठाकर स्कूल छोड़ने जाना पड़ता है। वहीं संजय साहनी की बेटी सुधा साहनी इसी स्कूल में कक्षा पांच की छात्रा है। संजय के अनुसार जब तक उनकी बेटी स्कूल में पढ़ती है, तब तक वे स्कूल में रहकर नजर रखते हैं।
कक्षा पांच की छात्रा खदीजा खातून के पिता अब्दुल्लाह ने बताया कि उनके दुकान से 200 मीटर पर स्कूल है लेकिन वे कोई खतरा नहीं लेना चाहते हैं। लिहाजा, खुद की साइकिल से बेटी को स्कूल छोड़ने जाते हैं। वहीं कक्षा दो की छात्रा खुशी के पिता सोनू बताते हैं कि बंदरों की डर की वजह से बेटी को रोजाना स्कूल छोड़ने जाना पड़ता है। यहां तक कि बेटी को कक्षा में बैठाकर ही वापस लौटते हैं।

बंदरों को भगाने के लिए बनाई युवाओं की टोली
उपद्रवी बंदरों का खौफ बीते दो दिन से सेखुआनी गांव से एक किमी दूर स्थित बेलभार मनिकौरा गांव तक पहुंच चुका है। यहां के दया पासवान ने बताया कि गांव में 25 से 30 की संख्या में बंदर पहुंचते हैं और घर में रखे गेहूं, आटा से लेकर अन्य खाद्य पदार्थ का नुकसान कर डालते हैं। दयाराम यादव ने बताया कि बंदरों को भगाने के लिए गांव में चार से पांच युवाओं की एक टोली बनाई गई है। जैसे ही बंदर गांव में घुसते हैं लाठी डंडे से लैस युवाओं की ये टीम उन्हें खदेड़ देती है। वहीं गांव के रामबचन यादव ने बताया कि बंदरों के खौफ से गांव के लड़कों ने खुले में खेलना छोड़ दिया है। महिलाएं व युवतियां घर से बाहर निकलने में डरती हैं।
कंपोजिट स्कूल में पढ़ने जा रही बेटी की सुरक्षा को लेकर हमेशा ही डर बना रहता है। डर लगता है कि कहीं बंदर हमला कर बच्ची को घायल न कर दें। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय शासन प्रशासन भी गंभीर नहीं दिख रहा है।

रामू, बेलभार मनिकौरा
स्कूल में पढ़ने वाले 11 बच्चों को स्कूल से आते या जाते समय बंदर काट कर घायल कर चुके हैं। बेटी की आंखों में बंदरों का डर देख लगता है कि उसका स्कूल से नाम ही कटा दूं। वन विभाग भी इस मुद्दे पर पूरी तरह से मूकदर्शक बना हुआ है।


- संजय, बेलभार मनिकौरा
वर्जन

बंदरों को पकड़ने के लिए हमारे पास कोई व्यवस्था नहीं है। बंदरों को पकड़ने के लिए प्राइवेट रेस्क्यू टीम का सहारा लोगों को लेना पड़ेगा। इसका खर्च लगभग पांच से सात हजार रुपए होगा।
- जितेंद्र कुमार गौड़, उत्तरी चौंक रेंज के घोड़हवा बीट के फारेस्टर
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