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Maharajganj News: वाच टाॅवर से संवेदनशील ठोकरों की निगरानी
Mon, 24 Jun 2024 04:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 24 Jun 2024 04:08 AM IST
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बी गैप बांध के संवेदनशील ठोकर संख्या 13 पर बन रहा वाच टावर।
महराजगंज। जिले के सबसे महत्वपूर्ण बांध बी-गैप पर काम हो रहा है। बंधे के संवेदनशील ठोकरों की निगरानी के लिए वाच टाॅवर बन रहे हैं। पहले दो वाच टाॅवर थे, अब तीन और बन रहे हैं। करीब तीन करोड़ की लागत से पक्की सड़क भी बन रही है। बांधों की सुरक्षा के साथ ही करीब 50,000 की आबादी को आने-जाने में सहूलियत होगी।
जानकारी के अनुसार, नारायणी नदी (गंडक) के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील बी-गैप बांध के तीन ठोकरों की निगरानी के लिए सिंचाई विभाग की ओर से वाच टाॅवर का निर्माण कराया जा रहा है। लगभग तीन करोड़ की लागत से बी-गैप बांध पर ठोकर संख्या 6 से 16 के बीच करीब तीन किलोमीटर लंबे बांध को उच्चीकरण और चौड़ीकरण करने के साथ ही पक्की सड़क का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। पहाड़ों पर बारिश के साथ नदी में जलस्तर बढ़ने पर किसी भी समस्या से निपटने के लिए विभाग के जिम्मेदार तैयारी में लगे हैं।
नारायणी नदी से गांव महलवारी निवासी सुरेश थापा, राजू ठाकुर, विंध्याचल, राजकपूर आदि ने बताया की नेपाल के पहाड़ियों से निकली नारायणी नदी नवलपरासी जिला के सुस्ता से सटे होकर यूपी के महराजगंज, कुशीनगर जिले से होकर बहती है। यह नदी बिहार में चंपारण, सारन और मुजफ्फरपुर से होकर पटना के पास गंगा नदी में मिल जाती है। नदी पर बने बी-गैप, लिंक, ए-गैप और नेपाल बांध की देखरेख की पूरी जिम्मेदारी सिंचाई खंड द्वितीय महराजगंज की होती है। इतना ही नहीं जिम्मेदार हर वर्ष इन बांधों की मरम्मत और देखरेख में करोड़ों रुपये भी खर्च करते हैं।
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सिंचाई खंड द्वितीय के अवर अभियंता सुग्रीव मल्ल ने बताया की इस वर्ष बजट के मुताबिक निर्धारित समय के आसपास बांध पर मरम्मत कार्य पूरा करा लिया गया है। वहीं मूसलाधार बारिश और धूप में नदी के जलस्तर और संवेदनशील ठोकरों की निगरानी करने में दिक्कत हो रही थी। ऐसे में विभाग की ओर से बी-गैप बांध के संवेदनशील ठोकर संख्या नौ, 12 और 13 पर वाच टाॅवर का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जो अपने अंतिम चरण पर है। ठोकर संख्या चार और पांच पर पहले से वाच टाॅवर बने थे। उनका भी मरम्मत कराया गया है।
ऐसे में अब नदी के बढ़ते और घटते जलस्तर के साथ ही संवेदनशील ठोकरों की निगरानी रखने में सुविधा होगी। कहा की लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से बी-गैप बांध पर ठोकर संख्या 6 से 16 के बीच लगभग तीन किलोमीटर सड़क का चार से पांच फुट उच्चीकरण करने के साथ ही 3.75 मीटर चौड़ीकरण कर पक्की सड़क का निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
इस सड़क का निर्माण कार्य निर्धारित समय के अंदर लगभग एक माह में पूरा हो जाएगा। बांध पर सड़क बनने से नारायणी नदी के बांधों की देखरेख करने के साथ ही नदी से सटे नेपाल के गांव रतनगंज, महलवारी, तरैनी, सेमरी, नरसही, कुड़िया, बलीनगर, ठाडी घाट, सुस्ता सहित कई गांवों के करीब 50 हजार लोगों को आने-जाने में सुविधा होगी।
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जानकारी के अनुसार, नारायणी नदी (गंडक) के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील बी-गैप बांध के तीन ठोकरों की निगरानी के लिए सिंचाई विभाग की ओर से वाच टाॅवर का निर्माण कराया जा रहा है। लगभग तीन करोड़ की लागत से बी-गैप बांध पर ठोकर संख्या 6 से 16 के बीच करीब तीन किलोमीटर लंबे बांध को उच्चीकरण और चौड़ीकरण करने के साथ ही पक्की सड़क का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। पहाड़ों पर बारिश के साथ नदी में जलस्तर बढ़ने पर किसी भी समस्या से निपटने के लिए विभाग के जिम्मेदार तैयारी में लगे हैं।
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नारायणी नदी से गांव महलवारी निवासी सुरेश थापा, राजू ठाकुर, विंध्याचल, राजकपूर आदि ने बताया की नेपाल के पहाड़ियों से निकली नारायणी नदी नवलपरासी जिला के सुस्ता से सटे होकर यूपी के महराजगंज, कुशीनगर जिले से होकर बहती है। यह नदी बिहार में चंपारण, सारन और मुजफ्फरपुर से होकर पटना के पास गंगा नदी में मिल जाती है। नदी पर बने बी-गैप, लिंक, ए-गैप और नेपाल बांध की देखरेख की पूरी जिम्मेदारी सिंचाई खंड द्वितीय महराजगंज की होती है। इतना ही नहीं जिम्मेदार हर वर्ष इन बांधों की मरम्मत और देखरेख में करोड़ों रुपये भी खर्च करते हैं।
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सिंचाई खंड द्वितीय के अवर अभियंता सुग्रीव मल्ल ने बताया की इस वर्ष बजट के मुताबिक निर्धारित समय के आसपास बांध पर मरम्मत कार्य पूरा करा लिया गया है। वहीं मूसलाधार बारिश और धूप में नदी के जलस्तर और संवेदनशील ठोकरों की निगरानी करने में दिक्कत हो रही थी। ऐसे में विभाग की ओर से बी-गैप बांध के संवेदनशील ठोकर संख्या नौ, 12 और 13 पर वाच टाॅवर का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जो अपने अंतिम चरण पर है। ठोकर संख्या चार और पांच पर पहले से वाच टाॅवर बने थे। उनका भी मरम्मत कराया गया है।
ऐसे में अब नदी के बढ़ते और घटते जलस्तर के साथ ही संवेदनशील ठोकरों की निगरानी रखने में सुविधा होगी। कहा की लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से बी-गैप बांध पर ठोकर संख्या 6 से 16 के बीच लगभग तीन किलोमीटर सड़क का चार से पांच फुट उच्चीकरण करने के साथ ही 3.75 मीटर चौड़ीकरण कर पक्की सड़क का निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
इस सड़क का निर्माण कार्य निर्धारित समय के अंदर लगभग एक माह में पूरा हो जाएगा। बांध पर सड़क बनने से नारायणी नदी के बांधों की देखरेख करने के साथ ही नदी से सटे नेपाल के गांव रतनगंज, महलवारी, तरैनी, सेमरी, नरसही, कुड़िया, बलीनगर, ठाडी घाट, सुस्ता सहित कई गांवों के करीब 50 हजार लोगों को आने-जाने में सुविधा होगी।